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कर्जा लेकर घी पीने की प्रथा अब बंद होः विजय शंकर नायक

रांचीः कर्जा लेकर होशियारी दिखाने का जो नतीजा अब हमारे सामने हैं, उससे साफ है कि

झारखंड को इससे उबर जाना चाहिए। झारखंडी सूचना अधिकार मंच ने आज कहा कि

झारखंड में कर्जा लेकर घी पीने की परंपरा अब बंद होनी चाहिए क्योंकि पूर्ववर्ती भाजपा की

सरकारों ने कर्ज लेकर घी पीने की परंपरा के कारण ही आज राज्य में आज चालू वित्तीय

वर्ष के अंत यानी की 31 मार्च 2021 तक राज्य पर कर्ज का बोझ बढ़ कर 1,03,649,61

करोड़ रुपए हो जाएगा जिसका मतलब प्रत्येक झारखंडी के ऊपर आज करीब 26000 हजार

रुपए से अधिक राज्य का कर्ज है जो राज्य के लिए एवम् राज्य की जनता के लिए

शुभकारी नहीं है । उपरोक्त बातें आज झारखंडी सूचना अधिकार मंच के केंद्रीय अध्यक्ष

विजय शंकर नायक ने कही उन्होंने यह भी कहा कि अब राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन

को कर्जा लेकर ही पीने की या पुरानी परंपरा को समाप्त कर देना चाहिए और राज के

आंतरिक संसाधन को विकसित राज्य में कैसे राजस्व की विधि हो, इस पर सरकार को

अब चिंतन और मनन करना चाहिए ताकि राज के लोगों को एवं राज को कैसे बचाया जा

सके एवं आने वाले पीढ़ी को हम कर्ज मुक्त झारखंड दे सके। श्री नायक ने आज यह भी

कहा कि आज स्थिति इतनी भयावह है कि प्रति व्यक्ति आय के मामले में झारखंड 27 वें

नंबर पर खड़ा है। राजकोषीय घाटा दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। सभी विभागों के

राजस्व वसूली भी संतोषजनक नहीं है, वित्तीय कुप्रबंधन होने एवं राजस्व वसूली के लक्ष्य

पूरा नहीं होने से राज्य आज कर्ज के दलदल में समाता जा रहा है ।

कर्जा लेने के बदले अपना वित्तीय प्रबंधन मजबूत करे सरकार

ऐसे में सरकार को अपना वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करने का कार्य करना चाहिए एवं

राजस्व वसूली एवं लक्ष्य को प्राप्त नहीं करने वाले कोताही बरतने वाले अधिकारियों पर

कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए बकायादारो लोगों पर नकेल कसी जानी चाहिए।आज

योजना मद की राशि शत-प्रतिशत खर्च करने की आवश्यकता पर बल देने की आवश्यकता

है और गैर योजना मद की राशि में व्यापक कटौती आज समय की मांग है एवं यही

एकमात्र विकल्प है जिससे हम राज्य को कर्ज से बचा सकते हैं।

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