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झारखंड विधानसभा में आउटकम बजट का प्रयोग पहली बार

  • किसान कर्जमाफी के वादे को भूली नहीं सरकार

  • अपने कुशल प्रबंधन का परिचय दिया डॉ उरांव ने

  • कुल 91277 करोड़ के आय व्यय का बजट है यह

  • केंद्रीय सहायता पर बहुत अधिक निर्भरता नहीं

राष्ट्रीय खबर

रांचीः झारखंड विधानसभा में पहली बार अपने वादे के मुताबिक पूर्व पुलिस अधिकारी डॉ

रामेश्वर उरांव ने अपने प्रबंध और प्रशासकीय कुशलता का परिचय देते हुए आउटकम

बजट पेश किया। इस बजट में सबसे बड़ी बात यह है कि किसानों को राहत देने के अपने

वादे को सरकार भूली नहीं है। इस बार के बजट में किसानों की कर्ज माफी के लिए 12 सौ

करोड़ रुपये का अलग से प्रावधान किया गया है।

दस्तावेजों के मुताबिक इस बजट में राजस्व व्यय के लिए 75755 करोड़ रुपये और

पूंजीगत व्यय के लिए 15521 करोड़ रुपये का प्रावधान लाया गया है। सामान्य प्रक्षेत्र के

लिए 26734 करोड़ रुपये और सामाजिक प्रक्षेत्र के लिए 33625 करोड़ रुपये का प्रावधान है।

आर्थिक प्रक्षेत्र के लिए 30917 करोड़ रुपए का प्रावधान है। राज्य को अपने राजस्व से

23265 करोड़ मिलने का अनुमान है और गैर कर राजस्व से 13500 करोड़ का अनुमान

लगाया गया है। केंद्रीय सहायता से 17891 करोड़ रुपये का अनुमान है। केंद्रीय करों से

राज्य की हिस्सेदारी के रूप में 22050 करोड़ रुपए, उधार एवम अग्रिम वसूली से करीब 70

करोड़ का अनुमान है। वितीय वर्ष 2021-22 में राजकोषीय घाटा 10210 करोड़ होने का

अनुमान है। वितीय वर्ष 2021-22 में किसानों की कर्ज माफी के लिए 1200 करोड़ का

प्रावधान है। बिरसा ग्राम विकास योजना के लिए 61 करोड़, किसान समृद्धि योजना के

लिए 45 करोड़ रुपये का प्रावधान है। गिरिडीह और जमशेदपुर में नए डेयरी प्लांट होंगे

और रांची में मिल्क प्रोडक्ट प्लांट और मिल्क पाउडर प्लांट होगा। नए वित्त वर्ष में 3

हजार नए बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर आवास का निर्माण होगा।

झारखंड विधानसभा में वित्त मंत्री ने कोरोना योद्धाओँ को याद किया

रामेश्वर उरांव ने कहा कि कोरोना से झारखंड भी प्रभावित हुआ है। सभी कोरोना योद्धाओं

को नमन करता हूं। कोरोना काल में मीडिया की भूमिका भी अहम रही है। पंचायत से

लेकर राज्य के जनप्रतिनिधियों का कार्य भी प्रशंसनीय रहा। राष्ट्रव्यापारी लॉकडाउन के

दौरान झारखंड के प्रवासी मजदूरों अपने घर पहुंचे और उनके लिए भोजन की व्यवस्था

कराने में राज्य के जनता ने अहम भूमिका निभायी जो काबिले तारीफ रही है। कोरोना में

हुई क्षति की भरपाई होने में काफी समय लगेगा। सरकार जनता के साथ मिलकर काम

कर रही है। ग्रामीण विकास विभाग, जल संसाधन विभाग, कृषि पशुपालन एवं सहकारिता

विभाग के लिए समेकित रूप से लगभग 18653 करोड़ रुपए का प्रावधान किया जा रहा है।

वित्तीय प्रबंधन को बनाए रखने के लिए एफआरबीएम एक्ट के दायरे में रहते हुए । अपने

ऋण लेने की क्षमता को बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।11 विभागों के 21 मांगों के लिए

आउटकम बजट प्रस्तुत किया जा रहा है। इस बजट में सामान्य खर्च के लिए 26734

करोड़, सामाजिक क्षेत्र के लिए 33625 करोड़ और आर्थिक क्षेत्र के लिए 30917 करोड़ रुपए

का बजट पेश किया गया। राज्य को अपने कर राजस्व से 27265 करोड़ रुपए, गैर कर

राजस्व से 13500 करोड़ रुपए, केंद्रीय सहायता से 17891 करोड़ रुपए, केंद्रीय करों में राज्य

