जापान का अंतरिक्ष यान रियूगु पर सकुशल उतरा

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  • हाईबूसा 2 ने  गोली दागकर उल्कापिंड के नमूने लिये

  • दो छोटे यानों ने दी थी जमीन की जानकारी

  • पूरी घटना का वीडियो भी बनाया यान ने

  • उल्कापिंड पर यह यान एक विस्फोट भी करेगा

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः जापान के अंतरिक्ष यान ने अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक उल्कापिंड रियूगु पर उतरने में सफलता पा ली है।

मिली जानकारी के अनुसार सख्त जमीन वाले इस उल्कापिंड पर यान ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक ही पांच ग्राम की एक गोली भी दागी।

जापान की अंतरिक्ष एजेंसी जाक्सा ने यह जानकारी दी है।

यह बताया गया है कि गोली दागने के बाद यह यान ऊपर की तरफ चला आया था।

अब यान द्वारा उल्कापिंड की मिट्टी के नमूने एकत्रित कर लिये जाने की खबर दी गयी है।

वैसे यह नहीं बताया गया है कि इस यान ने अपने इस प्रारंभिक प्रयास में ही कितना नमूना एकत्रित किया है।

उल्लेखनीय है कि इस यान के साथ गये तीन छोटे यान पहले ही उस उल्कापिंड पर उतार दिये गये थे।

उनके जिम्मे भी मिट्टी का नमूना एकत्रित करने के अलावा कुछ और वैज्ञानिक प्रयोग थे।

वैज्ञानिकों के मुताबिक यह पूरा काम ही अत्यंत कठिन था।

क्योंकि यान पर वर्तमान समय के नियंत्रण की कोई व्यवस्था नहीं थी।

यह यान पृथ्वी से करीब तीस करोड़ किलोमीटर की दूरी पर है, जहां कोई भी संकेत तत्काल तो नहीं पहुंच सकता।

इसलिए पहले से ही यान को क्या काम कब करना है, इसकी जानकारी दी गयी थी।

इन्हीं पूर्व निर्देशों के आधार पर ऑटो पाइलट मोड में चलते हुए यान ने तमाम कार्यों को अंजाम दिया।

इस दौरान यान ने अपने वीडियो कैमरे से अपने सामने की तमाम घटनाओं की तस्वीर भी नियंत्रण कक्ष तक भेजी है।

अंतरिक्ष यान से पहले भेज गये छोटे यान मिनार्वा 2-1 ए और मिनार्वा 2-1 बी ने बता दिया था कि इस उल्कापिंड की सतह काफी उबड़ खाबड़ है।

जापान के इस यान को उतारना भी बहुत बड़ी चुनौती थी

यहां की जमीन भी काफी सख्त है। ऐसे में यान को सकुशल उतारना एक बड़ी चुनौती थी।

यान को उतारने के लिए एक खाली और समतल जगह की भी जरूरत थी।

जिसे खोज निकालने के बाद उसी स्थान पर यान को उतारने की पूरी तैयारी की गयी थी।

इसी योजना के आधार पर सारा काम किया गया।

वैसे जाक्सा की जानकारी के मुताबिक इस यान के पास एक और गोली सुरक्षित है।

लेकिन यह नहीं बताया गया है कि इस गोली को दागने का परीक्षण कब किया जाएगा।

वैज्ञानिक यह मानते हैं कि करोड़ों वर्ष तक सूर्य की रोशनी के अत्यंत कठिन विकिरण से गुजरते हुए उसकी जमीन की संरचना ही बदल चुकी है।

लिहाजा यह अब कैसी है, यह समझना भी बिल्कुल नई बात होगी।

हो सकता है कि उल्कापिंड की सतह और अंदर की संरचना भी भिन्न भिन्न हो।

वैज्ञानिकों ने इसी अंदर की मिट्टी का जानकारी लेने के लिए भी एक योजना बना रखी है।

यह यान आगामी अप्रैल माह तक उल्कापिंड पर अपने अनुसंधान जारी रखेगा।

इस बीच उल्कापिंड पर विस्फोट के लिए एक छोटा विस्फोटक रखने के बाद हाईबासा 2 उल्कापिंड के दूसरे छोर पर चला जाएगा।

इस खास विस्फोट के लिए खास किस्म का विस्फोटक भी रखा गया है।

करीब ढाई किलोग्राम विस्फोटक के इस्तेमाल से इसपर क्या असर होता है,

यह देखा जाएगा जबकि विस्फोट के दो सप्ताह बाद ही अंतरिक्ष यान अंदर के नमूनों को भी एकत्रित करने का काम करेगा।

जाक्सा के वैज्ञानिक वहां से एक सौ मिलीग्राम नमूना लाना चाहते हैं।

इससे उल्कापिंड के अंदर और बाहर की संरचना के बारे में अधिक जानकारी मिल पायेगी।

उन नमूनों को साथ लेकर अंतरिक्ष यान वर्ष 2020 में वापस लौटेगा।

यान के लौटने के बाद भी इन नमूनों की संरचना के विश्लेषण से अधिक जानकारी मिल पायेगी।

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