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झारखंड में तापमान गिरा तो महसूस हुई चुनावी गर्मी

  • हर नेता अपनी साख बचाने को जुटा
  • विधानसभा की कई सीटों पर बहुकोणीय संघर्ष
  • पहले चरण में कुछ कुछ साफ होगा बहाव की धार
  • दूसरे चरण तक खेमाबंदी के मोहरे भी सजे होंगे
  • पांचवा चरण सिर्फ झामुमो के अस्तित्व की लड़ाई
संवाददाता

रांचीः झारखंड में तापमान गिरता जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों की

मानें तो आने वाले दिनों में तापमान में अचानक और गिरावट आने की

आशंका है। इस ठंड के बढ़ते प्रभाव के बीच राजनीति के मैदान की

गर्मी दिनों दिन बढ़ती जा रही है। खास तौर पर चुनावी बिसात कुछ

ऐसी बिछ रही है कि सीधी लड़ाई में नये कोण जुड़ते चले जा रहे हैं।

इसलिए मतदाताओं की रुझान को समझना भी टेढ़ी खीर बनती चली

जा रही है। चुनाव जीतने की जद्दोजहद में जुटे नेता और समर्थक लोगों

के दिल टटोलने में पूरी ताकत लगाये हुए हैं।

उनके तनाव का यह आलम है कि प्रत्याशी और उनके समर्थक अक्सर

ही अपना आपा खो रहे हैं। राज्य के कई इलाकों से इस किस्म की

अप्रिय घटनाओं की सूचना आयी है। सोशल मीडिया के विस्तार की

वजह से इस किस्म की घटनाओं के वीडियो भी चंद मिनटों में पूरे

राज्य तो क्या सारे देश में प्रसारित भी हो रहे हैं।

झारखंड में तापमान के साथ बदला चुनावी मौसम भी

दरअसल इस बार का चुनाव पूर्व के समीकरणों को बदलता नजर आ

रहा है। पिछले चुनाव में कई राजनीतिक दल अलग अलग मैदान में

थे। इसी वजह से लगभग सभी सीटों पर चुनाव पूर्व बढ़त की स्थिति

भाजपा की नजर आ रही थी। इस बार महागठबंधन के अस्तित्व में

होने की वजह से यह बिखराव खत्म हुआ है।

अनेक इलाकों में महागठबंधन के प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार में सभी

दलों के झंडे बैनर एक साथ नजर आ रहे हैं। समर्थकों में भी थोड़ी बहुत

ऐसी ही एकजुटता दिखने लगी है। लेकिन यह सारा गणित झारखंड

विकास मोर्चा और ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन की वजह से बिगड़

रहा है। पलामू के कुछ स्थानों पर राजग से अलग हुए लोजपा और

जदयू की भी धमक सुनाई पड़ने लगी है। इन दो दलों के अलग होने की

वजह से अनेक इलाकों में अब सीधी लड़ाई बहुकोणीय बनती दिख रही

है।

प्रथम और दूसरे चरण के मतदान के दौरान ही इस खेमाबंदी का कुछ

कुछ प्रभाव समझ में आने लगेगा। जैसे जैसे चुनाव के आगे के चरण

होंगे, यह लडाई और तीखी होगी, इसकी पूरी संभावना है।

खास तौर पर पांचवे चरण में अधिकांश सीटें संथाल परगना की होंगी।

इस वजह से यह चरण मुख्य तौर पर झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए

सबसे अधिक महत्वपूर्ण बनेगा।

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