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वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तैनात सैनिकों को खास उपकरण दिये गये




  • भारतीय सेना ने चीन की कार्रवाइयों पर बारीकी से नजर रखी

  • ग्लास शील्ड के साथ डंडा, हेलमेट और रायट-गिएर भी मिला

  • सिक्किम और अरुणाचल का जायजा लिया कमांडर मनोज पांडे

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तैनात भारतीय सैनिकों को नये उपकरण प्रदान




किये गये हैं। रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने आज गुवाहाटी में बताया कि चीन के

साथ मुकाबला करने के लिए भारतीय सेना पूरी तैयारी के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा

पर तैनात किया गया है। सेना के पूर्वी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनोज पांडे ने सिक्किम

और अरुणाचल मैं पूरी स्थिति का जायजा लिया और सुरक्षा स्थिति का जायजा लेने के

लिए फॉरवर्ड पोस्ट का दौरा किया। उन्होंने कठोर मौसम और दुर्गम इलाकों में सैनिकों की

प्रतिबद्धता की तारीफ करते हुए, सुरक्षा व्यवस्था की परख की। चीन के साथ गलवान

संघर्ष का एक साल पूरा होने को है, ऐसे में वास्तविक नियंत्रण रेखा एलएसी के सटे

इलाकों में भारतीय कमांडर पूरी तरह से मुस्तैद हैं। लेफ्टिनेंट जनरल मनोज पांडे ने हाल

ही में सेना की पूर्वी कमान के नए कमांडर के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। यह कमान

सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के क्षेत्रों में चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा की

सुरक्षा के लिए तैनात है। एलएसी पर भारतीय सैनिकों से छिटपुट लड़ाई और संघर्ष के

चीन की पीएलए सेना डंडे, भाले, पत्थर और दूसरे गैर-घातक हथियारों का इस्तेमाल

करती है। अब भारतीय सैनिक भी खास राएट-गिएर, हेलमेट, ग्लास-शिल्ड और बैटन

लेकर एलएसी पर तैनात है। पहली बार सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से सटी लाइन

ऑफ एक्चुयल कंट्रोल (एलएसी) की तस्वीरें सामने आई है जिसमें भारतीय सैनिक डंडे

लेकर दिखाई पड़ रहे हैं। हालांकि साथ में नाइटविजन इक्यूपमेंट से सुसज्जित हथियारबंद

सैनिक भी दिख रहे हैं। दरअसल, सेना पूर्वी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनोज

पांडे ने कलिमपोंग स्थित लॉयन स्ट्राइक डिवीजन का दौरा किया था।

वास्तविक नियंत्रण रेखा की स्थिति का निरीक्षण किया था

रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस दौरान आर्मी कमांडर ने सिक्किम

और अरुणाचल प्रदेश में चीन सीमा पर तैनात डिवीजन के अंतर्गत आने वाले फॉरवर्ड

लोकेशन का दौरा भी किया। वहां तैनात सैनिकों से मुलाकात भी की। इन मुलाकात की

तस्वीरें पूर्वी कमान ने आधिकारिक तौर से जारी की हैं। इन तस्वीरों में ही ‘आर्मी’ लिखी

ग्लास शील्ड के साथ हेलमेट और रायट-गिएर यानि दंगों के दौरान पुलिस द्वारा पहने

जाने वाली खास पोशक पहन रखी है। इस तरह की तस्वीर पहली बार सामने आई है। रक्षा




मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चीन के साथ मुकाबला करने के लिए भारतीय

सेना पूरी तैयारी के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तैनात हुआ है। एलएसी पर तैनात

सैनिकों को मिली खास यूनिफॉर्म मिली है। पिछले साल गलवान घाटी की हिंसा के बात

भारतीय सेना ने इस तरह के स्पेशल रायट-गिएर का ऑर्डर दिया था। क्योंकि गलवान

घाटी और फिंगर एरिया में झड़प के दौरान चीनी सैनिक ऐसे ही रायट-गियर पहने रहते

थे। भारत और चीन के बीच हुई संधि के मुताबिक, एलएसी पर दोनों देशों के सैनिक

फायरिंग नहीं कर सकते हैं। उस दौरान भारतीय सैनिकों को चीन की पीएलए सेना का

मुकाबला करने में खासी दिक्कत आई थी। क्योंकि भारतीय सैनिक इंसास या फिर

एके-47 राइफल के साथ ही तैनात होते थे। लेकिन संधि में बंधे होने के कारण फायरिंग

नहीं कर पाते थे।

संधि के कारण यहां फायरिंग की इजाजत नहीं थी

हालांकि, सरकार ने अब सेना को इस संधि से मुक्त कर दिया है और हालात के हिसाब से

जवाबी कारवाई करने का आदेश दिया है। यही वजह है कि पिछले साल 29-30 अगस्त की

रात को प्रीएम्टिव-कारवाई के दौरान फायरिंग की घटना भी सामने आई थी। लेकिन अब

भारतीय सैनिक भी चीन की पीएलए सेना की तरह रायट-गियर पहनकर एलएसी पर

तैनात रहते हैं। उल्लेख है कि भारत चीन के साथ 3488 किमी सीमा साझा करता है जो

जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश राज्यों के साथ

चलता है। साथ ही चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र ने भारत से लगी सीमा को भी छुआ।

हिमालयी क्षेत्र में विवादित सीमाओं पर नागरिक बस्तियां बनाने के लिए एक चीनी धक्का

भारत के लिए एक बड़ी नई चिंता के रूप में उभरा है क्योंकि भारत के विश्लेषकों का कहना

है कि यह दक्षिण चीन सागर में दावों को मजबूत करने की बीजिंग की रणनीति को

दोहराता है । लाल झंडा भारत के पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश में सीमा पर दोनों देशों

द्वारा विवादित क्षेत्र में चीन द्वारा निर्मित 1500 नए गांव ने उठाया है।विश्लेषकों का

कहना है कि क्षेत्र में गांव के निर्माण का भी भारत ने दावा किया है कि जमीन पर तथ्यों में

फेरबदल कर क्षेत्र पर चीन के दावे को मजबूत करने की रणनीति है।



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