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अब पछताए क्या होत है जब चिड़िया चुग गयी खेत




चुनावी चकल्लस

  • सुरक्षा में सेंध की जांच से चुनावी नुकसान कम नहीं
  • वैकल्पिक मीडिया ने तो बहुत कुछ दिखा दिया
  • मोदी के पास झंडा तो भाजपा का दिखा है
  • पंजाब के किसान अब भी नाराज ही हैं
राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः अब पछताए का होता है, जब चिड़िया चुग गयी खेत, एक पुरानी कहावत है। इसके कई दूसरे विकल्प भी हैं मसलन सांप भाग जाने के बाद लकीर पीटना आदि। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काफिले को फिरोजपुर के फ्लाईओवर पर रोकना सुरक्षा में बड़ी चूक और उनकी जान पर खतरा बताकर प्रसारित तो किया गया था। लेकिन किसान आंदोलन के बाद से ही इन बातों को दूसरे पैमाने पर जांचने परखने की जो बात प्रचलित हो चुकी है, उसका निष्कर्ष तो दूसरा निकला।




पहले सुरक्षा में चूक के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार की कार्रवाई को जान लें। केंद्रीय गृह मंत्रालय में पंजाब की सरकार ने अपनी रिपोर्ट दाखिल कर दी है। इसमें शायद यह बताया गया है कि श्री मोदी की यात्रा का पथ अचानक बदलने और रास्ते पर किसानों के आ जाने की वजह से उसके काफिले का रास्ता समय पर साफ नहीं किया जा सका।

दूसरी तरफ केंद्रीय गृह मंत्रालय का जांच दल भी घटनास्थल का दौरा कर आया है। उन्होंने स्थानीय लोगों से बात चीत भी की है तथा इलाके की वीडियोग्राफी की है, ऐसा प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है। लेकिन असली सवाल तो जस का तस खड़ा है कि इससे अब कुछ चुनावी लाभ होगा या नहीं।

पंजाब राज्य की खासियत यह है कि यहां की राजनीति में किसान हमेशा से हावी रहे हैं। यह किसान पहले से ही अपने आंदोलन के दौरान अपनी बात सुन लेने की बात कह रहे थे। अब पछताए का होत है क्योंकि सात सौ से किसानों की मौत कोई छोटी बात नहीं है। कमसे कम इतनी बात तो साफ हो गयी कि पंजाब में किसान नाराज हैं और इससे भाजपा को फिलहाल कोई लाभ मिलता हुआ नजर नहीं आ रहा है।

अब पछताए में कोई फायदा होता हुआ नहीं दिख रहा

बात तो उत्तरप्रदेश की करें, जहां साख दांव पर लगी है। उन्नाव में सदर सीट से भाजपा विधायक पंकज गुप्ता को एक किसान ने जनसभा के मंच पर सबके सामने थप्पड़ लगा दिया। पहले यह देखकर किसी को कुछ समझ में नहीं आया, लेकिन उसके बाद पुलिस वाले हरकत में आए और जबरन किसान को मंच से नीचे उतारा।




किसान की उम्र 60 साल के करीब थी और उसने भारतीय किसान यूनियन की टोपी पहन रखी थी। उसके एक हाथ में लाठी थी। अभी थप्पड़ मारने का कारण पता नहीं चला है। एक चैनल से बातचीत में विधायक थप्पड़ मारने वाली बात से इंकार किया है। उन्होंने कहा कि जनसभा में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था।

लेकिन इस घटना का वीडियो वायरल हो रहा है। यह वाकया दो दिन पुराना है। जानकारी के अनुसार, विधायक पंकज गुप्ता बुधवार को माखी थाना क्षेत्र के ऐरा भदियार में थे। यहां अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी की जयंती कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। वहां जनसभा का भी कार्यक्रम था। विधायक मंच पर थे, तभी बुजुर्ग किसान लाठी पटकते हुए मंच पर उनके नजदीक पहुंचा और थप्पड़ जड़ दिया। कार्यक्रम में सांसद साक्षी महाराज भी मौजूद थे।

उन्नाव के विधायक को किसान ने थप्पड़ मार दिया

इसलिए फिर से इस बात को याद रखना होगा कि अब पछताए का होता है। जब किसानों को पता नहीं क्या क्या कह रहे थे, उस वक्त यह बात समझ में नहीं आयी थी क्या कि किसान भी पलटकर जवाब दे सकते हैं। चुनाव ऐसा मौका होता है, जो पांच साल में एक बार आता है लेकिन नेताओं को मजबूर बना जाता है।

अब इस मजबूरी में कोई थप्पड़ भी जड़ दे, वैसा माहौल पैदा किसने किया। गनीमत है कि योगी जी की गाड़ी अब भी यहां आगे ही चल रही है। लेकिन अगर उन्नाव की घटना की कहीं और पुनरावृत्ति हो गयी तो एक नया फैशन चल निकलेगा, जो भाजपा के लिए खतरनाक होगा।

ऐसी ही कुछ किसान आंदोलन के समय भी हुआ था जब भाजपा के नेताओं का गांव में जाना भी कठिन हो गया था। औऱ अंत में यह दोहराया जरूरी है कि अब पछताए का होत है क्योंकि पंजाब और उत्तरप्रदेश को गुजरात समझना भी शायद मोदी जी की राजनीतिक नासमझी है। यहां के माहौल और सामाजिक ताना बाना को वह सही तरीके से समझ नहीं पाये या फिर उन्हें सही बात की जानकारी नहीं दी गयी थी।



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