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संभावित दुर्घटना को रोकने के लिए कोकर का दुर्गा पूजा पंडाल बंद करने का आदेश

  • कोकर दुर्गा पूजा पंडाल पर रोक लगायी गयी

  • पंडाल की ऊंचाई कम करने का निर्देश

  • पूजा पंडाल पर भीड़ से हादसे का डर

  • कमेटी दोबारा निरीक्षण कर फैसला लेगी

संवाददाता

रांची: संभावित दुर्घटना की आशंका को भांपते हुए जिला प्रशासन ने कोकर दुर्गा पूजा पंडाल पर रोक लगा दी है।

दुर्गा पूजा को लेकर राजधानी के सभी पूजा पंडाल बनकर तैयार हो चुके हैं।

सभी पूजा समिति पंडाल अपने-अपने पंडालों को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं।

राजधानी के कोकर स्थित कोकर पूजा समिति भी अपने पंडाल को अंतिम रूप दे रहा है,

लेकिन कोकर पूजा समिति को जिला प्रशासन ने संभावित दुर्घटना के लिहाज से पंडाल पर रोक लगाने के आदेश जारी किए हैं।

जिसपर पूजा समिति के लोग विरोध दर्ज करा रहे हैं।

इस बीच प्रशासन के इस फैसले से नाराज पूजा के आयोजकों ने भी पंडाल और वहां की विद्युत साज सज्जा को बंद कर दिया है।

पूजा कमेटी की दलील है कि पहले से सब कुछ जानकारी देने के बाद भी अंतिम चरण में ऐसा फैसला

सिर्फ आयोजकों को परेशान करने की नियत से लिया गया है।

इसलिए अब प्रशासन का फैसला आने के बाद ही इस पर कोई निर्णय लिया जाएगा।

प्रशासन ने कोकर पूजा समिति को नोटिस देते हुए कहा कि 40 फीट की ऊंचाई पर बनाया गया है।

पंडाल आने वाले श्रद्धालुओं के लिए खतरा हो सकता है।

वहां 40 फीट ऊंचाई पर पंडाल के दर्शन करने जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में होगी।

उस लिहाज से पंडाल के दर्शन करने आए श्रद्धालुओं के लिए खतरा हो सकता है।

वहीं, पूजा समिति के लोगों का कहना है कि पंडाल के निर्माण से पहले ही जिला प्रशासन को सूचित किया गया था,

लेकिन अंतिम वक्त पर इस तरह से प्रशासन का नोटिस जारी करना गलत है।

संभावित खतरों को देखने के लिए ही हुआ था निरीक्षण

पंडाल का निरीक्षण करने आए अंचलाधिकारी शैलेश कुमार ने बताया कि सुरक्षा के लिहाज से निरीक्षण किया गया है।

देर शाम एसडीएम के निर्देश अनुसार निर्णय लिया जाएगा कि पंडाल को 40 फीट की ऊंचाई पर रखना है

या फिर सुरक्षा के लिहाज से पंडाल दर्शन करने आए लोगों को ऊपर जाने से मना करना है।

वहीं, पंडाल घूमने आए लोगों ने भी कहा कि इतनी ऊंचाई पर बना पंडाल बेहद ही मनोरम दृश्य को दिखाता है।

सुरक्षा के लिहाज से थोड़ी परेशानी जरूर आ रही है।

लेकिन पूजा के दौरान वहां भीड़ अधिक होने की स्थिति में यह पंडाल इतनी अधिक संख्या में आने वाले

श्रद्धालुओं का बोझ झेल पायेगा, इसकी जांच नहीं हुई है।

इसलिए ऊंचाई बने बने पंडाल को लेकर प्रशासन की आशंका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

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