fbpx Press "Enter" to skip to content

सद्दा हक एथे रख .. … …

सद्दा हक एथे रख का गहन अर्थ यही है कि जिसे तुम अपना हक यानी अधिकार समझते

हो वह दरअसल तुम्हारा तो कतई नहीं है। कोरोना संकट से उपजी परिस्थितियों ने आम

आदमी को इसका एहसास तो वाकई करा दिया है। अब उनलोगों को यह बात समझनी है,

जिन्हें अब तक अक्ल नहीं आयी है और जो अब भी अपनी राज को ही सच समझकर चल

रहे हैं। जब तक इन्हें लात नहीं पड़ती उनकी बुद्धि काम नहीं करती है।

इस बात को समझ लेना होगा कि जो कुछ फरवरी माह से पहले था, वह सब कुछ बदल

चुका है। एक कहावत बचपन से सुनते आया था कि ऊपर वाले की लाठी में आवाज नहीं

होती लेकिन चोट बहुत लगती है। यह बात अब सही में समझ में आयी है। कहीं से कोई

शोर नहीं हुआ। किसी ने किसी पर चीखने चिल्लाने का काम भी नहीं किया। ऊपर वाले के

एक डंडे ने पूरी दुनिया को न सिर्फ शांत रहने पर विवश कर दिया बल्कि जिंदगी की रफ्तार

और दिशा ही बदल दी। अब तो कोई भी इस बात से इंकार नहीं कर सकता कि यह वाकई

बदल चुकी है। इसी वजह से एक सुपरहिट फिल्म के कम चर्चित गीत की याद आ रही है।

लीक से हटकर बनने वाली फिल्मों में से एक थी रॉकस्टार

लीक से हटकर बनी थी यह फिल्म रॉक स्टॉर

इस फिल्म को रणवीर कपूर ने अपने तरीके से जिंदा कर दिया था। जिस गीत की याद आ

रही है, उसे लिखा था इरशाद कामिल ने और संगीत में ढाला था ए आर रहमान ने। इसे

स्वर दिया था मोहित चौहान ने। गीत के बोल कुछ इस तरीके से थे। लेकिन गीत का मर्म

भी आज के दौर के लिए बहुत प्रासंगिक हैं।

तुम लोगो की, इस दुनिया में हर कदम पे इंसा गलत
मै सही समझ के जो भी कहु तुम कहते हो गलत
मै गलत हूं फिर कौन सही फिर कौन सही

मर्जी से जीने की भी मै क्या तुम सबको मै अर्जी दू
मतलब की तुम सबका मुझपे मुझसे भी ज्यादा हक़ है
सद्दा हक़, एथे रख

साद्दा हक़, एथे रख सद्दा हक़, एथे रख, सद्दा हक़, एथे रख सद्दा हक़, एथे रख (4 बार)
हे इन गदारो में या उधारो में
तुम मेरे जीने की आदत का क्यों घोट रहे दम
बेसलीका मै उस गली का मै ना जिसमे हया, ना जिसमे शर्म

मन बोले के रस में जीने का हर्जाना दुनिया दुश्मन
सब बेगाना इन्हें आग लगाना
मन बोले मन बोले मन से जीना या मर जाना है

साडा हक़, एथे रख सद्दा हक़, एथे रख सद्दा हक़, एथे रख सद्दा हक़, एथे रख
सद्दा हक़, एथे रख सद्दा हक़, एथे रख

सद्दा हक़, एथे रख सद्दा हक़, एथे रख

ओ इको फ्रेंडली, नेचर के रक्स मै भी हु नेचर
रिवाजो से समाँझो से क्यों
तू काटे मुझे क्यों बांटे मुझसे इस तरह

क्यों सच का सबक सिखाए जब सच सुन भी ना पाया
सच कोई बोले तो तू नियम कानून बताये
तेरा डर. तेरा प्यार. तेरी वाह. तू ही रख रख साले 
साडा हक़, एथे रख साद्दा हक़, एथे रख साद्दा हक़, एथे रख साद्दा हक़ (रिपीट)

साडा हक़, एथे रख सद्दा हक़, एथे रख (4 बार) 

यानी जहांपनाह, आप अपनी सोच को ताक पर रख दें क्योंकि नीचे की दुनिया ही बदल

चुकी है। सपनों की दुनिया में जीने से बेहतर है कि वास्तविकता की धरातल पर लौट आया

जाए। जहापनाह के मतलब भी समझ लीजिए, मैं उनलोगों से मुखातिब हूं, जो देश के

मिडिल क्लास लोग हैं। आपकी संख्या सबसे अधिक है। आप सरकार को पैसे भी सबसे

अधिक देते हैं। लेकिन इस कोरोना संकट में किसी सरकार ने आपके यानी मिडिल क्लास

के लिए खास तौर पर कुछ भी नहीं कहा। यह साफ हो गया कि चूंकि आपकी सम्मिलित

कोई ताकत नहीं है इसलिए आपकी कोई राजनीतिक अहमियत नहीं है। तो जनाब खुद की

ताकत पहचानिये और थोड़ा शक्ति प्रदर्शन भी कीजिए। एक बात मिलकर ताकत दिखा

दीजिए हुजूर। देखिये सारी राजनीतिक शक्तियां अपने आप ही आपके कदमों पर झूक

जाएंगी। सो जनाब सद्दा हक एथे रख यानी अपना अधिकार अपने साथ रखिये और फिर

राजनीतिक चेहरों को बदलने का मजा लेते रहिये। आप भी मजबूत वोट बैंक बन गये तो

सारे राजनीतिक दलों के नेताओं का आपसे बात करने का अंदाज ही रातोंरात बदल जाएगा

जनाब।


 

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from कोरोनाMore posts in कोरोना »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from पर्यावरणMore posts in पर्यावरण »
More from फ़िल्मMore posts in फ़िल्म »
More from लाइफ स्टाइलMore posts in लाइफ स्टाइल »

Be First to Comment

Leave a Reply