की हिस्सेदारी के रूप में 22050 करोड़ रुपए, लोक ऋण से 14500 करोड़ रुपए और उधार

तथा अग्रिम की वसूली से करीब 70 करोड़ मिलने का अनुमान है। 2021-22 में राजकोषीय

घाटा 10210 करोड़ होने का अनुमान है। जो कि आगामी वित्तीय वर्ष के अनुमानित

जीएसडीपी का 2.83% है। झारखंड कृषि ऋण माफी योजना अंतर्गत साल 2021 22 में

1200 करोड़ रुपए का बजट प्रस्तावित है।

राज्य में जनोपयोगी सेवाओं को विस्तार देने का प्रावधान भी है इसमें

तमाम आर्थिक कठिनाइयों के बाद भी इस बजट में राज्य को 117 नये एंबुलेंस दिया गया

है। गुरुजी किचन योजना नाम की एक नई योजना शुरू की जाएगी। कुल 3 हाफ वे होम

संचालित किया जायेगा। गरीब असहाय और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले बुजुर्गों को चलंत

वाहन के जरिए चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की योजना लागू की जायेगी। बुजुर्गों की

चिकित्सा सुरक्षा संरक्षण विधिक आवश्यकता से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए

इस साल एक हेल्पलाइन केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव किया गया है। जघन्य अपराध के

आरोपी बच्चों को सामान्य अपराध के आरोपी बच्चों से अलग रखने के उद्देश्य से राज्य में

प्लेस ऑफ सेफ्टी भवनों का निर्माण कराया जाएगा। वहीं स्वस्थ हो चुके मानसिक

रोगियों के पुनर्वास के लिए 2021 22 में रांची पूर्वी सिंहभूम तथा धनबाद जिलों में 30-30

लोगों की क्षमता वाले कुल 3 हाफ वे होम संचालित करने की योजना है। जहां मानसिक

रोगियों को ठीक होने के बाद रखा जायेगा। पूरे राज्य में कुल 1828 पंचायत जीरो

ड्रॉपआउट घोषित हो चुके हैं। आगामी वर्ष में 1000 और पंचायतों को जीरो ड्रॉपर पंचायत

घोषित करने का लक्ष्य रखा गया है। शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार काम करेंगे। जहां राज्य

के 500 प्रारंभिक विद्यालयों को एग्जांपलर स्कूल यानी प्रेरक गुणवत्ता शिक्षा केंद्र के रूप

में विकसित करने की योजना चलायी जायेगी। राज्य में शत-प्रतिशत साक्षरता के लिए

पढ़ना लिखना अभियान का शुभारंभ किया जाएगा । 2011 के जनगणना के मुताबिक

राज्य साक्षरता दर 66।41 थी। जो अभी 81% हो गई है। जिसे और बढ़ाने के क्षेत्र में काम

किया जायेगा।राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने के लिए 10करोड़ की राशि का

प्रावधान प्रस्तावित किया गया।

झारखंड विधानसभा में इसमें कई नये प्रयोग भी किये गये हैं

झारखंड ट्राईबल विश्वविद्यालय और झारखंड खुला विश्वविद्यालय की स्थापना की

जाएगी। इससे राज्य के स्वरूप एवं ग्रामीण क्षेत्रों में उच्चतर शिक्षा की पहुंच संभव हो

सकेगी। जिसमें ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को पढ़ने के लिए बाहर या घर से दूर नहीं जाना

पड़ेगा। वहीं महिला महाविद्यालय में आवश्यकता के मुताबिक 300 बेड का छात्रावास का

निर्माण कराया जाएगा। झारखंड विधानसभा में पेश किये गये इस बजट में बंधुआ

मजदूरों का पुनर्वास के लिए हर जिले में 10 करोड़ रुपये के कॉरपस फंड का गठन कर

लिया गया है। इस पोस्ट से मुक्त कराए हुए बंधुआ श्रमिकों को अविलंब सहायता राशि

उपलब्ध कराने की योजना है। 2021-22 में तीन हजार मिट्रिक टन तसर रेशम के उत्पादन

का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।राज्य में सड़कों का जाल बिछाने के लिए पथ निर्माण

विभाग को 3480 करोड़ की राशि उपलब्ध कराई गयी है। ट्रैफिक पार्क की स्थापना के लिए

10 करोड़ राशि खर्च होगी। माइनिंग कॉरिडोर का निर्माण होगा। गिरिडीह धनबाद और

देवघर में बनेगा रिंग रोड। ट्रैफिक पार्क की स्थापना के लिए 10 करोड़ राशि खर्च होगी।

ऊर्जा बचत के लिए मीटरिंग एंड एनर्जी एकाउंटिंग योजना। इस योजना के लिए 150

करोड़ का प्रावधान किया गया है।

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