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झारखंड में गठबंधन सरकार की तरफ बढ़ता विधानसभा चुनाव

  • सभी दलों में दो किस्म के बागी सक्रिय
  • नेता के दल बदलने से बदल रहे हैं समीकरण
  • स्पष्ट बहुमत के लिए भाजपा को मोदी का आसरा
  • झाविमो और आजसू के समर्थन पर होगा दारोमदार
संवाददाता

रांचीः झारखंड में गठबंधन सरकार का पलड़ा धीरे धीरे भारी होता

नजर आने लगा है। दरअसल भाजपा और कांग्रेस के अलावा जेएमएम

में भी विद्रोह की स्थिति की वजह से जो समीकरण रातों रात बदले हैं,

उससे यह पलड़ा अब झारखंड विकास मोर्चा और आजसू की तरफ बढ़

चला है। कई सीटों के पूर्वानुमान यह बताते हैं कि भाजपा के नाराज

नेताओं के आजसू में आते ही पलामू के इलाके में परिस्थितियां तेजी से

बदलने लगी हैं। चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा जब हुई थी तो स्पष्ट

तौर पर झारखंड में भाजपा काफी बढ़त की स्थिति में थी। तब तक

भाजपा के खिलाफ कोई सांझा मोर्चा भी नहीं बन पाया था। इस बीच

जेएमएम, कांग्रेस और राजद ने वाम दलों को साथ लेकर भाजपा के

खिलाफ मोर्चा बनाने की पहल की। दूसरी तरफ टिकट बंटवार को

लेकर भाजपा और आजसू के बीच अंदर ही अंदर सुलगता तनाव बाहर

आने लगा। वैसे यह कोई गोपनीय बात नहीं थी कि मुख्यमंत्री रघुवर

दास और आजसू अध्यक्ष सुदेश महतो के निजी रिश्ते बहुत ही खराब

हैं। लेकिन चंद्रप्रकाश चौधरी के लिए गिरिडीह की सीट छोड़ने की वजह

से कुछ लोगों को उम्मीद थी कि विधानसभा चुनाव में दोनों का

यह रिश्ता आड़े नहीं आयेगा।

झारखंड में गठबंधन यानी तीसरा मोर्चा की ताकत

जैसे जैसे समय बीता सभी दलों की अंदरुनी गड़बड़ी सार्वजनिक होती

चली गयी। इस बीच भाजपा के अंदर टिकट वितरण के तौर तरीकों पर

जो सवाल खड़े हुए उससे पार्टी की असली छवि तो काफी नुकसान

पहुंचा। इस वास्तविकता को भांपते हुए अब भाजपा के नेता भी अबकी

बार 65 पार का नारा देने से बचने लगे हैं। अनेक सीटों पर अब भाजपा

को अपने बागियों से ही खतरा है। साथ ही कुछ सीटों पर आजसू के

प्रत्याशियो के मैदान में आ जाने की वजह से भी भाजपा प्रत्याशियों के

वोट में कमी आना तय है। दूसरी तरफ कांग्रेस और जेएमएम से नाराज

लोगों ने भी आजसू के साथ साथ झारखंड विकास मोर्चा में अपना

भविष्य तलाशने का काम प्रारंभ किया। प्रदीप बलमुचू आजसू के साथ

जुड़ गये तो कोडरमा की महिला नेत्री शालिनी गुप्ता भी इसी पार्टी में

शामिल हो गयीं। दूसरी तरफ जेएमएम नेता अंतु तिर्की जैसे लोग

झारखंड विकास मोर्चा में चले गये। अब बदले समीकरणों के मुताबिक

हटिया विधानसभा सीट पर नवीन जयसवाल भाजपा के प्रत्याशी हैं,

जिन्हें सबसे अधिक चुनौती आजसू के भरत काशी से मिलने की

संभावना जतायी जा रही है। कुछ इसी तरह अन्य सीटों पर भी भाजपा

के प्रत्याशियों को भाजपा के उन बागियों से खतरा है, जो अन्य दलों में

शामिल होकर चुनाव में उतर चुके हैं। इसके अलावा कई विधानसभा

सीटों पर टिकट वितरण से नाराज लोग भी ऐसे बड़े दलों की लुटिया

डूबोने में जुट गये हैं।

इसमें भाजपा के लिए रही सही कसर सरयू राय पर पार्टी के फैसले से

हो चुकी है। सरयू राय को टिकट देने में हुए विलंब से भाजपा को जो

नुकसान होना था, वह पूरे राज्य तक फैल चुका है।

स्पष्ट बहुमत नहीं मिलेगा तो चाहिए समर्थन

ऐसी स्थिति में विधानसभा चुनाव में किसी एक पक्ष को स्पष्ट बहुमत

हासिल होने की उम्मीद कम दिखाई पड़ रही है। लिहाजा चुनाव के बाद

जब सरकार गठन की बारी आयेगी तो दोनों खेमों से अलग चल रहे

झारखंड विकास मोर्चा और आजसू के समर्थन से ही सरकार का गठन

शायद संभव होगा। वैसे राजनीति के जानकार यह भी मानते हैं कि

लोकसभा चुनाव की तरह इस बार भी भाजपा को अंततः

नरेंद्र मोदी और अमित शाह का ही आसरा है। झारखंड  में रघुवर दास

के नाम पर चुनाव लड़ने का अभियान अब फेल कर चुका है। लिहाजा

दोनों बड़े नेताओं के चुनाव प्रचार से ही भाजपा की गाड़ी पटरी पर आ

सकती है।

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