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जापान के हाईबुसा 2 से उल्कापिंड के नमूने पृथ्वी पर सकुशल पहुंचे

  • सही में आग के गोले की तरफ धरती पर आया कैप्सूल

  • लोगों ने देखा आसमान पर आग की रेखा

  • पैराशूट से इसके गिरने की गति कम हुई

  • उतरते ही अपने स्थान का संकेत देने लगा

राष्ट्रीय खबर

रांचीः जापान के हाईबुसा 2 का कैप्सूल धरती पर सकुशल लौट आया है। इस अभियान से

जुड़े वैज्ञानिकों के आकलन के मुताबिक जब यह कैप्सूल पृथ्वी के वायुमंडल से तेजी से

नीचे आया तो वह बिल्कुल किसी आग के गोले की तरह था।

आसमान पर एक तेज रोशनी की लकीर देखी गयी। आम तौर पर किसी तारा के टूटने की

स्थिति में यह नीले रंग की धारी जैसी दिखती है। इस कैप्सूल के मामले में यह आग के रंग

की सरलरेखा थी,जिसे खुले आसमान पर लोगों ने अपनी खुली आंखों से न सिर्फ देखा

बल्कि अपने अपने मोबाइल कैमरों में कैद भी कर लिया।


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33 लाख मील का सफल कर उल्कापिंड के जिन नमूनों को लेकर जापान का अंतरिक्ष यान

का कैप्सूल लौटा है, उसे सकुशल हासिल कर लिया गया है। उसके गिरने के स्थान के आस

पास पहले से ही वैज्ञानिक दलों को तैनात किया गया था।

जापान की अंतरिक्ष एजेंसी ने इस कैप्सूल को भेजते वक्त ही उसमें ऐसे उपकरण लगा

दिये थे, जो वापसी में धरती पर गिरने के बाद खुद ही सिग्नल जारी करे।

इसलिए उसके गिरने के तुरंत बाद आस पास के इलाकों में मौजूद यंत्रों तक इस कैप्सूल के

वास्तविक ठिकाने की जानकारी मिल गयी थी। वहां पहुंचने के बाद जांच दल ने पहले

उसके तापमान को कम होने का अवसर प्रदान किया।

जापान के इस कैप्सूल को लाने पहले से तैनात था दल

वायुमंडल में वह साढ़े सात मील प्रति सेकंड की दर से नीचे गिरा था। इतनी तेज गति की

वजह से घर्षण से वह आग का गोला बन गया था। जाक्सा के वैज्ञानिकों ने इसके नीचे

आने के घटनाक्रम का वीडियो भी प्रसारित किया है।

आस्ट्रेलिया के रेगिस्तानी इलाके में गिरने के बाद वैज्ञानिकों ने सकुशल उस उपकरण को

हासिल कर लिया है, जिसके अंदर रिगुयू की मिट्टी के नमूने लाये गये हैं।

वैसे बताते चलें कि नासा ने भी एक अन्य उल्कापिंड से ऐसे ही नमूने हासिल किये हैं

लेकिन उसे पृथ्वी पर लौटने में अभी वक्त लगेगा। नासा के उस यान को वर्ष 2023 में

धरती पर लौटना है।

जापान के इस कैप्सूल के उतरने की घटनाओं पर नजर रखने वाले नियंत्रण कक्ष में इस

बात की जानकारी मिली कि काफी तेज गति से नीचे आने के बाद उसमें लगा एक पैराशूट

खुल गया था। इस वजह से उसकी गति धीरे धीरे कम होती चली गयी और अंत में वह

सामान्य गति से ही धरती पर उतरा।

उल्कापिंड पर अपने विस्फोटक से विस्फोट भी किया था

जापान की अंतरिक्ष एजेंसी जाक्सा के इस प्रयोग के दौरान इस हाईबुसा 2 ने रिगुयू पर

एक विस्फोट भी किया था। उसके लिए उसमें पहले से ही विस्फोटक भेजे गये थे।

हाईबुसा के विस्फोट की वजह से वहां 33 फीट का एक गड्ढा हुआ था। विस्फोट की वजह

से ढीले पड़े पत्थरों के नमूनों को भी यह कैप्सूल अपने साथ ले आया है।

बताया गया है कि विस्फोट में गडढा होने के बाद इस यान ने खुद को और गहराई में उतारा

था और वहां से पत्थरों के नमूने एकत्रित किये हैं।


अंतरिक्ष विज्ञान की कुछ और खबरें यहां पढ़ैं


इसकी खास वजह गहराई से प्राचीन पत्थरों में मौजूद तत्वों और यौगिक पदार्थों या

ऑर्गेनिक मिश्रण का बेहतर पता लगाना है। वरना सतह के ऊपर पड़े कणों पर सूर्य के

विकिरण की वजह से बहुत कुछ बदलाव आ चुका होगा। अंदर के पत्थरों के विश्लेषण का

प्राचीन काल की संरचना के बारे में बेहतर जानकारी मिल पायेगी।

अब इस नमूने को जापान लाने के बाद दुनिया भर के वैज्ञानिक संस्थाओं को इसके नमूने

उपलब्ध कराये जाएंगे।

दुनिया भर के वैज्ञानिकों को मिलेगा उल्कापिंड का नमूना

ताकि सभी संगठन अपने अपने स्तर पर इन नमूनों के आधार पर अपनी स्वतंत्र जांच कर

सकें। उसके उतरने का काम रविवार को स्थानीय समय के मुताबिक 2.28 मिनट पर पूरा

हुआ।

उससे निकलने वाले संकेतों से यह पता चल गया था कि वह किस स्थान पर है। लेकिन

वैज्ञानिकों ने सुबह होने तक का इंतजार किया। इस बीच उसका तापमान भी घटकर

सामान्य के करीब आ गया था।

सूर्योदय के बाद शोध दल वहां पहुंचा और कैप्सूल को अपने नियंत्रण में लिया।

इस पूरे अभियान पर नजर रखने वाले जापान में ऑस्ट्रेलिया के राजदूत जेन एडम्स ने

कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान में जापान की यह सफलता अद्भूत है।

उम्मीद है कि रिगुयू से मिले उल्कापिंडों के नमूनों के अध्ययन से इस पूरे सौरमंडल की

रचना के बारे में नई जानकारी मिल पायेगी।

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