जापान ने उल्कापिंड पर उतार दिये अपने दो वाहन अंतरिक्ष अनुसंधान में ऊंची छलांग

जापान के यानों से मिली उल्कापिंड की तस्वीरें
Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  • उल्कापिंड से सूचना भेज रहे हैं दोनों यान

  • सौरमंडल की संरचना समझने का शोध

  • तीसरा यान भी अगले माह उतारा जाएगा

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः जापान ने एक उल्कापिंड पर दो मानव रहित यान उतारने में सफलता पायी है।

रियूजु नाम के इस उल्कापिंड पर पहली बार ऐसा कर पाना संभव हुआ है।

जापान की स्पेस एजेंसी जाक्सा ने यह जानकारी देते हुए बताया है कि दोनों यान उल्कापिंड पर सही तरीके से काम कर रहे हैं और आंकड़े एवं चित्र भेज रहे हैं।

जापान ने मिनार्वा नामक इस अभियान की बदौलत यह काम किया है।

इन दोनों मानव रहित यानों को इसी उल्कापिंड पर शोध के लिए भेजा गया है।

जाक्सा के प्रमुख ताकाशी काबुटा ने इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए बताया कि

अब जापान भी अंतरिक्ष की गहराई में छिपे रहस्यों को बेहतर तरीके से समझ पाने में सक्षम हो गया है।

संपूर्ण घटनाक्रम की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इस उल्कापिंड रियुजु से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर पहुंचने के बाद दोनों यानों को उस पर उतारने का काम गत 21 सितंबर से प्रारंभ हुआ था।

22 सितंबर को दोनों यान अपने मूल अंतरिक्ष यान से अलग होकर उस उल्कापिंड पर सफलतापूर्वक उतर गये है।

इस काम के लिए हायबूसा 2 नामक अंतरिक्ष यान को उल्कापिंड की धुरी पर ही रखा गया था।

इसी धुरी पर चलते हुए वह उल्कापिंड के करीब पहुंच पाने में कामयाब हुआ।

इस अंतरिक्ष यान से अलग होने के बाद दोनों यान एक एक कर उल्कापिंड पर ही उतर गये।

नजदीक से यह उल्कापिंड हीरे के आकार का नजर आता है।

जापान के मुख्य केंद्र तक पहुंच रही है तस्वीरें

जापान के अंतरिक्ष यान से ऐसा दिखता है उल्कापिंड

अंतरिक्ष यान ने भी मानव रहित यान उतारने के पूर्व इसकी तस्वीर भेजी थी।

बाद में रोवर यानों ने भी उल्कापिंड से तस्वीर भेजना प्रारंभ कर दिया है।

उल्कापिंड पर उतारे गये दोनों मानवरहित यानों में से प्रथम में चार और दूसरे में तीन कैमरे लगे हुए हैं।

यह लगातार पृथ्वी के अपने नियंत्रण केंद्र तक तस्वीरें और अन्य आंकड़े भेज रहे हैं।

करीब एक किलोमीटर चौड़े इस उल्कापिंड की स्थितियों का अध्ययन और विश्लेषण किया जा रहा है।

प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक इसमें पानी के अलावा अन्य जैविक पदार्थ भी हैं।

वैज्ञानिकों का मानना है कि इस उल्कापिंड की संरचना को समझने से अंतरिक्ष में सौर मंडल के निर्माण के बारे में भी बहुत कुछ नई जानकारी मिल पायेगी।

इन दो यानों के ठीक ढंग से काम कर पाने की स्थिति में अगले माह एक और यान इसी उल्कापिंड पर उतारा जाएगा।

उल्कापिंड के तमाम आंकड़ों को इकट्ठा करने के बाद यह यान वर्ष 2020 तक एकत्रित नमूनों के साथ पृथ्वी पर लौट आयेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.