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झारखंडी आई पी एस कृष्णा प्रकाश ने हासिल किया अनोखा कीर्तिमान

  • @राकेश अग्रवाल

नईदिल्लीः झारखंडी आई पी एस यानी वह झारखंड के निवासी रहे हैं लेकिन वर्तमान में

महाराष्ट्र में पदस्थापित हैं। झारखंड के कोरबा, लोहरदगा में पले-बढ़े, महाराष्ट्र कैडर के

1998 बैच के आई पी एस अधिकारी कृष्णा प्रकाश ने एक अनोखा कीर्तिमान स्थापित

किया है। वो पहले वर्दीवाले सरकारी कर्मचारी हैं जिन्होनें नौकरी में रहते हुए आयरन मैन

ट्रायथलन 2017 का ख़िताब अपने नाम किया है। इससे पहले यह उपलब्धि किसी

वर्दीधारी सिविल सर्वेंट, सैन्य सेवाओं या पारा मिलिट्री में कार्यरत कर्मचारी सहित किसी

ने भी यह गौरव प्राप्त नहीं किया है। उन्होनें अपने ट्विटर हैंडल से यह जानकारी देते हुए

लिखा कि वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्ड होल्डर्स का हिस्सा बनकर गौरवान्वित महसूस कर रहा

हूँ। मै पहला भारतीय वर्दीधारी सिविल सर्वेंट हूँ जिसमें सैन्य सेवाएं एवं पारा मिलिट्री भी

शामिल है, जिसने आयरन मैन का ख़िताब अपने नाम किया है। जय हिन्द । इसके साथ

ही उन्होंने रिकॉर्ड के सर्टिफिकेट के साथ अपनी तीन तस्वीरें भी साझा कीं। आयरन मैन

ट्रायथलन विश्व में खेलों की सबसे कठिन प्रतियोगिताओं में से एक प्रतियोगिता है। इसमें

प्रतिभागी को 3.8 किलोमीटर की तैराकी, 180.2 किलोमीटर की साइकिलिंग और निश्चित

समय सीमा के भीतर 42.2 किलोमीटर की दौड़ में भाग लेना पड़ता है। हालाँकि टाइटल

जीतने के बाद उन्हें घुटनों में हुई तकलीफ के चलते हॉस्पिटल में भी भर्ती होना पड़ा था।

इसके बाद उन्होनें 2018 की अल्ट्रामैन वर्ल्ड चैंपियनशिप भी जीती, जिसमें तीन दिनों में

खुले समुद्र में 10 किलोमीटर की तैराकी, 421 किलोमीटर की क्रॉस कंट्री साइकिलिंग और

अंत में 84 किलोमीटर की अल्ट्रा मैराथन शामिल थी। और यह ख़िताब उन्होनें एक वर्ष

पूर्व हुए फ्रैक्चर के बाद हासिल किया है।

झारखंडी आई पी एस का प्रारंभिक जीवन मुश्किलों से भरा था

कृष्णा प्रकाश का प्रारंभिक जीवन मुश्किलों से भरा था। शुरुआती पढ़ाई उन्होनें गांव के ही

एक अव्यवस्थित स्कूल में पूरी की थी। आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें हज़ारीबाग़ के एक

कैथोलिक स्कूल भेजा गया, जहाँ उनको गांव के माहौल से आने के बाद अपने आप को

एडजस्ट करने में मुश्किलें आईं। लेकिन धीरे धीरे वे उस माहौल में एडजस्ट होते गए और

हज़ारीबाग़ के संत कोलंबस से पढ़ाई पूरी की। कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने

सामाजिक कार्यों में भागीदारी शुरू कर दी थी और नेहरू युवा केंद्र की सदस्य बन गए थे।

पुलिस की नौकरी की प्रेरणा उन्हें स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा एक ताकतवर पड़ोसी के

गलत कदम का विरोध करने के चलते परेशान किये जाने के कारण मिली और तभी

उन्होंने पुलिस अधिकारी बनने का निर्णय लिया। 1995 में पहली बार यू पी एस सी की

परीक्षा में बैठे लेकिन सफलता उन्हें अपने तीसरे प्रयास में 1998 में मिली । वर्तमान में यह

झारखंडी आई पी एस पिम्परी, चिंचवाड़, महाराष्ट्र में पुलिस आयुक्त के पद पर हैं। 

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