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गुरु ग्रह का लाल घेरा लगातार बढ़ता जा रहा है, देखें वीडियो

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तूफान का दायरा बढ़ता घटता रहता है
अभी करीब चालीस हजार किलोमीटर फैला
पृथ्वी से अधिक तेज गति का तूफान चल रहा
हब्बल टेलीस्कोप से नजर आ रहा है अजीब नजारा
राष्ट्रीय खबर

रांचीः गुरु ग्रह अब अजीब ढंग से अपना चेहरा बदल रहा है। अंतरिक्ष में स्थापित हब्बल टेलीस्कोप की यांत्रिक आंखों से इस बदलाव को कैद किया है।




इस गुरु ग्रह में जो साफ नजर आने वाला लाल घेरा है, वह लगातार बढ़ता ही जा रहा है। दरअसल यह लाल रंग वहां चल रही आंधी की वजह से हैं।

नासा के इस वीडियो में देखिये वहां का नजारा

वैज्ञानिक मानते हैं कि यह तूफान वहां कमसे कम एक दशक से अधिक समय से चल रहा है और अभी यह और तेज हो गया है।

पिछले कुछ दशकों में गुरु ग्रह में इस किस्म के अधिक बदलाव देखे जा रहे हैं। दरअसल अंतरिक्ष में देखने की तकनीक के विकसित होने की वजह से ऐसा हो रहा है।

ताजी सूचना के मुताबिक वहां जो आंधी चल रही है, उसकी गति शायद बहुत तेज हो गयी है इसी वजह से यह लाल घेरा अब अधिक बड़ा नजर आने लगा है।

वैसे खगोल वैज्ञानिकों के पास इस बात का उत्तर फिलहाल नहीं है कि गुरु ग्रह पर यह बदलाव क्यों हो रहा है। लेकिन यह लाल घेरा वाला तूफानी इलाका उसके वायुमंडल के ऊपर काफी गहरा है। इसके अंदर से नासा ने झांकने की कोशिश की है।

गुरु ग्रह के इस इलाके पर वैज्ञानिकों की नजर पहली बार 17वीं सदी में पड़ी थी। उसके बाद से वैज्ञानिक लगातार इसकी गतिविधियों को समझने की कोशिश कर रहे हैं।

वैज्ञानिक मानते हैं कि हो सकता है कि यह लाल घेरा उसके पहले से ही मौजूद हो लेकिन विज्ञान की नजर इसपर बाद में पड़ी है। जिसके बाद से वह लगातार वैज्ञानिकों की नजरों में है।

इस लाल घेरा को तूफान समझने में भी खगोल वैज्ञानिकों को काफी वक्त लगा है क्योंकि उससे पूर्व का विज्ञान इतना विकसित नहीं था कि इस लाल घेरे को और गहराई से देखकर उसका विश्लेषण कर सके।

गुरु ग्रह पर ऐसा नजारा चार सौ वर्षों से है

जब पहली बार इसका अंदाजा लगाया गया था तो यह करीब 23 हजार किलोमीटर चौड़ा था। यानी इस लाल घेरा के अंदर पूरी पृथ्वी ही समा सकती है।

लेकिन वर्ष 2014 में इसका दायरा घटकर 16 हजार पांच सौ किलोमीटर चौड़ा ही रह गया था। अब इसका दायरा फिर बढ़कर करीब चालीस हजार किलोमीटर तक पहुंच गया है।




गुरु ग्रह के घटनाक्रमों पर नजर रखने वाले खास जूनो अंतरिक्ष यान से भी इसके बारे में नई जानकारियां मिली हैं। यह अंतरिक्ष यान खास तौर पर इसी ग्रह की गतिविधियों को दर्ज करता है और वह वहां से होने वाले अत्यंत छोटे आकार के माइक्रोवेब रेडियेशन की तस्वीरें ले रहा है।

इसी यान की बदौलत वहां के बादलों के बबंडरों के अंदर भी झांकना संभव हो पाया है। दूसरी तरफ हब्बल टेलीस्कोप ने भी इसके बारे में रोचक जानकारी और तस्वीरें उपलब्ध करायी हैं।

जिसके आधार पर वैज्ञानिक इस गुरु ग्रह के बारे में अधिक जान पाये हैं। यह अत्यंत तेज गति का तूफान होने की वजह से ही उसके आकार में तब्दीली आती रहती है।

कभी यह घटकर 12410 किलोमीटर हो जाता है तो फिर से बढ़कर चालीस हजार किलोमीटर तक फैल जाता है। इस चौड़ाई को नापना आधुनिक खगोल विज्ञान के लिए अब कोई कठिन चुनौती नहीं रही है।

कई अवसरों पर इस केंद्र के आस पास छोटे आकारा के बवंडर भी पैदा हो जाते हैं, ऐसा देखा गया है। वैज्ञानिक वहां हवा की गति के बदलने के कारण को समझना चाहते हैं।

अभी जो हालात है उससे अनुमान लगाया जाता है कि उस लाल घेरा के बाहरी इलाके में तूफान की गति चार से आठ प्रतिशत तक अधिक हो गयी है। इसी वजह से तूफान का दायरा बढ़ गया है।

नासा के उपकरणों से अंदर झांकने की कोशिश हुई है

गुरु ग्रह पर चल रहे तूफान के बारे में यह समझ लेना होगा कि वहां तूफान की गति तीन सौ किलोमीटर प्रति घंटे से भी अधिक है।

इसी रफ्तार की एक तूफान ने वर्ष 1969 में तबाही मचा दी थी। उस चक्रवाती तूफान कैमिली को अब भी सबसे भीषण तूफान माना जाता है।

लेकिन इस तूफान की असली वजह और उसकी रफ्तार में तब्दीली का कारण अब तक वैज्ञानिक समझ नहीं पाये हैं।

इस बारे में कोई राय है लेकिन अब तक कोई विज्ञान सम्मत निष्कर्ष इसके लिए नहीं निकाला जा सका है। इतने बड़े आकार के ग्रह के हर घटनाक्रम को समझने की गाड़ी आगे बढ़ रही है।

वैज्ञानिक मानते हैं कि लगातार अनुसंधान के कारण अगले दशकों में इसके बारे में पूरी जानकारी शायद मिल जाएगी। वैसे यह स्पष्ट हो गया है कि गुरु ग्रह पर कोई भी घटना लघु यानी छोटी नहीं होती है।



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