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जेम्स वेब टेलीस्कोप वह सब देख पायेगा जो हब्बल से छिपा था




आधुनिक अंतरिक्ष टेलीस्कोप को भेजने की तैयारियां
आकार में हब्बल से बड़ा है यह टेलीस्कोप
इसके आइने भी काफी बड़े आकार के हैं
ज्यादा दूर तक साफ साफ देख सकेगा
राष्ट्रीय खबर

रांचीः जेम्स बेव टेलीस्कोप को लेकर खगोल वैज्ञानिकों में काफी उत्सुकता है। दरअसल इस टेलीस्कोप में पहले से कार्यरत हब्बल टेलीस्कोप के मुकाबले कई अतिरिक्त विशेषताएं हैं। इनकी वजह से माना जा रहा है कि यह टेलीस्कोप अंतरिक्ष में ज्यादा बेहतर तरीके से देख सकता है।




इसलिए इसकी बदौलत खगोल वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष के उन इलाकों को ज्यादा बेहतर तरीके से देखने में मदद मिलेगी, जो अब तक छिपा हुआ रहा है।

हब्बल टेलीस्कोप को जब बनाया गया था, उस समय के मुताबिक वह आधुनिक था लेकिन विज्ञान की तरक्की के बाद लोगों ने ऐसा पाया है कि वह उतनी बेहतर तरीके से अंतरिक्ष की बारिक चीजों को नहीं देख पा रहा है, जिसकी आज के दौर में जरूरत है।

जेम्स वेब टेलीस्कोप को इसी कमी को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है। अब उसे अंतरिक्ष में भेजने की अंतिम तैयारियां चल रही हैं।

दरअसल उसे अंतरिक्ष में भेजने के कार्यक्रम में काफी विलंब हुआ है। कोरोना संकट की वजह से भी वहां का काम काज प्रभावित हुआ था। अब उसे उस स्थान पर पहुंचाया जा रहा है, जहां से उसे अंतरिक्ष में भेजा जाना है।

करीब दस बिलियन डॉलर की लागत से तैयार हुआ यह टेलीस्कोप कई अतिरिक्त विशेषताओं वाला है। इसी वजह से वह अंतरिक्ष की गतिविधियों को ज्यादा साफ और बेहतर तरीके से देख पायेगा।

टेलीस्कोप में नजर आने वाले दृश्यों के आधार पर खगोल वैज्ञानिक उनके बारे में ज्यादा बेहतर तरीके से जान भी पायेंगे।

आकार में यह नया खगोल दूरबीन किसी बड़े बोईंग 737 विमान का आधा है। यह धरती से करीब एक मिलियन मील की दूरी से चक्कर काटता रहेगा और नियंत्रण कक्ष को नियमित सूचनाएं और तस्वीरें प्रेषित करेगा।

जेम्स वेब टेलीस्कोप अधिक ऊंचाई पर स्थापित होगा

इसकी विशेषता यह भी है कि इसमें सोने की पर्त वाले आइने लगाये गये हैं। इससे हर चीज को और साफ देखने में काफी सहूलियत होगी।

अंतरिक्ष के जिन इलाकों को आज तक यहां से साफ नही देखा जा सका है, उन इलाकों पर भी अब इसकी पैनी नजर होगी और उसके जरिए वैज्ञानिक भी वहां की स्थिति को ज्यादा बेहतर तरीके से देख पायेंगे।




खगोल वैज्ञानिक क्रिस्टिन चेन जैसे अनेक वैज्ञानिक इस स्थिति को लेकर काफी उत्साहित हैं क्योंकि उनके लिए अंतरिक्ष को इस तरीके से देखने का पहला अवसर प्राप्त होने जा रहा है। स्पेस टेलीस्कोप साइंस इंस्टिट्यूट ही इस टेलीस्कोप को नियंत्रित करेगा।

इसके वैज्ञानिक चेन इसी वजह से पहली बार बहुत अधिक खुश हैं। वर्तमान कार्यक्रम के मुताबिक इसे 18 दिसंबर 2021 को अंतरिक्ष में भेजा जाना है। दरअसल इससे पहले भी इस टेलीस्कोप को लेकर नाहक का राजनीतिक विवाद भी उठ खड़ा हुआ है।

साथ ही इस टेलीस्कोप का नाम बदलने तक की चर्चा हुई थी। लेकिन नासा ने साफ कर दिया है कि वह इसी नाम से इस खगोल दूरबीन को अंतरिक्ष में भेजेगी।

अभी अंतरिक्ष में काम करने वाला हब्बल टेलीस्कोप पृथ्वी की सतह से मात्र 340 मील की ऊंचाई पर चक्कर काट रहा है। दूरी के अंतर की वजह से भी यह नया दूरबीन बेहतर तरीके से काम करेगा, ऐसी उम्मीद की जा रही है।

दोनों की संरचना और डिजाइन में काफी फर्क हैं

इन दोनों दूरबीनों के आकार और संरचना में भी काफी फर्क है। हब्बल टेलीस्कोप मात्र आठ फीट चौड़ा है जबकि जेम्स वेब का व्यास 21 फीट है।

इसके अलावा इस नये दूरबीन में बड़े आकार के और उन्नत श्रेणी के आइने लगाये गये हैं, जो दूर की चीजों को और साफ देखने में मदद करेंगे। सुदूर अंतरिक्ष से रोशनी को पकड़ना ही बड़ी बात है।

जहां से अधिक रोशनी आती दिखेगी, वहां की स्थिति के बारे में ज्यादा बेहतर तरीके से जानकारी मिल पायेगी। समझा जाता है कि इस जेम्स वेब टेलीस्कोप की मदद से प्राचीन तारों और सौरमंडलों के बारे में भी अधिक जानकारी मिल पायेगी।

इससे पूरे व्रह्मांड की रचना कैसे हुई, इस बार में वह नई जानकारियां मिलेंगी, जो पहले अनजानी रह गयी थी। यूनिवर्सिटी ऑफ विंसकॉंसन (मिलवाकुयी)क के वैज्ञानिक जीन क्रेगटन की यही राय है।

वैसे वैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि इस नये जेम्स वेब टेलीस्कोप से वे प्राचीन रोशनी को भी देख पायेंगे, जिससे यह भी पता चल पायेगा कि इस व्रह्मांड की सृष्टि के वक्त जो महाप्रलय हुआ था उसकी वजह क्या थी। जिससे कई अनजाने तथ्यों पर रोशनी पड़ेगी।



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