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पुकारता चला हूं मैं गली गली बहार की आखिर वोट का सवाल है




पुकारता चला हूं क्योंकि मुझे वोट चाहिए। राम के नाम पर, रहिम के नाम पर या किसी और के नाम पर बस वोट दे दो भाई। एक बार जीत गया तो पांच साल में पूरे खानदान के लिए इतना माल बना लूंगा कि तुम्हारे दरवाजे आने की जरूरत नहीं पड़ेगी।




उसके बाद तो गाहे बगाहे तुम मेरे दरवाजे के बाहर खड़े रहोगे। बस इस बार पुकारता चला हूं तो कोई मेरी भी सुन ले भाई। पांच राज्य में चुनाव है और बंगाल का झटका थोड़ा ज्यादा लग गया है इसलिए मोदी जी भी बनारस से लेकर प्रयागराज तक लोगों से यही कह रहे हैं कि पुकारता चला हूं।

हिंदू मुसलमान की बात का असर कम हो रहा है तो अब गौमाता की चर्चा होने लगी है। दूसरी तरफ सीमा पर तनाव की बात कर भी राष्ट्रभक्ति का जज्बा उभारने की कोशिश हो रही है। इसके बाद भी इस बार बात वैसी नहीं बन रही है, जैसे पहले बन जाया करती थी।

सभी दलों के नेता इस बात को अच्छी तरह समझ रहे हैं कि पुकारने का असर अब कम होने लगा है। जनसभा के बीच से ही लोग उठकर जाने लगते हैं। बेचारे जेपी नड्डा जी ने तो उत्तराखंड में अपनी रैली बीच में ही छोड़ दी क्योंकि भीड़ नहीं हुई थी।

वैसे एक बार गौर करने लायक है कि पश्चिम बंगाल के चुनाव में भाजपा के चुनावी सेनापति अमित शाह अब बैक सीट पर हैं। इस भाजपा की गाड़ी को खुद नरेंद्र मोदी ही हांक रहे हैं। हर बात पर खुन्नस निकालने वालों का कहना है कि अगर मोदी ने वहां योगी के लिए काम नहीं किया तो उत्तरप्रदेश की कुर्सी की तरह दिल्ली की कुर्सी पर भी योगी आदित्यनाथ दावा ठोंक देंगे।

योगी की नजर भी दिल्ली की गद्दी पर है

योगी के लिए माहौल बनाने में जुटे प्रधानमंत्री ने अब महिलाओं पर ध्यान दियातब क्या होगा। दूसरी तरफ अखिलेश यादव की लाल टोपी का बार बार उल्लेख कर मोदी पहली बार यह संकेत दे रहे हैं कि वे डरते भी हैं। राजनीति में ऐसा डरना जायज भी है। 56 ईंच का सीना लेकर अगर चुनाव हार गये तो उसके बाद आगे क्या क्या होगा, हर कोई समझ रहा है।




पड़ोसी राज्य उत्तराखंड में कांग्रेस का वही हाल है जो उत्तरप्रदेश में भाजप का है। अंदर की गुटबाजी इतनी बढ़ गयी कि राहुल गांधी को जल्दबाजी में हस्तक्षेप करना पड़ गया। वैसे राहुल गांधी को इससे पहले के अनुभवों से लगता है कि यह दिव्यज्ञान मिल चुका है कि अगर सतर्क नहीं रहे तो एक एक कर सारे राज्यों से नेता भागते चले जाएंगे। हरीश रावत ने ट्विटर पर बात क्या लिख दी, देहरादून के कांग्रेस कार्यालय में दो गुटों के लोग आपस में भिड़ गये।

इसी बात पर फिल्म मेरे सनम का यह गीत याद आने लगा है। इस गीत को लिखा था मजरूह सुलतानपुरी ने और संगीत में ढाला था ओपी नैय्यर ने। इस सुंदर से गीत को स्वर दिया था मोहम्मद रफी ने। गीत के बोल कुछ इस तरह हैं।
पुकारता चला हूँ मैं, गली गली बहार की
बस एक छाँव ज़ुल्फ़ की, बस इक निगाह प्यार की
पुकारता चला हूँ मैं
ये दिल्लगी ये शोखियाँ सलाम की
यहीं तो बात हो रही है काम की
कोई तो मुड़ के देख लेगा इस तरफ़
कोई नज़र तो होगी मेरे नाम की
पुकारता चला हूँ मैं
सुनी मेरी सदा तो किस यक़ीन से
घटा उतर के आ गयी ज़मीन पे
रही यही लगन तो ऐ दिल-ए-जवाँ
असर भी हो रहेगा इक हसीन पे

पुकारता चला हूँ मैं

पुकारने का काम तो पंजाब में अरविंद केजरीवाल भी करते जा रहे हैं। चुनावी सर्वेक्षणों से यह बात साफ होती जा रही है कि वहां के चुनाव में इस बार आम आदमी पार्टी एक बड़ी ताकत बनने जा रही है। यह कांग्रेस के लिए कम और भाजपा के लिए चिंता का अधिक विषय है क्योंकि दिल्ली में उपराज्यपाल की ओट लेकर भाजपा ने जो खेल किया है, पंजाब में ऐसा नहीं किया जा सकता है।

दिल्ली के काम काज का नमूना अगर पंजाब में भी दिखने लगा तो समझ लीजिए कि जय सिया राम हो जाएगा। अच्छे स्कूल, अच्छे अस्पताल, के अलावा जो गारंटियां हैं, उससे तो दूसरे दलों की राजनीति की दुकान ही बंद हो जाएगी। बहुत परेशानी है। लेकिन याद आता है कि शुरु में ही इसी केजरीवाल ने कहा था कि हमलोग राजनीति करने नहीं राजनीति को बदलने आये हैं।

उधर गोवा में ममता बनर्जी ताकत लगा रही हैं। नतीजा कुछ भी हो लेकिन यह स्पष्ट हो गया है कि अपने राज्य में भाजपा की चुनौती को उन्होंने सीरियसली लेते हुए अब भाजपा को ही देश के स्तर पर चुनौती देने का मन बना लिया है। लेकिन भाजपा को चुनौती देने के लिए वह लगातार कांग्रेस के नेताओँ को पार्टी में शामिल कर रही हैं, इसका राज समझना अभी बाकी है।



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