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जनता कर्फ्यू के 14 घंटे भी बहुत मददगार होंगे देश के लिए

  • एक दूसरे से दूरी में भी भलाई है

  • सार्स के दौरान भी कई तथ्य आये थे

  • घरों के अंदर सफाई की निश्चित विधि

रजत कुमार गुप्ता

रांचीः जनता कर्फ्यू के फायदे ही फायदे हैं। अभी भले ही यह बात कुछ लोगों को समझ में

नहीं आये लेकिन अगले दो सप्ताह में उन्हें इसकी अहमियत का पता अवश्य चल जाएगा

राष्ट्रीय आपदा के तौर पर ही कोरोना वायरस की चुनौती को लिया जाना चाहिए। ऐसा

इसलिए भी जरूरी है क्योंकि हम घनी आबादी वाले देश हैं। 14 घंटे के जनता कर्फ्यू में एक

दूसरे और संक्रमण वाले इलाकों से दूर रहकर हम असंख्य विषाणुओं को स्वतः समाप्त

कर सकते हैं, जो किन्हीं कारणों से देश में आ चुके हैं। वैज्ञानिक परिभाषा के मुताबिक

इसके विषाणु आम तौर पर हवा में तीन घंटे, पीतल पर चार घंटे, किसी कार्डबोर्ड पर 24

घंटे तक जीवित रहते हैं। यह याद रखना होगा कि यह विषाणु प्लास्टिक और स्टेनलेस

स्टील पर 72 घंटे तक बचा रह सकता है वशर्ते की तापमान कम हो।

दुनिया भर के वैज्ञानिक लगातार जुटे हैं जांच में 

दुनिया भर के वैज्ञानिक इस नये विषाणु के जीवित रहने के तौर तरीकों पर शोध कर रहे

हैं। किसी के पास भी अभी पक्के तौर पर कोई नतीजा नहीं आया है। लेकिन यह स्पष्ट हो

गया है कि अधिक तापमान में इस प्रजाति के विषाणु अपने आप ही समाप्त हो जाते हैं।

अनेक वैज्ञानिक शोध प्रबंधों का निष्कर्ष है कि 30 डिग्री (86 डिग्री फॉरेनहाइट) से ऊपर के

तापमान में विषाणु कारगर नहीं रहते। वैसे भी उनकी क्षमता 23 डिग्री तापमान से ऊपर

अचेतावस्था की हो जाती है। इसलिए जिन इलाकों का तापमान 23 डिग्री से ऊपर है, वहां

की चिंता अपने आप ही समाप्त हो जाती है। दूसरी तरफ घर और बाहर के जिन इलाकों में

यह तापमान 23 डिग्री से नीचे हैं, वहां के बारे में ख्याल रखने का सबसे आसान तरीका है

कि उनसे दूर रहा जाए। अत्यधिक कम तापमान के इलाकों में इसके वायरस नौ दिनों तक

जीवित पाये गये हैं, ऐसा वैज्ञानिकों का दावा है लेकिन अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है

जनता कर्फ्यू ऐसे आपदा को बढ़ने से रोकने में मददगार

अब तक की शोध के मुताबिक वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि घर के अंदर भी इसके

संक्रमण को बेहतर सफाई से समाप्त किया जा सकता है। इसके लिए 62 से 71 प्रतिशत

इथेनॉल, 0.5 प्रतिशत हाइड्रोडन पैरोक्साइड, 0.1 प्रतिशत सोडियम हाईपोक्लोराइट

(ब्लीच) से इन विषाणुओं का संक्रमण समाप्त किया जा सकता है। यह पिछले सार्स

वायरस के हमले के दौरान भी कारगर साबित हुआ था। घर में 70 फीसद अल्कोहल वाले

सफाई के ब्लीच भी विषाणु मारने में कारगर हैं। करीब पांच लीटर पानी में पांच छोटा

चम्मच ब्लीच डालकर भी जो घोल तैयार होगा, वह घर में मौजूद इस विषाणु के संक्रमण

को समाप्त करने के लिए पर्याप्त होगा।

इन विधियों के अध्ययन से यह स्पष्ट हो जाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता

कर्फ्यू की जो अपील की है, वह बहुत सोच समझकर की गयी अपील है। इसके पीछे

वैज्ञानिक सोच है और इसके माध्यम से भारत पर हो चुके इस अदृश्य हमले के पचास

प्रतिशत को रोकने में हम कामयाब हो जाएगा। वैसे यह तय है कि अगले दो सप्ताह में

अगर फिर से इसका प्रकोप और बढ़ा जो यही विधि और अधिक समय तक आजमाकर भी

हम इस विषाणु से जीत सकते हैं। हम एक दूसरे से जितना कम संपर्क में रहेंगे, उतना ही

वायरस को फैलने से रोक लेंगे। आने वाले दिनों में जैसे जैसे तापमान बढ़ेगा, विषाणु की

मारक क्षमता समाप्त होती चली जाएगी। इस बीच विषाणु के मूल की पहचान कनाडा में

होने की वजह से यह उम्मीद भी की जा सकती है कि इसके लिए कोई दवा भी तैयार हो

जाए। जिसके बाद स्थिति चीन की तरह धीरे धीरे सामान्य हो जाएगी।


 

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