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ला पाल्मा द्वीप पर फिर से जारी हुए नये चेतावनी संकेत




लावा के पत्थर अब समुद्र में गिरने लगे हैं
तीन गावों के लिए जारी की गयी खास चेतावनी
समंदर के पानी से मिलकर बनेगा अत्यंत जहरीला गैस

ला पाल्माः ला पाल्मा द्वीप पर कुछ गांवों में खास तौर पर लोगों को बाहर निकलने के लिए खास चेतावनी दी गयी है। दरअसल ज्वालामुखी का लावा अब समुद्री में गिरने की वजह से वहां जहरीले गैस के बनने का खतरा उत्पन्न हो गया है।




देखें वहां का ताजा नजारा

लोगों को इस जहरीले गैस से बचने की बार बार सलाह दी जा रही है क्योंकि इसके संपर्क में आने पर कई किस्म की परेशानियां हो सकती है।

वैसे ही पहले से राहत दल के विशेषज्ञ अधिक उम्र के लोगों तथा फेफड़े की बीमारियों से पीड़ित लोगों के वहां फैले धुआं से बचने की सलाह दे चुके हैं।

कुंबरे वियेजा ज्वालामुखी में पिछले नौ दिनों से लगातार विस्फोट हो रहा है। बीच बीच में जब इससे लावा निकलने की प्रक्रिया धीमी पड़ते देख लोग राहत की सांस लेते हैं, उसके बाद फिर से विस्फोट तेज हो जाता है।

बीच बीच में विस्फोट का आकार इतना बड़ा हो जाता है कि खौलता हुआ मैग्मा कई सौ फीट ऊंचाई तक जाता हुआ दूर से ही साफ दिखने लगता है।

अब स्थिति यह है कि ज्वालामुखी का यह लावा धीरे धीरे आगे बढ़ता हुआ अटलांटिक महासागर के करीब पहुंच गया है। लावा का सीधा प्रवाह समुद्र में अब तक नहीं होने के बाद भी कई बड़े पत्थर लूढ़कते हुए समुद्र में जा गिरे हैं।

गर्म लावा के समुद्र में गिरने से भाप बना है और इसी स्थिति को ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है क्योंकि इससे खतरनाक किस्म के गैस बनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।




लावा के समुद्र के करीब पहुंचने की वजह से आस पास के तीन गांवों को खास तौर पर सतर्क किया जा रहा है।

ला पाल्मा द्वीप में पहले ही जतायी थी आशंका

वैसे लावा के प्रवाह के करीब आने वाले इलाकों को पहले ही खाली करा लिया गया है। इस गर्म लावा की चपेट में आना वाला सारा इलाका जलकर राख हो चुका है।

19 सितंबर को ज्वालामुखी विस्फोट के प्रारंभ होने के पहले से ही इसके संकेत मिलने लगे थे। इसी वजह से लोगों को पहले से ही सतर्क कर दिया गया था।

जब यह विस्फोट प्रारंभ हुआ तो आनन फानन में पास के लोगों को वहां से हटाया गया। धीरे धीरे लावा का प्रवाह का इलाका बढ़ते चले जाने की वजह से अब तक छह हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है।

दूसरी तरफ आसमान पर बने धुआं के बादल और राख की वजह से वहां के हवाई अड्डे को भी बंद कर दिया गया था। अब तक तीन बार ज्वालामुखी विस्फोट को तेज होते देखा गया है।

इसके बीच ही लावा के कुछ बड़े आकार के पत्थर समुद्र में गिरते हुए भी देखे गये हैं। इसके रास्ते में आने वाले चार गावों को पूरी तरह खाली कराया गया है क्योंकि वे अब पूरी तरह जलकर राख भी हो चुके हैं।

आस पास के घरों के अलावा जंगल, पेड़ और खास तौर पर यहां के केला के बगान भी इसकी चपेट में आकर खत्म हो चुके हैं। केला का उत्पादन ही यहां के कृषि कारोबार का मुख्य आधार है।



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