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दूर दूर से जी दूर दूर से पास नहीं आइये, हाथ न लगाइए

दूर दूर से सब कुछ कीजिए। एक दूसरे के करीब आने की जरूरत नहीं है। भाई सब को बहुत

दिन से समझा रहे थे। बात आसानी से समझ में नहीं आयी थी। अचानक मंडराते पकड़े

गये और पुलिस ने चार बेंत जड़ दिये तो बात तुरंत ही भेजे में स्थायी तौर पर घर कर

गयी। इसे कहते हैं कि कई बार कुछ खास किस्म के प्राणियों को दंड दिये बिना सही काम

नहीं होता है। कोरोना मैडम का असर कुछ ऐसा है कि हर कोई दूसरे को यह ज्ञान दे रहा है।

लेकिन ऐसे कई ज्ञानी नजर आये तो मुहल्ला में होते हैं तो चार लोगों के बीच बैठ रहे हैं

और सब्जी लेने जा रहे हैं तो सब्जी की टोकरी के ऊपर टूट रहे हैं मानों आज के बाद कुछ

नहीं मिलने वाला है। अरे भाई जितना दिन बीतता जाएगा, सुनसान सड़कों पर व्यवस्था

भी बेहतर बनती चली जाएगी। अब तो पूरे देश में आपात स्थिति में घर पहुंच सेवा भी

लागू हो चुकी है। फिर किस बात की परेशानी है। लेकिन फिर भी नहीं मानते। कुछ लोगों

को शायद आराम से रहने के बाद भी खुजली होती रहती है। निकल पड़ते हैं मंडराने और

जब पीठ पर बेंत पड़ जाती है तो पूरे सिस्टम को कोसते हुए घर लौट आते हैं। जब तक दर्द

रहता है बाहर निकलने की हिम्मत नहीं है। ऐसा कोई पहली बार नहीं देख रहा हूं। इससे

पहले भी रांची में कई बार कर्फ्यू लगा है। कर्फ्यू में बिना काम मंडराने वाले चेहरे लगभग

एक ही रहे हैं। दरअसल घर में शायद कोई तकलीफ होती है। इसलिए बार बार बहाने बहाने

से निकल आते हैं। अचानक पकड़ में आ गये तो पीठ बैंगनी कराकर ही घर आते हैं। उसके

बाद फिर सारा अनुशासन फौजी जैसा हो जाता है।

पीठ पर पुलिस के बेंत की छाप पड़ी तो सीधे हो गये

इस करोना के बारे में पहले से ही हमारे कल्चर में दूर दूर से की प्रथा लागू है। हम विदेशियों

की तरह हर किसी को गले नहीं लगाते। प्रणाम कर काम चला लेते है। यह बात अब

कोरोना का भय हुआ है तो दूसरों को भी समझ में आ रही है। इसी चक्कर में एक पुरानी

फिल्म का गीत याद आने लगा है। यह मेरे जन्म से पहले की फिल्म है। वर्ष 1952 में बनी

थी फिल्म साकी। इस फिल्म में हीरो थे प्रेमनाथ, जो बाद में हिंदी फिल्मों में खलनायक के

तौर पर प्रसिद्ध हुए। फिल्म में नायिका मधुवाला थीं। इस गीत को लिखा था राजेंद्र कृष्ण

ने और संगीत में ढाला था सी रामचंद्र ने। इस गीत को लता मंगेशकर ने अपना स्वर दिया

था। मैं जिस गीत की चर्चा कर रहा हूं, उस गीत में उस जमाने की नृत्यांगन कुक्कू और

साथियों पर इसे फिल्माया गया था। गीत का वीडियो लिंक यहां हैं

गीत के बोल इस तरह हैं

दूर से दूर से जी 

दूर हो दूर से – 2 बार

पास नहीं आइये, हाथ न लगाइए
कीजिये नज़ारा दूर दूर से- 3 बार
पास नहीं आइये हाथ न लगाइए,
कीजिये नज़ारा दूर दूर से – 3 बार
पहला उसूल है प्यार के दरबार का
अर्जी में हाल लिखो दिल ए बेक़रार का
पहला उसूल है प्यार के दरबार का
अर्जी में हाल लिखो दिल ए बेक़रार का
आगे मत जाइये होश में आ जाइये,
कीजिये नज़ारा दूर दूर से -3 बार
प्यार के मुआमले में जल्दी न कीजिये
हाँ जल्दी न कीजिये अच्छी तरह सोचिये
फिर दिल दीजिये हाँ जल्दी न कीजिये
हुस्न दगाबाज़ है पहले आज़माइये
कीजिये नज़ारा दूर दूर से – 3 बार
दिल को लगाना है तो ज़रा देख भाल के
दानव बड़े टेढ़े हैं हसीनो की चाल के
दिल को लगाना है तो ज़रा देख भाल के
दानव बड़े टेढ़े हैं हसीनो की चाल के
नज़रों की प्यास को दूर से बुझाइये
कीजिये नज़ारा दूर दूर से

कीजिये इशारा .. .. – 2 बार
पास नहीं आइये हाथ न लगाइए
कीजिये नज़ारा .. .. 2 बार

अब इतने दिनों से यह बात कही जा रही थी तब भी पल्ले नहीं पड़ रही थी। अब जान पर

बन आयी है तो एकदम सीधी चाल चलने में क्या परहेज है भाई। अभी सारी राजनीति बंद

है। गरीब गुरबों की सेवा के लिए पूरा समय है। कुछ नहीं तो अपनी सेहत सुधारने पर ही

ध्यान दीजिए। ऊपर वाले ने सजा दी है कि अकेले रहो यानी एकांतवास। ऊपर वाले ने ऐसा

थोड़े ना कहा है कि बस घर पर पड़े रहो और अन्य लोगों की जीना हराम कर दो। समय है

तो घर के काम में ही हाथ बंटाओ। पूण्य कमाने का मौका है भाई साहब।


 

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