सरयू राय के मुद्दों पर चुप क्यों है झारखंड भाजपा

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सरयू राय की चिट्ठी सार्वजनिक हो गयी तो भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश स्तर के

नेताओं को अनुशासन की याद आ गयी।

किसी एक चिट्ठी के लीक होने पर अगर आपत्ति है तो उस पत्र में अगर कुछ गलत लिखा है

तो उस पर भी प्रतिक्रिया आनी चाहिए थी।

लेकिन ऐसा नहीं कर भाजपा के प्रदेश नेताओं ने परोक्ष तौर पर यह स्वीकार कर लिया है कि

दरअसल श्री राय ने अपने पत्रों में जो मुद्दे उठाये हैं, उनका संतोषजनक उत्तर भी पार्टी के पास नहीं है।

दरअसल ऐसी गलती करने के पीछे की राजनीतिक मजबूरी भी अलग है।

मजबूत जनाधार वाले नेताओं को इस किस्म से पार्टी की नाराजगी की चिंता नहीं होती है।

लेकिन अगर संगठन पूरी तरह सरकार पर आश्रित हो तो ऐसे ही बयानों की अपेक्षा की जा सकती है।

इसलिए यह तय माना जाना चाहिए कि इस मुद्दे पर अभी और गुल खिलने वाले हैं।

काफी समय से सरयू राय को जानने वाले इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि

अगर भ्रष्टाचार का कोई मुद्दा उन्होंने उठाया है

तो वह आगे भी पूरी शिद्दत से अपनी बात पर टिके रहेंगे और जांच की गाड़ी को अंजाम तक अवश्य पहुंचा देंगे।

ऐसा उदाहरण हमलोगों ने चारा घोटाला और मधु कोड़ा के कार्यकाल में देखा है।

श्री राय ने साफ कर दिया है कि वह नहीं चाहते हैं कि कोई और मुख्यमंत्री भी इस तरीके से घोटाला के आरोप में जेल जाए।

इसलिए यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में श्री राय के मुद्दे ही पार्टी के लिए सार्वजनिक बहस के मंचों पर परेशानी का कारण बनने जा रहे है।

झारखंड भाजपा को चिट्ठी लीक होने पर है नाराजगी

भाजपा के प्रदेश महामंत्री दीपक प्रकाश ने कहा है कि

इस प्रकरण में सबसे गंभीर सवाल यह है कि मंत्री द्वारा राष्ट्रीय अध्यक्ष के यहां दिया गया पत्र लीक कैसे हुआ।

दीपक ने कहा कि मंत्री सरयू राय का पत्र हमलोगों ने अखबारों में पढ़ा।

मंत्री ने प्रदेश कार्यालय को उस पत्र की कोई प्रतिलिपि नहीं दी है, न ही हमें कहीं से उस पत्र की कोई कॉपी ही मिली है।

चूंकि अखबारों में छपा है कि उन्होंने पत्र केंद्रीय नेतृत्व को दिया है।

वे वहां से सीधे बात कर रहे हैं, ऐसे में इस बारे में कोई टिप्पणी करना उचित नहीं है, यह मामला केंद्र के पास है।

केंद्र इस पर निर्णय लेगा, लेकिन अगर उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्र दिया है तो वह लीक कैसे हुआ, यह एक गंभीर सवाल है।

पर, इतना स्पष्ट है कि इससे पार्टी की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

पार्टी की जो कार्यपद्धति है, उसका पालन होगा। अनुशासनहीनता का विषय प्रदेश अध्यक्ष का विषय है।

प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा इस पर विचार करेंगे।

इधर, प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा है कि

राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को लिखी गई चिट्ठी

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने चिट्ठी देखा और न पढ़ा, उससे पहले ही इसे सार्वजनिक कर दिया गया।

यह भाजपा की परंपरा के खिलाफ है।

भाजपा में अखबारों के जरिए संवाद करने की परंपरा नहीं है।

सरयू राय पार्टी के वरिष्ठ नेता और मंत्री हैं।

उन्हें लगता है कि प्रदेश में उनकी बातें नहीं सुनी जा रही है,

तो राष्ट्रीय नेतृत्व ने प्रदेश के लिए अलग से प्रभारी और सह प्रभारी नियुक्त कर रखा है।

वहां ये अपनी बातों को रख सकते थे।

लेकिन उनके द्वारा मीडिया में हाल में दिए गए बयान को पार्टी दुर्भाग्यपूर्ण मानती है।

सार्वजनिक रुप से दिए गए ऐसे बयानों से परहेज किया जा सकता था।

झारखंड के पदाधिकारियों को पहले दी गयी शिकायत का क्या हुआ

इस आरोप के संदर्भ में श्री राय ने सही उत्तर दिया है कि

अगर पत्र लीक हुआ है तो सीधी तौर पर उनकी निजी जिम्मेदारी बनती है।

लेकिन उन्होंने इन तमाम पत्रों में उठाये गये मुद्दो पर पार्टी नेताओं की चुप्पी पर फिर से सवाल उठा दिये हैं।

श्री राय का यह प्रतिप्रश्न बिल्कुल वाजिब है कि चिट्ठी में जो बिंदु उठाए गए हैं, उस पर बोलें कि वह सही है या गलत?

मंत्री ने कहा – इस मसले पर बोलने वाले पार्टी पदाधिकारी और प्रवक्ता यह बताएं कि

तीन माह पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री को लिखित रूप से जो पत्र दिया गया था, उस पर क्या हुआ?

कोई कार्रवाई हुई भी क्या?

साथ ही श्री राय ने यह बात भी कहा है कि पूर्व में लिखे गये पत्रों पर

तो आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, इसे क्या समझा जाए।

लिहाजा यह समझा जा सकता है कि श्री राय इतनी आसानी से

हथियार डालने के तेवर में तो फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं।

इसलिए आगे खनन घोटाले की अगली कड़ी में क्या कुछ गुल खिलेगा यह चुनावी मुद्दा भी बनने जा रहा है।

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