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जेम्स वेब टेलीस्कोप का विशाल आइना एक एक कर जोड़ा गया

  • अंतरिक्ष में नजरदारी के काम में शीघ्र लगेगा

  • हब्बल टेलीस्कोप का स्थान लेगा यह दूरबीन

  • आकार में बहुत बड़ा इसलिए मोड़कर भेजा जाएगा

  • हर छोटी बड़ी रोशनी को पकड़ सकता है यह टेलीस्कोप

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः जेम्स वेब टेलीस्कोप के बारे में जो लोग नहीं जानते हैं, वे पहले यह जान लें कि

यह अंतरिक्ष में स्थापित किया जाने वाला अब तक का सबसे शक्तिशाली टेलीस्कोप है।

इसकी मदद से हम सुदूर महाकाश में घटित होने वाली तमाम घटनाओं की जानकारी ले

सकेंगे। अभी पहले से ही अंतरिक्ष में हबल अंतरिक्ष दूरदर्शी  यह काम कर रहा है लेकिन

उसकी कार्यक्षमता के दिन काफी पहले ही पूरे हो चुके हैं। जेम्स वेब टेलीस्कोप को पहले ही

अंतरिक्ष में स्थापित किया जाना था। कई तकनीकी कारणों से इमें विलंब हुआ है। अब

पहली बार उसके प्राथमिक मिरर को स्थापित कर लिया गया है। इस विशाल संयंत्र के

उपकरणों को एक एक कर जोड़ने का काम चल रहा है। यद्यपि कोरोना संक्रमण की वजह

से नासा के अभियान भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। वैसे जेम्स वेब टेलीस्कोप सहित अन्य

अंतरिक्ष अभियानों के अधिकांश काम अभी कोरोना संक्रमण से बचने के लिए रोक दिये

गये हैं। अब इस मिरर को स्थापित कर लेने के बाद उसकी प्रारंभिक जांच भी पूरी कर ली

गयी है। प्रारंभिक जांच में यह उपकरण सही तरीके से काम करता पाया गया है।

जेम्स वेब टेलीस्कोप का यह आइना विशालाकार है

इस विशाल आकार के आइने पर गौर करें तो यह करीब साढ़े छह मीटर लंबा है। कई

हिस्सों में बांटकर इसे बनाया गया है। इसकी खासियत यह भी है कि यह अंतरिक्ष में भेजे

जाने के वक्त मुड़ा हुआ रहेगा। बाद में अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद पृथ्वी स्थित अपने

नियंत्रण कक्ष से संकेत पाने के बाद यह धीरे धीरे अपने आप को खोलकर आसमान में फैल

जाएगा। नासा द्वारा ऐसे काम के लिए तैयार किया जाने वाला यह अब तक का सबसे बड़ा

आइना है। परीक्षण के दौरान इस उपकरण को खास तौर के गुरुत्वाकर्षण की परिस्थिति

से भी गुजारा गया है। यह परीक्षण इसलिए भी किया गया है क्योंकि अंतरिक्ष में यह शून्य

गुरुत्वाकर्षण की स्थिति में काम करेगा। लिहाजा उस वक्त उसकी स्थिति क्या होगी,

इसकी जांच की गयी है। वैसे जांच दल ने इस परीक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद

यह स्पष्ट कर दिया है कि अंतरिक्ष में भेजे जाने के पहले एक बार फिर से इसका गहन

परीक्षण किया जाएगा। इसकी सबसे अधिक गहराई से जांच इसलिए भी की जा रही है

क्योंकि यह अंतरिक्ष दूरबीन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके माध्यम से हर

गतिविधि को देखने और रिकार्ड करने की सुविधा नासा के नियंत्रण कक्ष को प्राप्त होती

है। इस आइने की विशेषता यह भी है कि हर छोटी बड़ी वस्तु से परावर्तित होने वाली

किरणों को यह पकड़ सकता है। इसलिए अंतरिक्ष की हर छोटी घटना को भी इसके

माध्यम से देखा जा सकेगा।

अंतरिक्ष में बेहतर तरीके से नजर रखेगा यह दूरबीन

पृथ्वी पर बनने वाला यह अब तक का सबसे बड़ा अंतरिक्ष टेलीस्कोप है। आकार में बड़ा

होने के साथ साथ यह पहले से स्थापित हब्बल टेलीस्कोप से अधिक शक्तिशाली भी है।

इसलिए खगोल वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि जो आंकड़े हब्बल से मिलने के बाद बहुत

अधिक स्पष्ट नहीं हो पाये थे, इस नये उपकरण से उनके बारे में भी अधिक जानकारी

मिल पायेगी। इस खगोल दूरबीन का यह विशाल आइना आकार में इतना बड़ा है कि

खुली हुई अवस्था में इसे किसी रॉकेट के अंदर फिट नहीं किया जा सकता है। इसी वजह से

इसकी डिजाइन में संशोधन कर दिये गये हैं। यह मुड़ी हुई अवस्था में रॉकेट के अंदर लाया

जाएगा। अंतरिक्ष में रॉकेट के पहुंचने के बाद उपकरण के सही स्थान पर स्थापित होने के

बाद यह आइना धीरे धीरे पूरा खुल जाएगा और विशाल आकार का हो जाएगा। एक बार

स्थापित हो जाने के बाद यह पूरे अंतरिक्ष पर अपनी नजरदारी का काम प्रारंभ कर देगा।

वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि हब्बल टेलीस्कोप की मदद से जिन इलाकों को सही तरीके से

नहीं देखा जा सका है, इस नये उपकरण से उन इलाकों को भी और बेहतर तरीके से देखा

जा सकेगा। इससे अंतरिक्ष में घटित होने वाली घटनाओं के बारे में और बेहतर जानकारी

मिल पायेगी।


 

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