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झारखंड की राजनीति फिर गरमायेगी राज्यसभा चुनाव करीब

  • बाबूलाल के खेमाबदल का दोनों पक्षों को इंतजार था

  • भाजपा के अंदर बदल जाएंगे सिरमौर के दावेदार

  • महागठबंधन में एक मंत्री सीट पर जद्दोजहद जारी

  • दुमका उप चुनाव पर भी है दोनों खेमा की नजर

संवाददाता

रांचीः झारखंड की राजनीति में अब गर्मी के मौसम में फिर से गरमाने जा रही है। जिस

तरीके से मौसम में तापमान चढ़ रहा है, उससे कहीं अधिक तेजी से बाबूलाल मरांडी के

भाजपा में शामिल होने का इंतजार किया जा रहा था। वह काफी अरसे बाद फिर से भाजपा

में शामिल होने का एलान कर चुके हैं। दरअसल उनकी पार्टी झारखंड विकास मोर्चा का ही

भाजपा में विलय करने का फैसला पार्टी की कार्यकारिणी में लिया जा चुका है।

झारखंड की राजनीति में कई मुद्दों को सुलझाने के लिए श्री मरांडी के अंतिम फैसले के बाद

ही परिस्थितियों पर ध्यान दिया जा रहा है। मसलन भाजपा ने अब तक विधानसभा में

प्रतिपक्ष के नेता के नाम पर एलान नहीं किया है। इस पद के लिए पूर्व में रांची के विधायक

सीपी सिंह और विश्रामपुर से दोबारा जीते रामचंद्र चंद्रवंशी प्रयासरत थे। लेकिन बाबूलाल

के पार्टी में शामिल होने का एलान होते ही सारे पुराने समीकरण ध्वस्त हो चुके हैं। अब

इसके साथ ही भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के लिए भी नये सिरे से दावेदारी बनाने और बिगाड़ने

का खेल तेज हो रहा है।

ठीक इसी तरह हेमंत सोरेन के कैबिनेट में अब भी एक सीट खाली है। पहले यह माना गया

था कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के अनुभवी नेता प्रो. स्टीफन मरांडी को इस पद पर लाया

जाएगा और वह राज्य के उप मुख्यमंत्री भी बनेंगे। इस बीच झाविमो के आंतरिक

समीकरण बदलने से यह संभावना फलीभूत नहीं हो सकी। इस बीच बंधु तिर्की और प्रदीप

यादव दिल्ली में कांग्रेस के नेताओं से मिल आये। इसके बाद से ही यह समझा जा रहा है

कि ईसाई कोटा से यह मंत्री पद स्टीफन मरांडी अथवा बंधु तिर्की में से किसी एक को मिल

सकता है।

झारखंड की राजनीति में एक साथ कई पेंच फंसे हैं

भाजपा के अंदर से इस बात का जोरदार तरीके से प्रचार किया जा रहा है कि दरअसल

हेमंत सोरेन अपने पुराने नेताओं को दरकिनार करना चाहते हैं। लेकिन सच यह है कि

स्टीफन मरांडी सहित अन्य पुराने नेता आज भी दरअसल शिबू सोरेन के प्रति अपनी पूर्ण

निष्ठा रखते हैं। इसलिए भाजपा की यह चाल भी हो सकती है कि किसी तरह हेमंत सोरेन

और स्टीफन मरांडी के बीच दूरी पैदा हो। इससे दुमका विधानसभा की सीट पर आने वाले

दिनों में होने वाले उपचुनाव में भाजपा को फायदा मिल सकता है।

इनके बीच ही दिल्ली की राजनीति में राज्यसभा चुनाव का तिकड़म फंस गया है। झारखंड

से इस बार रिक्त होने वाली दो सीटों पर कौन जाएगा, इस पर औपचारिक चर्चा नहीं होने

के बाद भी अंदरखाने में सेटिंग का काम प्रारंभ हो चुका है

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