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जूपिटर के उत्तरी ध्रुव की गतिविधियां हुई नासा के कैमरे में कैद

  • ऐसे सुंदर गुलाब दरअसल गुरु ग्रह के तूफान हैं

  • आकार में सारे तूफान पृथ्वी से भी बड़े हैं

  • ढाई हजार किलोमीटर के दायरे में फैला

  • जूनो मिशन के आंकड़ों का विश्लेणन जारी

रांचीः जूपिटर ग्रह के उत्तरी ध्रुव पर भी नासा ने नजर डालने की कोशिश की है। इस

कोशिश में अत्याधुनिक कैमरे में जो तस्वीरें कैंद हुई हैं, वे गुलाब के फूल की तरह सुंदर

नजर आ रही है। लेकिन रंग बिरंगे गुलाब से दिखती यह तस्वीरें दरअसल वहां से भयंकर

तूफान के दृश्य है। यहां से उत्पन्न होने वाले तूफान ही इस ग्रह के दक्षिण हिस्से में बने

लाल विशाल गड्डे तक जाने के बाद मध्यम होता है। इस लाल निशान वाले इलाके के बारे

में पहले ही जानकारी दी गयी थी।

नासा की बेवसाइट पर इन तस्वीरों का विश्लेषण भी दर्शाया गया है। फोटो में जो चीज

काफी सुंदर और मनमोहक नजर आ रही है, उसे वैज्ञानिक परख चुके हैं। यह पृथ्वी के

लिहाज से विनाशकारी गति वाले तूफान है। यानी अगर इस गति के तूफान पृथ्वी पर

किसी स्थान पर आये तो वह पूरा इलाका ही नष्ट हो जाएगा। दरअसल गैसों का समूह इस

गुरु ग्रह को लगातार घेरे हुए हैं। उसके वायुमंडल के ऊपर गैसों के बादल छाये रहते हैं। नये

सिरे से इस ग्रह के उत्तरी ध्रुव की तस्वीरों को देखने के बाद वैज्ञानिकों का आकलन है कि

यहां गुलाब के फूल सा नजर आने वाले हर तूफान ढाई हजार से 29 सौ किलोमीटर के क्षेत्र

में फैले हुए हैं। वैसे पहली बार इस ग्रह के उत्तरी ध्रुव के बारे में ऐसी जानकारियां मिल

पायी है। तस्वीरों को देखकर वैज्ञानिक भी मोहित हो गये थे लेकिन जैसे जैसे इनका

वैज्ञानिक विश्लेषण होता गया इन सारी सुंदर से दिखने वाले गुलाब के फूलों की

असलियत सामने आती चली गयी।

जूपिटर ग्रह को अब बेहतर समझना आसान हुआ

इसी आधार पर वृहस्पति ग्रह को और बेहतर तरीके से समझने में मदद मिली है। पहले

इसके वायुमंडल के ऊपरी सतह पर गैस के बादल होने की जानकारी थी। अब यह पता

चला है कि ग्रह के निचली सतह के वायुमंडल में भीषण तेज गति के तूफान लगातार चलते

रहते हैं। यह सारे तूफान उत्तरी ग्रह से उठते हैं और दक्षिण ध्रव के पास जाकर कमजोर

पड़ते हैं। इसके कारणों का अब तक पता नहीं चल पाया है।

लेकिन वहां से मिले आंकड़ों का विश्लेषण चल रहा है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इन

आंकड़ों का विश्लेषण कर लेने के बाद इस बारे में कोई जानकारी मिल पायेगी। नासा के

जून मिशन के तहत अंतरिक्ष यान में लगे उपकरणों ने वहां की गतिविधियों के आंकड़े

एकत्रित करने के साथ साथ तस्वीरें भेजी है। वैसे इन तस्वीरों का विश्लेषण करने के बाद

वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि इन तूफानों के चपेट में पूरी पृथ्वी ही समा सकती है

क्योंकि वे आकार में इतने विशाल हैं और पृथ्वी से अधिक आकार के दायरे में फैले हुए हैं।

वैसे इससे पहले जूपिटर ग्रह के दक्षिणी हिस्से के लाल इलाके की तस्वीर भी हमारे सामने

आयी थी। वह लाल गड्डा भी आकार में पृथ्वी से बहुत बड़ा है। जिसके ऊपर आने वाले

तूफान कई हिस्सों में बंट जाते हैं।

जूनो मिशन के उपकरणों में कैद हुई है तस्वीरें

गुरु ग्रह के उत्तरी इलाके की तस्वीरों को जूनो मिशन में लगे इंफ्रारेड ऑरोरल मैपर में दर्ज

किया गया है। बाद में उन्हें जब कृत्रिम तरीके से रंग भरकर तैयार किया गया तो वे रंग

बिरंगे गुलाब के फूलों की तरह नजर आने लगे हैं। वैसे इन तस्वीरों की मदद से ग्रह के

ऊपर के वायुमंडल को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी। इसी तरह नासा का

हब्बल टेलीस्कोप भी वहां की गतिविधियों को निरंतर दर्ज कर रहा है। इन सभी से प्राप्त

होने वाले आंकड़ों के आधार पर ही जूपिटर पर उठने वाले विशाल तूफानों के कारणों को

समझने की कोशिश अभी जारी है।

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