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जनता मजदूर संघ ने बस्ताकोला प्रबंधन पर लगाये कई आरोप




तिसरा(झरिया)- जनता मजदूर संघ के केंद्रीय सचिव सह क्षेत्रीय सचिव रूद्र प्रताप सिंह ने विज्ञप्ति जारी करते हुए मंगलवार को बस्ता कोला प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रबंधन ने एक साजिश के तहत बस्ता कोला नौ अंतर्गत घनुडीह परियोजना को बंद कर आउटसोर्सिंग कंपनी को सौंपने का काम किया।




जिससे परियोजना अंतर्गत लगभग चार दशक से असंगठित मजदूर ट्रक लोड कर अपने परिवार का भरण पोषण करने वाले बेरोजगार हो गए। इसके लिए असंगठित मजदूरों ने प्रबंधन का जोरदार तरीके से विरोध प्रदर्शन व धरना प्रदर्शन लगभग कई दौर किया था।

जिसके बाद महाप्रबंधक ने व परियोजना पदाधिकारी ने असंगठित मजदूर व नेताओं को क्षेत्रीय कार्यालय में बुलाकर बैठक किया था। बैठक में महाप्रबंधक ने एक लिखित आवेदन देकर कहा था। की घनुडीह क्षेत्र से जब भी चाहे बीसीसीएल उत्पादन करें या फिर आउटसोर्सिंग कंपनी उत्पादन करें।

ज्योंहि उत्पादन चालू होगी। सर्वप्रथम धनुडीह के बाबूलाल डंप मे कोयला गिरा कर ट्रक लोड करने के लिए ट्रक लोडर असंगठित मजदूर को दिया जाएगा। लेकिन आज 3 वर्ष बीतने को है और प्रबंधन यहां से लगातार उत्पादन कर कोयला दूसरे कोलियरी के लोडिंग पॉइंट पर कोयला गिरा कर वहां के मजदूरों को कोयला देने का काम कर रही है।




जो सरासर भेदभाव को दर्शाता है। इसके लिए 7 जनवरी को क्षेत्रीय कार्यालय पर एक दिवसीय धारणा विरोध प्रदर्शन किया गया था। साथी प्रबंधन को एक लिखित आवेदन भी दिया गया था जिसमें 10 दिन का प्रबंधन को समय दिया गया था ।लेकिन प्रबंधन आज तक ना तो असंगठित मजदूरों से वार्ता किया और ना ही असंगठित नेताओं से जिससे प्रबंधन के प्रति असंगठित नेता व मजदूरों में काफी आक्रोश व्याप्त है।

जनता मजदूर संघ ने मांग नहीं माने जाने पर नाराजगी जतायी

जिससे वाध्य होकर 25 जनवरी से पूरे क्षेत्र का चक्का जाम करने का निर्णय लिया गया है। वही जनता मजदूर संघ के क्षेत्रीय सचिव उपेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि प्रबंधन यहां के मजदूरों को हमेशा झूठा आश्वासन देने का काम किया है। जिससे मजदूरों में काफी आक्रोश व्याप्त है

अगर समय रहते प्रबंधन वार्ता के लिए बुलाकर जल्द कोई पहल नहीं करती है तो वह दिन दूर नहीं है जब पूरे क्षेत्र का उत्पादन कार्य को ठप कर दिया जाएगा। जिसका सारा जवाबदेही प्रबंधन की होगी। लड़ाई आर पार की होगी इसके लिए अगर जेल भी जाना पड़ेगा तो हम मजदूर नेता जाने को भी तैयार हैं।



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