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जैश-ए-मोहम्मद ने एक बार फिर माहौल को खराब करने की साजिश रची

  • आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस

  • तेजपुर सेना के ऑपरेशनल ग्रुप की बैठक

  • विद्रोही समूहों के खिलाफ ‘ऑपरेशन सनराइज -3

  • म्यांमार सेना का भारतीय आतंकवादियों के खिलाफ अभियान

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: जैश-ए-मोहम्मद की सक्रियता के बारे में भारतीय सेना को पुख्ता जानकारी

मिली है। इस सूचना के बाद फिर से इस मामले में अधिक सतर्कता बरती जा रही है। केंद्र

सरकार आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र

मोदी सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया हुआ है।

जैश-ए-मोहम्मद ने एक बार फिर देश का माहौल खराब करने की कोशिश की है। यह

मानते हुए कि भारतीय सेना ने आतंक के खिलाफ, मंगलवार को तेजपुर में हुई एक

ऑपरेशनल ग्रुप की बैठक में पूर्वोत्तर में मौजूदा सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की गई है।

संचालन समूह की बैठक गजराज वाहिनी के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल शांतनु दयाल की

अध्यक्षता में हुई।बैठक में असम के अपर मुख्य सचिव जिष्णु बरुआ, राज्य पुलिस

महानिदेशक भास्कर ज्योति महंत व सेना के अन्य महत्वपूर्ण पदाधिकारी, राज्य प्रशासन

व बीएसएफ, सीआरपीएफ व एसएसबी समेत अर्धसैनिक बलों के प्रतिनिधि मौजूद थे।

जैश-ए-मोहम्मद के बारे में बेहतर तालमेल से काम जारी

सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस संवाददाता से कहा कि “तंत्र के सुचारू और कुशल

संचालन के परिणामस्वरूप प्रशासन और सुरक्षा बलों के बीच अधिक तालमेल हुआ है,

जिसके परिणामस्वरूप पूर्वोत्तर में सुरक्षा स्थिति में समग्र सुधार हुआ है।खुफिया एजेंसी

ने सरकार को सूचित किया है कि पाकिस्तान और चीन मिलकर भारत में अशांति फैलाने

की कोशिश कर रहे हैं। भारतीय सेना को आईएसआई की इस साजिश को नाकाम करने के

लिए सख्ती से कोशिश करनी होगी। विशेष रूप से, पूर्वोत्तर विद्रोही पाकिस्तान और चीन

से मदद लेकर आतंक फैला रहे हैं।

दूसरी ओर, भारत और म्यांमार सरकार के बीच हुआ समझौता के बाद म्यांमार में सेना ने

आतंकी ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई की गई। वैसे तो सेना के कई किस्से चर्चित रहे पर 5

पराक्रम है जिसके चलते आतंकी संगठनों के छक्के छूट गए हैं। म्यांमार की सेना ने

भारत-म्यांमार सीमा पर इकट्ठे हुए विभिन्न विद्रोही गुटों पर नकेल कसने के लिए ‘

ऑपरेशन सनराइज-3 ‘ शुरू किया है। युंग आंग के नेतृत्व में नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल

ऑफ नगालैंड-खापलांग (एनएससीएन-के) म्यांमार के अंदर अपनी स्थिति मजबूत कर

रहा है।उल्लेख है कि इस महीने की शुरुआत में भारतीय विदेश सचिव हर्ष श्रिंगला और

भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे म्यांमार की दो दिवसीय यात्रा पर गए

थे। दोनों देशों के नेताओं के बीच पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय विद्रोहियों के समूहों के खिलाफ

संयुक्त कार्रवाई के बारे में बातचीत हुई थी।म्यांमार सेना के ‘ ऑपरेशन सनराइज-3 ‘

मुख्य रूप से उत्तरी चीन राज्य और अंय क्षेत्रों में किया है।

म्यांमार के दौरे के बाद वहां से भी मिल रहा सहयोग

दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि भारत-म्यांमार सीमा पर विद्रोही गुट

मिजोरम सीमा के रास्ते भारत की ओर से घुसपैठ की साजिश रच रहे हैं। नई दिल्ली के

अनुरोध पर भारतीय सीमांत क्षेत्र के विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई करने वाला म्यांमार

तीसरा पड़ोसी देश है। यह पहला मौका था जब म्यांमार की सेना ततमादव ने कार्रवाई की

थी और पूर्वोत्तर के उग्रवादियों को सौंप दिया था। ऑपरेशन सनराइज -3′ से तबाह हुए

दहशतगर्द ठिकाने के बारे में सैन्य सूत्रों ने बताया कि म्यांमार सेना जनवरी से ही

दहशतगर्दी समूहों के खिलाफ ऑपरेशन चला रही थी। म्यांमार सेना के इस ऐक्शन में

भारत की 15 इन्फैंट्री और असम राइफल्स बटालियन में सहयोग किया और दहशतगर्दी

समूहों के सफाये में मदद की। म्यांमार से लगती 1,643 किलोमीटर लंबी सीमा में भारतीय

बलों ने ड्रोन के जरिए भी मदद की। यहां यह उल्लेख किए जाने की आवश्यकता है कि

पिछले साल फरवरी में तातमदव ने अपने सुप्रीमो एसएस खापलांग की मौत के बाद सिंग

क्षेत्र में एनएससीएन (के) मुख्यालय पर नियंत्रण कर लिया था।इससे स्पष्ट संकेत मिला

कि म्यांमार अपनी धरती का इस्तेमाल विद्रोह के उद्देश्यों के लिए नहीं होने देगा ।

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