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कोविड 19 को भी चंद अफसरों के लिए कमाई का जरिया बना लिया है

  • स्थानीय स्तर पर खरीद में कमिशनखोरी
  • गुणवत्ता का सवाल कर अपनी जेब गर्म
  • विजिलेंस को भी इन खरीद पर है पूरी निगाह
  • हजारीबाग, गिरिडीह और लोहरदगा से शिकायतें
संवाददाता

रांचीः कोविड 19 महामारी भी चंद अफसरों के लिए कमाई का जरिया बन गया है। झारखंड

इस महामारी के संक्रमण की रोकथाम के लिए राज्य सरकार अथक प्रयास कर रही है।

सरकार के इसी दृष्टिकोण का फायदा उठाते हुए चंद लोगों ने सामानों की खरीद में लूट

मचा रखी है। सभी जिलों में कोरोना वॉरियर्स के लिए ऐसे उपकरणों की खरीद हो रही है।

इसलिए जिलों के तुलनात्मक कीमतो से ही इस गड़बड़ी का पता चल जाता है। कुछ

मामलों में दोगुना दाम में सामानों की खरीद की जानकारी मिली है। सरकार के अति

व्यस्त होने के वजह से इसके लिए कोई एक दाम निर्धारित नहीं हो पाया है। लेकिन

एनएचआरएम को इस खरीद के लिए मापदंड माना जा सकता है। मिली जानकारी के

मुताबिक एनएचआरएम से अधिक कीमत पर जहां धड़ल्ले से खरीद हो रही है, वहां के

चिकित्सा पदाधिकारी साफ तौर पर संदेह के घेरे में हैं।

हजारीबाग में स्थानीय स्तर पर खरीद को बढ़ावा देने में भी अफसरों का ही हाथ है। वहां

लगभग दोगुना दाम पर सामानों की खरीद हुई है। इस गड़बड़ी के बारे में सूत्रों का कहना है

कि जिला के दो अधिकारियों के बीच मतभिन्नता होने की वजह से मौके का लाभ उठाकर

एक तीसरा अफसर इस स्थिति का पूरा फायदा उठा रहा है। इसी वजह से वहां सामान की

खरीद में गड़बड़ी हो रही है।

मुख्य तौर पर कोरोना संक्रमण से लड़ रहे स्वास्थ्यकर्मियों को पीपीई किट, ग्लब्स और

मास्क ही उपलब्ध कराये जाने हैं। लाखों की तादाद में इनकी खरीद हो रही है। दोगुना दाम

पर इनकी खरीद में कितना अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है, इसे समझना कठिन

नहीं है। थ्री प्लाई मास्क तक में यही सवाल खड़ा कर अधिक कीमत पर सामानों की खरीद

हो रही है।

कोविड 19 को रोकने में राज्य सरकार ने पूरी ताकत झोंकी है

गिरिडीह और लोहरदगा में भी कुछ इसी किस्म की शिकायतें मिली हैं। यहां अपना फायदा

देखने के लिए गुणवत्ता का सवाल खरीद करने वाले कुछ अधिकारियों ने खड़ा किया है।

अजीब स्थिति यह है कि जिसे राज्य स्तर पर सही माना जा रहा है, उसे ही यहां के

अधिकारी घटिया सिर्फ इसलिए मान रहे हैं क्योंकि उन्हें दूसरे से माल खरीदकर अपने

लिए माल बनाना है। कुछ इलाकों में इस गड़बड़ी में सिविल सर्जन स्तर के अफसर भी

गड़बड़ी में शामिल हैं, ऐसा बताया जा रहा है। उनकी राय से ही जिला स्तर पर ऐसे फैसले

लिये जा रहे हैं।

वैसे इस मामले में सरकारी महकमा भी पूरी तरह सतर्क है। मुख्यालय के उच्चाधिकारियों

के अलावा विजिलेंस तक भी इस किस्म की खरीद पर नजर रखने की सूचना है। जाहिर है

कि खरीद के दाम में इतना अंतर होने की वजह से ही ऊपर के अफसरों का दिमाग ठनका

है। वर्तमान में कोरोना की चुनौतियों से निपटने मे जुटे अफसर स्थिति सामान्य होने के

बाद खरीद की इन गड़बड़ियों की जांच करेंगे, इससे इंकार नहीं किया जा सकता है।

 

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