fbpx Press "Enter" to skip to content

बाहर से कोई अंदर न आ सके अंदर से कोई बाहर न जा सके




बाहर से कोई अंदर आया भी तो उसे जांच से गुजरना पड़ेगा। जो लोग किसी तरह इससे

बच निकले थे तो पुलिस उन्हें उनके घर से पकड़ कर ले गयी और उन्हें आइसोलेशन में

डाल रखा है। कणिका कपूर को कोरोना क्या हुआ, सारे वीआइपी हैरान परेशान हो गये।

अरे भाई जब पहले से ही कहा जा रहा है कि भीड़ भाड़ से दूर रहो। ऐसा इसलिए कहां जा

रहा है क्योंकि भीड़ में किसे इसका संक्रमण है, इसका क्या पता। नहीं माने, चले गये

सोशल स्टैट्स बढ़ाने। तो अब झेलों। खुद किया है तो खुद ही झेलो किसी और को दोष भी

नहीं दे सकते। भला हो कमसे से तुम्हारे अलग थलग रहने से अनेक लोग इतने दिनों तक

तो चिंतामुक्त रह पायेंगे। वरना तुम्हारी तो आदत ही है कि दूसरों को टेंशन देना।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनता कर्फ्यू की यह अपील वाकई अच्छी और सामयिक है।

आम तौर पर भारतवर्ष के कई इलाके ऐसे हैं, जहां बिना डंडा के अनुशासन का पालन

करना कठिन हो जाता है। ऐसे में यह हम सभी के लिए अग्निपरीक्षा की घड़ी है कि हम

खुद में कितने अनुशासित है। यह दरअसल कोरोना से बचाव की तैयारियों की जांच के

साथ साथ अपने आत्मानुशान की भी परीक्षा है।

यह अपने जमाने की सुपरहिट फिल्म बॉबी का संभवतः सबसे चर्चित गीत रहा है। गाहे

बगाहे अब भी इस गीत को सुनने का मौका मिल ही जाता है। लेकिन बॉबी के जमाने से

लेकर अब तक कोई यह ख्याल पहले कभी नहीं आया कि किसी ऐसे बेमौके के मौके पर भी

इस गीत की याद आ जाएगी। जी हां जनता कर्फ्यू एक सामाजिक प्रयोग है।

यह एक सामाजिक प्रयोग है महामारी के खिलाफ

यदि यह सफल रहा तो हम मान सकते हैं कि आने वाले दो सप्ताह में कोरोना की

चुनौतियों से मुकाबला करने के लिए हम वाकई तैयार हैं। यह सही अर्थों में राष्ट्रप्रेम की

परीक्षा भी है। वरन वेलेंटाइन डे पर डंडा लेकर नैतिकता पढ़ाने वाले भी राष्ट्रप्रेम का ही

दावा किया करते हैं। फिल्म बॉबी के इस गीत को लिखा था आनंद बक्षी ने और संगीत में

ढाला था लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने। इस सुंदर और रोमांटिक गीत को स्वर दिया था लता

मंगेशकर और शैलेंद्र सिंह की जोड़ी ने। गीत के बोल कुछ इस तरह हैं।

बाहर से कोई अन्दर न आ सके

अन्दर से कोई बाहर न जा सके, सोचो कभी ऐसा हो तो क्या हो
सोचो कभी ऐसा हो तो क्या हो
हम तुम, इक कमरे में बन्द हों, और चाभी खो जाये
तेरे नैनों के भूल भुलैय्या में, बॅबी खो जाये

हम तुम …
आगे हो घनघोर अन्धेरा, बाबा मुझे डर लगता है
पीछे कोई डाकू लुटेरा, उँ, क्यों डरा रहे हो
आगे हो घनघोर अन्धेरा, पीछे कोई डाकू लुटेरा
उपर भी जाना हो मुशकिल, नीचे भी आना हो मुशकिल
सोचो कभी ऐसा हो तो क्या हो, सोचो कभी ऐसा हो तो क्या हो
हम तुम कहीं को जा रहे हों, और रस्ता भूल जाये
तेरे बैंय्या के झूले में सैंय्या, बॉबी झूल जाये

हम तुम …
बस्ती से दूर, परबत के पीछे, मस्ती में चूर घने पेड़ों के नीचे
अन्देखी अन्जानी सी जगह हो, बस एक हम हो और दूजी हवा हो
सोचो कभी ऐसा हो तो क्या हो, सोचो कभी ऐसा हो तो क्या हो
हम तुम एक जंगल से गुज़रे, और शेर आ जाये
शेर से कहूँ तुमको छोड़ के, मुझे खा जाये

हम तुम …
ऐसे क्यों खोये हुए हो, जागे हो कि सोये हुए हो
क्या होगा कल किसको खबर है, थोड़ा सा मेरे दिल में ये डर है
सोचो कभी ऐसा हो तो क्या हो, सोचो कभी ऐसा हो तो क्या हो
हम तुम, यूँ ही हँस खेल रहे हों, और आँख भर आये
तेरे सर की क़सम तेरे ग़म से, बॉबी मर जाये हम तुम …

बाहर से कोई अंदर नहीं आ सके को भोपाल में देखा

इसका इंतजाम का हश्र क्या हुआ यह हम सभी ने भोपाल में देखा। भाई लोग नाराज होकर

भागे तो सरकार उलटने के बाद ही लौटे। अपने दिग्गी राजा भी इन्हें मना नहीं पाये।

कमलनाथ के अनाथ होने के बाद फिर से मध्यप्रदेश में कमल खिलाने की तैयारी है। अब

देखना यह है कि झारखंड भी किनकी नजरों में अभी खटक रहा ह । यूं तो झारखंड के

पॉलिटिकल मौसम में फिलहाल आंधी तूफान के कोई पूर्व संकेत नहीं है। लेकिन यह रांची

है भाई साहब। यहां तो बिना बुलाये भी बरसात कभी भी हो जाता करती है। इसलिए छाता

झाड़कर तैयार रहिये। हो सकता है कि दिन में चिलचिलाती धूप के बाद शाम को अचानक

ही ओलों की बारिश होने लगे तो बचाव का इंतजाम होना ही चाहिए।

[subscribe2]



Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from अजब गजबMore posts in अजब गजब »
More from इतिहासMore posts in इतिहास »
More from जेनेटिक्सMore posts in जेनेटिक्स »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from देशMore posts in देश »
More from राज काजMore posts in राज काज »
More from स्वास्थ्यMore posts in स्वास्थ्य »

One Comment

... ... ...
%d bloggers like this: