कांग्रेस के ड्रामा से कर्नाटक सरकार संकट में दो विधायक पार्टी छोड़ने को तैयार

कांग्रेस के दोनों विधायक पार्टी छोड़ने को तैयार
  • सत्तारूढ़ जेडीएस ने गुहार लगायी

  • भाजपा खेमे में उत्साह का माहौल

  • पार्टी की गुटबाजी है कलह की वजह

पी महाजनशैट्टयार

बेंगलुरुः कांग्रेस की गुटबाजी की वजह से कर्नाटक की राज्य सरकार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

इस स्थिति को भांपते हुए कांग्रेस के साथ सरकार चला रही जेडीएस ने कांग्रेस नेतृत्व से मामले को संभालने की बात कही है।

दूसरी तरफ कर्नाटक की इस स्थिति के उत्पन्न होते ही भाजपा खेमा में उत्साह का माहौल व्याप्त हो गया है।

मिली जानकारी के मुताबिक दो भाई ( दोनों विधायक) ने पार्टी छोड़ने का एलान कर दिया है।

इनमें से रमेश जारखीहोली राज्य मंत्रिमंडल में मंत्री हैं।

दोनों का दावा ही कांग्रेस नेतृत्व को परेशान करने वाला है।

दोनों का दावा है कि पार्टी के 18 विधायकों का उन्हें समर्थन प्राप्त है।

अगर यह दावा सही है तो निश्चित तौर पर इस गुट के अलग हटते ही कर्नाटक सरकार का पतन हो जाएगा।

कर्नाटक की राजनीति की जानकारी रखने वालों के मुताबिक जारखीहोली भाइयों की असली नाराजगी उनके इलाके में पार्टी के नेता लक्ष्मी हेब्बालकर की बढ़ती सक्रियता है।

लक्ष्मी को पार्टी के अन्य नेता डीके शिवकुमार का समर्थन प्राप्त है।

इस गुट का आरोप है कि दरअसल शिवकुमार खुद का जनाधार बढ़ाने के लिए अन्य नेताओं को दरकिनार कर रहे हैं।

उनकी मंशा किसी दिन राज्य में मुख्यमंत्री बनने की है।

इस वजह से पूरे संगठन को उन्होंने तार तार कर दिया है।

कांग्रेस की गुटबाजी अब सबके सामने उजागर

कर्नाटक जेडीएस लगातार इस मुद्दे पर कांग्रेस नेतृत्व से ध्यान देने की अपील कर रहा है।

वहां की स्थिति बिगड़ते ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह कर्नाटक की स्थिति का आकलन कर आये हैं।

औपचारिक तौर पर उन्होंने पार्टी के नेताओं से कांग्रेस के आंतरिक गतिविधियों से दूर रहने को कहा है।

लेकिन समझा जा रहा है कि इस विरोध को हवा देने में भाजपा की भी प्रमुख भूमिका है।

जो इस चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी होने के बाद भी सरकार बनाने से वंचित रह गयी है।

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और कर्नाटक कांग्रेस के नेता सिद्धारमैया इनदिनों विदेश दौरे पर हैं।

उनके लौटने के बाद ही इन विद्रोही विधायकों से बात-चीत की स्थिति बन सकती है।

पार्टी के किसी अन्य नेता की बात सुनने के लिए दोनों भाई तैयार ही नहीं है।

कांग्रेस नेतृ्व के मुताबिक सिर्फ दबाव की राजनीति है

दिल्ली में पार्टी सूत्र मान रहे हैं कि राज्य के मंत्री रमेश अंततः पार्टी नहीं छोड़ेंगे।

वह सिर्फ हेब्बलकर को पीछे छोड़ना चाहते हैं।

बेलागावी इलाके में अपनी पकड़ को मजबूत करने की वजह से यह लड़ाई इस स्तर पर पहुंच रही है।

इस इलाके में अनेक सहकारिता बैंक है।

इसलिए किसानों की कर्जमाफी के मामले में यह इलाका किसानों के बीच किसी भी नेता को मजबूत नेता बना सकता है।

इस इलाके की दूसरी प्रमुख बात इलाके में 18 विधानसभा सीटों का होना भी है।

यूं तो भाजपा खुद को इस पूरे प्रकरण से अलग बता रही है।

लेकिन समझा जाता है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अपनी पार्टी के सभी विधायकों को एकजुट रखने की हिदायत दी है।

भाजपा को यह डर भी सता रहा है कि इस संकट की स्थिति में कांग्रेस और जेडीएस मिलकर भाजपा के विधायकों को भी तोड़ सकते हैं।

भाजपा के लिए पूरे दक्षिण भारत में एकमात्र कर्नाटक ही ऐसा राज्य है, जहां उसे 2019 के लोकसभा चुनाव में अच्छे परिणाम की उम्मीद है।

इस वजह से कर्नाटक का राजनीतिक ड्रामा दिनों दिन रोचक होता जा रहा है।

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