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अपने पिता को साइकिल पर लेकर 1200 किलोमीटर का सफर तय करने वाली ज्योति की मदद करेगा एआईबीईए

हैदराबादः अपने पिता को साइकिल पर बैठाकर अपने गांव तक लाने वाली ज्योति कुमारी

अब चर्चा के केंद्र में है। कोरोना काल में उसके साहज और जज्बो को सराहा गया है। अब

अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) ने बीमार पिता को साइकिल पर बैठाकर

1200 किलोमीटर का सफर तय करने वाली 15 वर्षीय ज्योति कुमारी और उसके चार भाई-

बहनों की शिक्षा का पूरा खर्च उठाने की पेशकश की है। एआईबीईए के महासचिव सी.

वेंकटाचलम ने रविवार को ट्विटर पर यह घोषणा की।श्री वेंकटाचलम ने कहा, ‘‘ ज्योति

का परिवार बहुत गरीब है और उसके दो छोटे भाई और दो बहनें हैं। हम उनकी आर्थिक

स्थिति का अंदाजा लगा सकते हैं। एआईबीईए के अधिकारियों से चर्चा करने के बाद यह

फैसला किया गया कि ज्योति और उसके चारों भाई-बहनों की पढ़ाई का पूरा खर्च

एआईबीईए उठायेगा अथवा परिवार की इच्छानुसार कोई अन्य वित्तीय सहायता

करेगा।’’ एआईबीईए ने इस संबंध में बिहार प्रांतीय बैंक कर्मचारी संघ के महासचिव

अनिरुद्ध कुमार को पत्र लिखकर ज्योति के परिवार से संपर्क करने के लिए कहा है। वैश्विक

महामारी कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए

लागू देशव्यापी लॉकडाउन के कारण प्रवासी मजदूरों को काफी समस्याओं का सामना

करना पड़ रहा है और ज्योति कुमारी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। ज्योति ने मुश्किलों से

भरे समय में साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति की अनूठी मिसाल पेश की है।

अपने पिता के प्रति जज्बा देखकर इवांका ट्रंप भी हैरान

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बिहार के रहने वाले मोहन पासवान गुरुग्राम में रहकर चालक

का काम किया करते थे। हाल ही में एक दुर्घटना में उनको चोट लग गयी और वह काम

नहीं कर पा रहे थे। उनकी मदद करने के लिए उनकी बेटी ज्योति भी बिहार से गुरुग्राम आ

गयी। इसी बीच, कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन लग

गया और पिता-पुत्री गुरुग्राम में ही फंस गए। मोहन के मकान मालिक ने उन पर मकान

खाली करने का दबाव डाला। बीमार मोहन को भोजन जुटाने के लिए अपनी दवाइयां

छोड़नी पड़ीं। मोहन की पत्नी बिहार में ही आंगनवाड़ी में काम करती हैं। पति और बेटी की

मदद के लिए उन्होंने अपने गहने गिरवी रखकर कुछ पैसे भेजे जिसकी मदद से ज्योति ने

एक साइकिल खरीदी और अपने बीमार एवं चोटिल पिता को साइकिल पर ही बैठाकर गांव

जाने का फैसला किया। ज्योति ने बीमार पिता को साइकिल पर बैठाकर गुरुग्राम से चलना

शुरू किया और करीब आठ से 10 दिन में 1200 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद

बिहार के दरभंगा जिले के अपने गांव सिरहूल्ली पहुंचीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प

की बेटी इवांका ट्रम्प ने ट्वीट कर ज्योति के साहस और जज्बे की सराहना की है। इवांका

ने ट्विटर पर लिखा, ‘‘15 वर्षीय ज्योति कुमारी बीमार पिता को साइकिल पर बैठाकर

सात दिनों में 1200 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद अपने गांव पहुंची। धीरज और

प्रेम की इस अनूठी मिसाल से भारतीय लोगों और साइकिलिंग फेडरेशन की कल्पना का

पता चलता है।’’


 

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