उल्कापिंड पर गोली चलायेगा जापान का अंतरिक्ष यान हाईबुसा 2

उल्कापिंड पर गोली बरसायेगा अंतरिक्ष यान
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  • तीन छोटे यान पहले ही उतर चुके हैं

  • उल्कापिंड की सतह उम्मीद से अधिक सख्त

  • पूरी घटना का ऑनलाइन प्रसारण भी होगा

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः उल्कापिंड पर गोली चलाकर उसका असर देखने का अनोखा प्रयोग होने वाला है।

जापान की अंतरिक्ष एजेंसी जाक्सा ने इसकी योजना बनायी है।

सुनने में यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म का हिस्सा जैसा लगता है।

लेकिन वाकई ऐसा होने जा रहा है। जापान का अंतरिक्ष यान हाईबुसा 2 यह काम करने वाला है।

दरअसल इस यान के जिम्मे उस उल्कापिंड की मिट्टी का नमूना एकत्रित करना है।

इसी नमूना को लेने के लिए अंतरिक्ष यान से उल्कापिंड पर गोली दागी जाएगी।

उसके बाद मिट्टी का नमूना एकत्रित किया जाएगा।

जिस उल्कापिंड पर यह गोली दागी जाएगी, उसका नाम रियूगू है।

जापान का अंतरिक्ष यान हाईबुसा इस पर पहले ही पांव रख चुका  है।

पिछले वर्ष के मध्य में उल्कापिंड के पास पहुंचने के बाद इस यान ने

अपने दो रोवर एवं एक लैंडर यान भी उल्कापिंड पर उतार दिये हैं।

लेकिन उल्कापिंड की मिट्टी का नमूना लेना एक कठिन चुनौती है।

दरअसल वैज्ञानिकों को अंतिम समय में यह बात समझ में आयी कि

उनलोगों की उम्मीद के मुकाबले इस उल्कापिंड की चट्टान अधिक सख्त है।

ऐसे सख्त चट्टान पर यान का सेंसर लगाना नुकसानदायक हो सकता है।

वैसे भी उल्कापिंड की वास्तविक स्थिति का पता चल जाने के बाद वैज्ञानिकों ने

इस पर यान उतारने का कार्यक्रम कुछ समय के लिए टाल दिया था।

सारी परिस्थितियों का नये सिरे से अध्ययन करने के बाद ही यान और उसकी छोटी गाड़ियों को उस पर उतारा गया।

अब सब कुछ तय होने के बाद आगामी 22 फरवरी को उल्कापिंड का नमूना

संग्रह करने का अभियान जापान के समय के मुताबिक सुबह के करीब आठ बजे होगा।

उल्कापिंड की जमीन उम्मीद से अधिक सख्त है

जापान की घड़ी में जब यह अभियान चलेगा तब अमेरिका में 21 फरवरी के रात के तीन बज रहे होंगे।

सुखद स्थिति यह है कि जाक्सा ने इस पूरे घटना के ऑनलाइन प्रसारण का भी इंतजाम कर रखा है।

पूरी दुनिया को इससे वाकिफ कराने के लिए जाक्सा ने अपने नियंत्रण कक्ष के घटनाक्रमों का अंग्रेजी में प्रसारण का भी इंतजाम किया है।

इसके तहत देखा जाएगा कि अंतरिक्ष यान से एक बुलेट दागे जाने के बाद किस तरीक से उल्कापिंड के टुकड़े छिटकते हैं।

यान के सिलिंडरनूमा हाथ से इसी नमूने को एकत्रित किया जाएगा।

वैसे हाईबुसा के इस प्रयोग का परीक्षण पृथ्वी पर किया जा चुका है।

यहां के नियंत्रण कक्ष के वैज्ञानिकों ने यह जांचा है कि इस रियूगू नामक उल्कापिंड की बनावट पर गोली दागे जाने का क्या असर हो सकता है।

परीक्षण में यह पाया गया है कि इससे यान को कोई नुकसान नहीं होता है।

इसके खुरदरे और सख्त चट्टानों के बीच से यान को सकुशल उतारना अपने आप में बड़ी चुनौती है।

यदि सब कुछ सही चला तो जापान का यह अंतरिक्ष यान अपना काम पूरा कर वर्ष 2020 में पृथ्वी पर वापस लौट आयेगा।

याद रहे कि इससे पूर्व भी जापान ने वर्ष 2010 में हाईबुसा का पहला यान भेजा था।

वह यान भी एक उल्कापिंड का छोटा सा नमूना लेकर वापस लौट आया था।

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