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तिरंगा की खुशी के साथ साथ ऐसी चुनौतियों को भी याद रखें

  • पंद्रह साल से सिर्फ घास बेचकर करती हैं गुजारा

  • विकास की बात करें तो इन्हें तो याद रखना होगा

  • उसे किसी ने कुछ नहीं दिया तो सीएम क्या याद रखे

  • कोई मुखिया राशनकार्ड के नाम पर दो सौ रुपये भी ले गया

दीपक नौरंगी

भागलपुरः तिरंगा फहराने की खुशी पर कोरोना का संकट कोई खास प्रभाव नहीं डाल

पाया। यह अवश्य है कि तमाम सरकारी कार्यक्रमों का रंग फीका नजर आया। लेकिन

देशवासियों ने अपने पारंपरिक तरीके स ही 74वें स्वतंत्रता दिवस समारोह का अपने अपने

अंदाज में पालन किया।

केला देवी इस देश के विकास पर एक ज्वलंत सवाल हैं

तिरंगा फहराने अथवा ऐसे समारोह में शामिल होने की अलग खुशी होती है। खासकर

सरकारी समारोहों का मार्च पास्ट नई किस्म की ऊर्जा भी प्रदान करती है। इस तिरंगा

फहराने की खुशी के बीच ही हमें नजर आयी यह महिला। इस महिला का नाम केली देवी

है। वह भागलपुर के नाथनगर विधानसभा क्षेत्र के शंकरपुर की निवासी है। इसके आठ पुत्र

और छह पुत्रियां हैं। यह पिछले पंद्रह वर्षों से सिर्फ घास बेचकर अपने परिवार का गुजारा

कर रही हैं। इसका उल्लेख इसलिए प्रासंगिक है कि जब हम महानगरों की ऊंची ऊंची

अट्टालिकाओं को देखते हैं, विशाल कल कारखानों को देखते हैं तो हमें बार बार यह याद

रहना चाहिए कि देश की समग्र तरक्की के पैमाने पर केली देवी जैसे अनगिनत लोगों की

वास्तविक स्थिति क्या कुछ बदली है। वह खुद कहती हैं कि उनके आठ पुत्रों में से किसी

की भी कमाई इतनी नहीं है कि वह केली को खाना खिला सके। उन्होंने अपने इसी काम से

अपनी छह बेटियों की शादी किसी तरह कर दी है । उनके पति वर्ष 2015 से विकलांग हो

गये हैं। जीवन की इन तमाम चुनौतियों को केली देवी अकेला झेल रही हैं। ऐसी परिस्थिति

में केली देवी कहती है जब तक शरीर साथ दे रहा है घास बेचकर अपने और अपने पति का

पेट भर लेती हूं। यदि उसमें से भी कुछ बसता है तो अपने बेटे को भी देने का सोचती हूं।

तिरंगा फहराने के मौके पर कही बहुत गंभीर बात

वह कहती है राशन कार्ड के लिए शंकरपुर दियारा के किसी मुखिया को 200 रुपये दिया था

लेकिन आज तक राशन कार्ड भी किसी ने बनाकर नहीं दिया है। केली देवी कहती है मुझे

कोई मदद नहीं करता है, मैं जानती भी नहीं हूं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार है क्या लालू

प्रसाद जी हैं। जब मुझे कोई मदद ही नहीं करता है मुझे कोई कुछ देता ही नहीं है तो मैं क्या

जानूं कि बिहार का मुख्यमंत्री कौन है।


 

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