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कौशल चौधरी जैसे लोगों की पहचान भी संकट की घड़ी में होती है

भागलपुरः कौशल चौधरी कोई ऐसे प्रमुख व्यक्ति नहीं है, जिनके नाम की चर्चा से ही लोग

उन्हें पहचान लें। लेकिन राष्ट्रीय संकट की घड़ी में कौशल चौधरी जैसे असली इंसान की

पहचान भी हो जाती है। जिस कोरोना संकट के दौरान सरकार पूरी व्यवस्था बनाये रखने

के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। वहां निजी प्रयासों का भी एक बहुत बड़ा योगदान

साफ साफ पूरे देश में नजर आ रहा है।

वीडियो में देखिये क्या कुछ कर रहा है यह अकेला शख्स

कौशल चौधरी जो नया बाजार के रहने वाले हैं वह अपने निजी पैसे से एक एनजीओ चला

रहे हैं। इस एनजीओ को कोई सरकारी फंड नहीं मिलता है। इसी से इलाके में सैनिटाइजर

का छिड़काव अपने संशाधनों की बदौलत आसपास के घरों में और मोहल्लों में गली में

करवा रहे हैं और उस जगह करवा रहे हैं जहां भागलपुर की मारवाड़ियों की एक मजबूत

संस्था हिंदुस्तान क्लब है लेकिन कोई भी धन्ना सेठ सैनिटाइजर का छिड़काव उनके

द्वारा वहां नहीं किया गया है। इलाके की साफ सफाई कराने की उनकी कोई निजी

जिम्मेदारी भी नहीं थी। लेकिन वक्त की जरूरत को समझते हुए जो खुद से आगे आये,

वही असली पहचान बनती है।

कौशल चौधरी जैसे चेहरे वक्त के बदलाव की पहचान हैंकौशल चौधरी जैसे लोगों की पहचान भी संकट की घड़ी में होती है

कोरोना जैसी महामारी की आहट ने दरअसल उन गुमनाम चेहरों को अचानक समाज की

अगली कतार में लाकर खड़ा कर दिया है, जहां पहले दूसरे चेहरे चमका करते थे। मजे की

बात है कि जब जान जोखिम में डालकर समाज के लिए कुछ करने की बारी आयी है तो

दिन रात चमकने और मीडिया की सुर्खियों में बने रहने वाले अधिकांश चेहरे अचानक से

गायब हो गये हैं। समाज और देश को जब सबसे अधिक जरूरत है, उस घड़ी कौशल चौधरी

जैसे लोग ही अपनी असली राष्ट्रीय और सामाजिक जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वरना इस

दौरान में भागलपुर में फोटो खिंचाना छोड़ समाज की असली सेवा करने वाले चंद चेहरे ही

अब तक हमारे कैमरों में कैद हो पाये हैं। दूसरी तरफ पुलिस का वह मानवता वादी चेहरा

सामने आया है, जो आम दिनों में कभी भी उनकी वर्दी के अंदर से बाहर नहीं आ पाता था।

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