fbpx Press "Enter" to skip to content

घूसखोरी और बेइमानी में तीसरे नंबर पर है झारखंड







  • सबसे ऊपर राजस्थान राज्य का नंबर
  • इस मामले में भी आगे निकला है बिहार
  • हर साल जारी होती है ऐसी सर्वेक्षण रिपोर्ट
  • ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल के सर्वेक्षण का आंकड़ा सामने आया
विशेष प्रतिनिधि

रांचीः घूसखोरी और बेइमानी के मुद्दे पर झारखंड पूरे देश में तीसरे
नंबर पर है। एक स्वतंत्र और प्रतिष्ठित संस्था द्वारा कई अन्य
सहयोगी संस्थाओं के साथ मिलकर किये गये इस सर्वेक्षण का नतीजा
यही आंकड़ा दर्शाता है।

ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल एक प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय संस्था है। उसने
लोकल सर्कल्स के समूहों के साथ मिलकर पूरे देश में इस विषय पर
सर्वेक्षण किया है। संस्था पहले से ही इस दिशा में लगातार शोध करती
आयी है। इस बारके आंकड़े में झारखंड का तीसरा नंबर आया है।

यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्तमान में झारखंड के चुनाव में
भ्रष्टाचार एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है।

सरयू राय वनाम रघुवर दास विवाद के केंद्र में यह भ्रष्टाचार है। दूसरी
तरफ हाल के दिनों में रघुवर दास ने हेमंत सोरेन पर भी इसी मुद्दे पर
जोरदार हमला बोला है।

सर्वेक्षण के आंकड़ो के बारे में बताया गया है कि देश भर में करीब
1,90,000 लोगों से उनकी राय ली गयी थी।

इनमें से 51 प्रतिशत लोगों ने स्वीकार किया है कि तमाम दावों को
झूठलाते हुए उन्हें सरकारी दफ्तरों में अपना काम कराने के लिए
घूस देना पड़ता है। यह पिछले 12 महीनों के दौरान की स्थिति है।

इस लिहाज से यह माना जा सकता है कि झारखंड में भ्रष्टाचार  
का पैमाना ऊपर गया है।

घूसखोरी और बेइमानी में बिहार झारखंड से उपर

झारखंड को तीसरे नंबर पर बताते हुए यह कहा गया है कि सर्वेक्षण के
दायरे में आये 74 प्रतिशत लोग यह मानते हैं कि उन्हें अपना काम
कराने के लिए सरकारी दफ्तरों में घूस देना पड़ता है।

रोचक स्थिति यह है कि इनमें से कई लोग यह भी स्वीकार करते हैं कि
उन्होंने एक ही काम के लिए कई बार घूस दिये हैं। दूसरी तरफ 13
प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो यह मानते हैं कि सिर्फ घूस नहीं देने की वजह
से उनका काम नहीं हुआ है जबकि उसी प्रकार के अन्य लोगों के काम
घूस देने की वजह से हो गये हैं।

झारखंड का तीसरा नंबर आने के क्रम में इसी सर्वेक्षण में सबसे ऊपर
राजस्थान का नंबर है। यहां घूसखोरी की बात स्वीकार करने वाले 78
प्रतिशत लोग हैं। वहां भी 22 फीसद लोग ऐसे हैं, जिन्हें एक ही काम के
लिए कई बार घूस देना पड़ा है। इन 78 प्रतिशत लोगों में से 56 प्रतिशत
को एक से ज्यादा बार एक ही काम के लिए घूस देना पड़ा है।

वहां भी 22 प्रतिशत लोग ऐसे पाये गये हैं, जिनका काम सिर्फ घूस नहीं
देने की वजह से नहीं हुआ है।

झारखंड की इस स्थिति के लिए दूसरे संतोष की बात इस आंकड़े में
बिहार का नंबर उससे ऊपर होना है। बिहार में 75 फीसदी लोग
घूसखोरी के बिना काम नहीं होने की बात स्वीकार करते हैं।

इनमें से 50 प्रतिशत को एक ही काम के लिए कई बार घूस देना पड़ा है
जबकि 25 फीसद लोग मानते हैं कि घूस नहीं देने की वजह से 25
प्रतिशत लोगों का काम नहीं होने की भी शिकायत इस सर्वेक्षण में दर्ज
की गयी है।

घूस नहीं देने पर काम नहीं होने की भी शिकायत अधिक

ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल की इस रिपोर्ट की वजह से इस सूची में झारखंड
के नीचे उत्तर प्रदेश का नंबर है। वहां यह आंकड़ा भी 74 प्रतिशत है
जबकि घूस नहीं देने की वजह से काम नहीं होने की शिकायत मात्र
तीन प्रतिशत लोगों ने  की है।

पांचवे नंबर पर तेलेंगना है, जहां यह आंकड़ा 67 प्रतिशत का है। वहां
11 प्रतिशत लोगों की शिकायत है कि घूस नहीं देने की वजह से उनका
जायज काम नहीं हुआ है।

इस सूची में छठा नाम पंजाब का है।  जहां 63 प्रतिशत लोगों की
घूसखोरी की शिकायत है। वहां के 27 प्रतिशत लोग मानते हैं कि घूस
नहीं देने की वजह से उनका काम नहीं हो पाया है।

कर्नाटक में भी यह आंकड़ा 63 प्रतिशत का है जहां सिर्फ 9 प्रतिशत ऐसे
लोग पाये गये हैं, जिन्होंने इस बात की शिकायत की है कि टेबल ने
नीचे से पैसा नहीं देने की वजह से उनका काम रोका गया है।

इस कड़ी में अंतिम नाम तमिलनाडू राज्य का है। वहां के 62 प्रतिशत
लोगों ने सरकारी दफ्तरों में काम कराने के लिए घूस देने की बात मानी
है। जबकि वहां के 8 प्रतिशत लोग यह मानते हैं कि घूस नहीं देने की
वजह से उनका जायज काम रोका गया है।



Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

3 Comments

Leave a Reply