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टिकैत को पानी पिलाकर वापस लौटे कृषि मंत्री बादल पत्रलेख

  • आंदोलनकारी किसानों के बीच लोकप्रिय हैं झारखंड के कृषि मंत्री

  • दिल्ली में पार्टी के वरीय नेताओँ से हुई संगठन पर चर्चा

  • प्रवक्ता ने कहा पार्टी संगठन में बदलाव जैसी बात नहीं

राष्ट्रीय खबर

रांचीः टिकैत को पानी पिलाकर झारखंड के कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने किसान आंदोलन

में अभूतपूर्व लोकप्रियता हासिल की है। वहां मौजूद किसानों ने एक किसान का दूसरे

किसान से यह प्यार देखकर उसकी सराहना की है। कल ही सोशल मीडिया पर श्री पत्रलेख

द्वारा राकेश टिकैत को पानी पिलाने का वीडियो वायरल हो गया था। वहां पार्टी के अन्य

नेताओं के साथ भेंट करने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव और कृषि मंत्री

बादल पत्रलेख आज रांची लौटे हैं। हवाई अड्डे पर पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता आलोक कुमार

दूबे समेत अन्य पार्टी नेताओं-कार्यकर्त्ताओं ने उनका माला पहना कर स्वागत किया

हवाई अड्डे पर पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में प्रदेश अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव ने

कहा कि नई दिल्ली दौरे के क्रम में पार्टी के महासचिव केसी वेणुगोपाल से मुलाकात हुई।

इस दौरान पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर चर्चा हुई।

उन्होंने बताया कि झारखंड के कई जिले पश्चिम बंगाल की सीमा से लगे है, जबकि असम

में टी- गार्डन में बड़ी संख्या में झारखंड के भी जनजातीय समुदाय लोग काम करने गये है।

कांग्रेस कार्यकर्त्ता इन दोनों राज्यों के विधानसभा चुनाव में हरसंभव सहयोग करें। उन्हें

भी पार्टी नेतृत्व की ओर से जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी, उसे निभायेंगे। उन्होंने बताया

कि वे चाहेंगे यदि चुनाव प्रचार की जिम्मेवारी मिलती है, तो दार्जिलिंग और टी-गार्डन

बहुल इलाके में जाने की कोशिश करेंगे,क्योंकि उस क्षेत्र में बड़ी संख्या में झारखंड के लोग

और जनजातीय समाज के लोग रहते है, क्षेत्र के लोग उनकी बात को सुनेंगे।

टिकैत को पानी पिलाने के क्रम में झारखंड में समर्थन की बात कही

इस मौके पर कृषिमंत्री बादल ने बताया कि गठबंधन सरकार के एक वर्ष के कार्यकाल में

हुए कार्यां की जानकारी पार्टी नेतृत्व को दी गयी। पार्टी नेतृत्व ने प्रदेश अध्यक्ष डॉ रामेश्वर

उरांव के नेतृत्व में किये जा रहे कार्यों की सराहना की है। उन्होंने बताया कि दिल्ली दौरे के

क्रम में वे आंदोलनरत किसानों से भी मिलने गये और उन्हें नैतिक समर्थन बताते हुए

कहा कि उनके द्वारा जिस आंदोलन की नींव रखी गयी, अलख जगायी गयी है, वह

झारखंड समेत देश के सुदूरवर्ती हिस्सों में भी फैल चुका है। उन्हें बताया गया है कि

किसान आंदोलन के समर्थन में संतालपरगना में भी ट्रैक्टर रैली आयोजित की गयी ,

जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। इसलिए जो लोग यह दिभ्रमित करने का

प्रयास कर रहे है कि यह आंदोलन कुछ हिस्से के किसान ही कर रहे है, यह बात पूरी तरह

से गलत है। किसान नेता बताया कि जरूरत पड़ने पर वे झारखंड समेत देश भर केदूसरे

हिस्सों में जाएंगे, यदि वे झारखंड आएंगे तो उनका जोरदार स्वागत किया जाएगा और

जब तक केंद्र सरकार द्वारा किसानों के लिए जारी डेथ वारंट को वापस नहीं ले लिया जाता

है, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।

दोनों के लौटने पर प्रवक्ताओं ने जारी किया बयान

इस मौके पर प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता लाल किशोर नाथ शाहदेव एवं डा राजेश गुप्ता छोटू ने

बताया कि संतालपरगना प्रमंडल की तरह ही हजारीबाग और पलामू प्रमंडल में भी ट्रैक्टर

रैली आयोजित की जाएगी,इसे लेकर कर कांग्रेस कार्यालय र्रांची कल दिनांक 4 फरवरी को

अपराहन 12।30 बजे पार्टी नेताओं और पदाधिकारियों की बैठक बुलायी गयी है जिसमें

कार्यक्रम की सफलता को लेकर रणनीति बनाई जाएगी एवं तारीखों का एलान किया

जाएगा एवं साथ ही साथ आगामी छ:फरवरी को किसानों के द्वारा आहूत राष्टव्यापी

चक्का जाम को सफल बनाने की रणनीति पर भी विचार विमर्श किया जाएगा।

इस बीच प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे ने संगठन में किसी भी प्रकार

के फेरबदल से पूरी तरह से इंकार किया है।उन्होंने कहा कि अलग राज्य गठन होने के बाद

पहली बार कांग्रेस पार्टी ने डा रामेश्वर उराँव एवं विधायक दल नेता आलमगीर आलम के

नेतृत्व में पहली बार प्रचंड सफलता हासिल की है जबकि ठीक चुनाव के वक्त के चार चार

पूर्व प्रदेश अध्यक्षों व विधायकों ने पार्टी छोड़कर चले गये थे।ऐसी स्थिति में डा रामेश्वर

उराँव ने पूरी पार्टी को संगठित कर कार्यकर्ताओं को उत्साहित कर चुनाव में बहुमत हासिल

की।कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी एवं कांग्रेस नेता राहुल गांधी, संगठन प्रभारी

केसीवेणुगोपाल,प्रभारी आरपीएनसिंह समेत तमाम नेताओं ने डा रामेश्वर उराँव की

सफलता के लिए विशेष रुप से धन्यवाद देते हुए संगठन को मजबूती के साथ कार्य करने

का निर्देश दिया है।

गाजीपुर सीमा पर बादल का स्वागत हुआ

कृषिमंत्री बादल ने उन्हें झारखंड का पानी पिलाकर यह आश्वस्त किया कि रत्नगर्भा

राज्यवासियों ही नहीं, बल्कि यहां का पवित्र जल, जंगल और जमीन भी अन्नदाताओं के

साथ है। बादल ने कृषि कानून को तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि केंद्र

सरकार संवेदनहीन हो गई है , वह किसानों के दर्द को वह समझ नहीं पा रही हैं। सड़कों पर

लोहे की कीलें, कंटीले तार एवं सीमेंट की दिवार बनाकर अन्याय के विरुद्ध शांतिपूर्ण ढंग से

प्रदर्शन कर रहे अन्नदाताओं को अपने ही देश में दुश्मन बनाकर प्रताड़ित किया जा रहा है।

बिजली , पानी, इंटरनेट सेवाएं बाधित कर दी जा रही है, केंद्र सरकार का यह रवैया

लोकतंत्र के लिए बेहतर नहीं है।

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