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कोलकाता से अगरतला की दूरी एक हजार किलोमीटर कम होगी




अगरतला से आखाउड़ा के बीच दौड़ेगी रेलगाड़ी
कोरोना की वजह से योजना में देर हुई
दोनों देशों में अभी काम युद्धस्तर पर
माल परिवहन में भी बहुत फायदा
अमीनूल हक

ढाकाः कोलकाता से अगरतला की दूरी अब एक हजार किलोमीटर कम हो जाएगी। दरअसल बांग्लादेश के रास्ते से एक और रेलपथ के चालू होने की वजह से ऐसा होगा। वर्तमान में कोलकाता से अगरतला की दूरी 1550 किलोमीटर है।




कोलकाता से शियालदह स्टेशन से खुलने वाले कंचनजंघा एक्सप्रेस से अगरतला पहुंचने में अभी 38 घंटे लगते हैं। बांग्लादेश होते हुए जब ट्रेन गुजरेगी तो इन दोनों स्टेशनों के बीच की दूरी घटकर 650 किलोमीटर रह जाएगी। इससे रेल यात्री बहुत कम समय में कोलकाता से अगरतला पहुंच पायेंगी।

बांग्लादेश से एक और रेल पथ भारतवर्ष के लिए अगले वर्ष चालू होने वाला है। त्रिपुरा की राजधानी अगरतला से आखाऊड़ा के बीच यह रेल परिवहन चालू करने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है।

कोरोना की वजह से इस परियोजना का काम काफी विलंब से चल रहा है। इसी रेल खंड में भारतीय सीमा के अंदर काम करने वाले ठेकेदारों ने भी अतिरिक्त समय की मांग की थी।

बांग्लादेश के रेलमंत्री नुरुल इस्लाम ने आज पत्रकारों से चर्चा के दौरान अगले साल इस रेल पथ के चालू होने की बात कही। उनके मुताबिक अगले वर्ष के पहले छह माह के भीतर ही इस रेल पथ को चालू कर लिया जाएगा।




रेल मंत्री नुरुल इस्लाम सुजन ने कहा कि ब्रिटिश राज में बांग्लादेश के फेनी एवं त्रिपुरा के बिलोनिया के बीच रेल पथ चालू था। बाद में यह बंद हो गया था। अब इस अगरतला आखाउड़ा के साथ साथ उस बंद पड़े रेल पथ को भी फिर से चालू करने का काम चल रहा है।

कोलकाता से अगरतला के अलावा भी अन्य रेल पथ होंगे

अगले साल यह रेल पथ भी चालू हो जाएगा। इसके बाद बांग्लादेश के चट्टग्राम बंदरगाह के उत्तर पूर्वी भारत के राज्यों तक माल परिवहन और तेजी से एवं सस्ते दर पर संभव होगी. इस क्रम में पहाड़ी इलाके के रामगढ़ के फेनी नदी पर नया ब्रिज भी बनाया जा रहा है।

इसके बाद त्रिपुरा ही व्यापारिक स्तर पर उत्तर पूर्वी भारत का प्रवेश द्वार बन जाएगा। रेल मंत्री के मुताबिक अगरतला वाले रेलपथ के चालू होने पर कोलकाता से अगरतला की दूरी एक हजार किलोमीटर कम हो जाएगी। वर्तमान में बांग्लादेश और भारत के बीच पांच रेल पथ चालू किये गये हैं।

इनमें से सबसे अंतिम में चिलाहाटी हल्दीबाड़ी रेल परिवहन का काम पूरा हुआ है। इस पटरी से आठ से दस मालगाड़ियां आने जाने लगी हैं। चट्टग्राम बंदरगाह के अलावा मोंग्ला बंदरगाह से भी मालगाड़ियों को सीधे उत्तर पूर्वी भारत के राज्यों में भेजने पर भी काम चल रहा है।



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