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जमाल खगोशी को मारने का आदेश सऊदी के युवराज ने ही दिया था







  • तुर्की में सऊदी दूतावास के अंदर की गयी थी पत्रकार की हत्या

  • इस्रायल की कंपनी के पिगासूस से हुई थी उसकी जासूसी

  • अमेरिकी रिपोर्ट में युवराज के शामिल होने की पुष्टि हुई

विशेष प्रतिनिधि

नईदिल्लीः जमाल खगोशी की हत्या सऊदी अरब के युवराज के इशारे पर ही हुई थी।

अमेरिकी खुफिया विभाग की रिपोर्ट में इतने दिनों बाद इस बात की पुष्टि कर दी गयी है।

इस रिपोर्ट ने पाया है कि सऊदी अरब के युवराज सलमान बिन मोहम्मद ने ही निर्वासन में

रह रहे सऊदी पत्रकार जमाल खगोशी की हत्या की मंज़ूरी दी थी।

बाइडन प्रशासन ने शुक्रवार को ख़ुफ़िया रिपोर्ट जारी की जिसमें कहा गया है कि सऊदी

युवराज ने उस योजना को अपनी सहमति दी थी जिसके तहत अमेरिका में रह रहे सऊदी

पत्रकार जमाल खगोशी को या तो ज़िंदा पकड़ने या मारने का फ़ैसला किया गया था।

अमेरिका ने पहली बार खगोशी की हत्या के लिए सीधे पर तौर सऊदी क्राउन प्रिंस का नाम

लिया है, हालांकि सऊदी युवराज इस बात से इनकार करते रहे हैं कि उन्होंने जमाल

खगोशी की हत्या के आदेश दिए थे। साल 2018 में सऊदी पत्रकार जमाल खगोशी की

इस्तांबूल स्थित सऊदी वाणिज्य दूतावास के अंदर हत्या कर दी गई थी जब वो अपने कुछ

निजी दस्तावेज़ हासिल करने के लिए वाणिज्य दूतावास के अंदर गए थे।

वैसे इस हत्या के बाद हुए बवाल में यह स्पष्ट हो गया था कि इस्रायल के एक पूर्व सैन्य

अधिकारी द्वारा तैयार साफ्टवेयर पिगासूस के माध्यम से खगोशी पर सऊदी अरब नजर

रखे हुए था। इसके लिए उसके एक दोस्त के मोबाइल फोन पर इस साफ्टवेयर से यह

जासूसी हो रही थी। इसी वजह से वह तुर्की में कब सऊदी अरब दूतावासा जाने वाला है,

इसका जानकारी होने के बाद ही उनके वहां जाने के पहले ही सऊदी अरब से खास लोग

उसकी हत्या के लिए भेजे गये थे।

जमाल खगोशी को मारने सऊदी अरब से लोग आये थे

वैसे अमेरिकी रिपोर्ट आने के बाद सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने इसे लेकर बयान जारी

किया है। इस बयान में कहा गया है कि सऊदी की सरकार जमाल खगोशी मामले में

अपमानजनक और ग़लत निष्कर्ष तक पहुँचने वाली अमेरिकी रिपोर्ट को सिरे से ख़ारिज

करती है। हम इस रिपोर्ट को अस्वीकार करते हैं। इस रिपोर्ट में ग़लत निष्कर्ष निकाला

गया है। सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यह एक नकारात्मक और फ़र्ज़ी

रिपोर्ट है। हम इस मामले को लेकर पहले ही कह चुके हैं कि वो एक संगीन अपराध था,

जिसमें सऊदी अरब के क़ानून और मूल्यों का उल्लंघन किया गया। हमारी सरकार ने इस

मामले की जाँच के लिए सभी कड़े क़दम उठाए थे ताकि इंसाफ़ मिल सके। इसमें शामिल

लोगों को दोषी ठहराया गया और अदालत ने उन्हें सज़ा भी दी। कोर्ट की सज़ा का जमाल

खगोशी के परिवार ने भी स्वागत किया था। हमने वो हर ज़रूरी क़दम उठाए हैं, जिनसे ये

सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसा अपराध दोबारा ना हो। सऊदी के विदेश मंत्रालय ने

कहा, ”हम उन हर कोशिश को ख़ारिज करते हैं, जिनसे हमारे नेतृत्व, संप्रभुता और स्वतंत्र

न्यायिक व्यवस्था में बाधा उत्पन्न होती है। अमेरिका और सऊदी अरब के बीच की

साझेदारी पिछले क़रीब आठ दशकों से काफ़ी मज़बूत रही है। यह साझेदारी पारस्परिक

आदर और हितों पर आधारित है। हम इस इलाक़े और पूरी दुनिया में शांति-स्थिरता के

लिए काम करते हैं।”

सऊदी अरब ने अपने ऊपर लगे आरोपों का खंडन किया

वैसे इस रिपोर्ट के साथ साथ भारतीय संदर्भ में इस बात का उल्लेख इसलिए भी प्रासंगिक

हैं कि भारत में भी पिगासूस साफ्टवेयर के जरिए जासूसी हो रही है। कंपनी के दस्तावेजों

में यह बात दर्ज है कि भारत में पिगासूस बेचे गये हैं। कंपनी के नियम के मुताबिक

जासूसी के काम आने वाला यह साफ्टवेयर सिर्फ सरकारों को ही बेचा जाता है। इसकी

पुष्टि होने के बाद भी अब तक भारत सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि उसकी तरफ

से इस अत्यधिक महंगे साफ्टवेयर की खरीद किसने और क्यों की है।



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