fbpx Press "Enter" to skip to content

झाविमो की दावेदारी से दोनों खेमों में बढ़ रही परेशानी

  • रैली के दौरान ही ध्यान खींचा था
  • पहले मुख्यमंत्री के तौर पर लोकप्रिय
  • ग्रासरुट पर जनाधार बनाने में अब्बल
  • 81 सीटों में से कई पर मरांडी का पलड़ा भारी

संवाददाता

रांचीः झाविमो की दावेदारी को अभी से पहले किसी ने भी इतनी गंभीरता

से नहीं लिया था। इस पार्टी को भी अभी से करीब तीन माह पूर्व कोई भी

गंभीरता से लेने के लिए तैयार नहीं था। यह बात खुद झारखंड विकास

मोर्चा के अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने साफ कही है। उन्होंने कहा है कि

लोकसभा चुनाव के पहले से ही वह महागठबंधन पर काम हो, ऐसा

चाहते थे। लेकिन किसी भी राजनीतिक दल ने गंभीरता से उनके प्रस्ताव

पर विचार नहीं किया। इसका नतीजा है कि अब इस बार के विधानसभा

चुनाव में वह किसी भी खेमा से अलग रहकर अकेले ही चुनाव लड़ने

के लिए मैदान में उतर चुके हैं।

शुरु में इस बात को सभी ने हल्के में लिया था

प्रारंभ में इसे महज एक जिद समझा गया था। दूसरी तरफ भाजपा का

एक खेमा लगातार उन्हें राजनीतिक तौर पर खत्म हो चुके एक चरित्र के

तौर पर करार देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन अब जैसे जैसे चुनाव

करीब आ रहा है, यह साबित हो रहा है कि वह वाकई दोनों खेमों से

अलग अपना तीसरा कोण मजबूती से तैयार करने में सफल हो चुके हैं।

राजनीतिक पंडित उनकी तैयारी से तभी चौंक गये थे जब उन्होंने

प्रभात तारा मैदान में अपनी पार्टी की रैली आयोजित की थी। संसाधन

और सत्ता से दूर होने के बाद भी पूरे राज्य से अनेक लोग उनकी रैली में

आये थे। उसी भीड़ से यह अंदाजा बनने लगा था कि बाबूलाल अपनी

सांगठनिक शक्ति की बदौलत फिर से खड़ा होने में कामयाब हो गये हैं।

दूसरी तरफ यह भी स्पष्ट होता जा रहा है कि उन्हें छोड़कर भाजपा में शामिल

होने वाले विधायकों के विकल्प के तौर पर भी श्री मरांडी ने लंबी तैयारी की है।

झाविमो की टिकट पर जीतने के बाद जो लोग भाजपा में चले गये थे, उनमें से

कितनों को दोबारा भाजपा से टिकट मिलेगा, यह देखने वाली बात होगी।

लेकिन यह तय है कि इन सभी सीटों पर झाविमो ने अपना अलग जनाधार न

सिर्फ कायम रखा है बल्कि ग्रास रूट पर काम करते हुए उसे और मजबूत भी

बनाया है।

झाविमो की तैयारी तो तीसरे विकल्प के तौर पर

अब भाजपा विरोधी खेमा में झामुमो, कांग्रेस और राजद के साथ साथ वामदल

भी जुड़े हुए नजर आ रहे हैं। दूसरी तरफ भाजपा के साथ आजसू एक साथ

चुनाव लड़ेगी अथवा नहीं यह तय नहीं हो पाया है। लेकिन इनके बीच झाविमो

एक मजबूत विकल्प के तौर पर मैदान में साफ नजर आने लगा है।

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

3 Comments

Leave a Reply

error: Content is protected !!