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इटली के सोरेंटो तट के करीब सबसे बड़े आकार के व्हेल की लाश मिली

  •  उसका बच्चा बंदरगाह की दीवार पर धक्का मार रहा था

  • तैराक पानी के अंदर उतरे तो पूरा माजरा समझा गया

  • वैज्ञानिक उसके मौत के कारणों की जांच कर रहे हैं

  • प्लास्टिक की वजह से भी मर रहे हैं समुद्री प्राणी

राष्ट्रीय खबर

रांचीः इटली के सोरेंटो बंदरगाह के करीब जल बंदरगाह से जुड़े लोगों की नजर पड़ी तो वह

पहले तो सतर्क हो गये थे। उन्हें तट के करीब आते एक विशाल आकार के वस्तु के होने का

पता चला था। इसका पता चलते ही आनन फानन में गश्ती नौकाओं को उसकी जांच के

लिए भेजा गया। नजदीक जाकर लोगों ने पाया कि यह दरअसल एक व्हेल की लाश है।

फिनबैक प्रजाति का व्हेल वैसे ही पृथ्वी के विलुप्त प्राय प्राणियों की श्रेणी में है। यह भी

उसी प्रजाति का है। लेकिन महत्वपूर्ण बात यह भी है कि यह अब तक का सबसे बड़ा व्हेल

है, जिसकी लाश पायी गयी है। इसके पहले कभी भी इतना विशाल देह नहीं देखा गया था।

इटली के तटरक्षकों ने अपने फेसबुक पेज पर विधिवत इसकी जानकारी दी है। इटली के

सोरेंटो बंदरगाह के करीब इस व्हेल का शव पाने जाने के बाद विधिवत उसकी जांच भी की

गयी है। नेपल्स के करीब स्थित इटली के सोरेंटो बंदरगाह के करीब पाया गया यह शव

करीब 65 फीट लंबा है और उसका वजन करीब 77 टन आंका गया है। फिन व्हेल दुनिया

का दूसरा सबसे बड़ा व्हेल माना जाता है। दुनिया में इससे बड़े आकार का प्राणी ब्लू व्हेल

होते हैं। नेपल्स के जीव विज्ञानी अब यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इस फिन व्हेल

की मौत आखिर कैसे हुई है। वहां के तटरक्षकों ने इसके बारे में काफी रोचक जानकारी दी

है। उनके मुताबिक एक छोटे आकार के व्हेल ने तट की दीवारों को जब लगातार कई बार

धक्का मारा तो लोगों का ध्यान आकृष्ट हुआ था। माजरा समझने के लिए तटरक्षक तैराक

जब समुद्र के अंदर गये तो वहां यह बच्चा व्हेल नजर आया।

इटली के तटरक्षकों का ध्यान बच्चा व्हेल पर गया

उसकी गतिविधियों को देखकर ही समझ में आ गया कि यह व्हेल काफी तनाव में है।

उसका पीछा करने पर तट के करीब आता हुआ विशाल व्हेल का शव भी देखा गया। समझा

जाता है कि जो बच्चा व्हेल बंदरगाह की दीवारों पर धक्का मार रहा था, वह इसी मृत व्हेल

का बच्चा हो सकता है, जो लाश के करीब ही बदहवास सा चक्कर लगा रहा था। अब मौत

के कारणों को समझने के बाद इस बारे में और बेहतर जानकारी मिल पायेगी। आम तौर

पर वैज्ञानिक आंकड़ों के मुताबिक इस प्रजाति का व्हेल आकार मे 85 फीट तक का देखा

गया है। वजन में वे विशाल होने की वजह से बढ़कर 80 टन तक के हो जाते हैं। इनका

विवरण नेशनल ओसिनिक एंड एटमोस्फेरिक एडमिंस्ट्रेशन (एनओएए) ने दी है। यह

समुद्री जीव भी पृथ्वी के विलुप्त प्राय प्रजाति की सूची में काफी पहले से शामिल है। इनके

शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध है। अक्सर ही इस प्रजाति के व्हेल नौकाओं के धक्के से भी घायल

हो जाते हैं। इसलिए नौका चालकों को भी इसके करीब जाते वक्त सावधानी बरतने की

हिदायतें दी गयी हैं। पृथ्वी के सबसे बड़े आकार का प्राणी ब्लू व्हेल होता है, जो आकार में

98 फीट लंबे तक पाये गये हैं। ऐसे विशाल प्राणी एक दिन में चार टन भोजन करते हैं।

उनका वजह किसी मध्यम आकार के कार से अधिक होता है। उसके शरीर की आंतरिक

संरचना ऐसी है कि उसकी खून की सबसे बड़ी नली के अंदर से इंसान का एक बच्चा

आराम से चल सकता है। तीसरे विशाल आकार का प्राणी एक और व्हेल ही है जो पृथ्वी में

दांत वाला सबसे बड़ा प्राणी है।

समुद्र में साढ़े छह हजार फीट नीचे तक जा सकता है एक व्हेल

उसे वैज्ञानिक परिभाषा में फाइसीटर मैक्रोसिफालूस कहा जाता है। यह व्हेल समुद्र में साढ़े

छह हजार फीट की गहराई तक जा सकता है। उसके शरीर के एक तिहाई में उसका सर

होता है जो पानी के भीतर ध्वनि निकालने में विशाल जेनरेटर की तरह काम करता है।

इटली के सोरेंटो तट के करीब पाये गये इस विलुप्त प्राय प्रजाति के प्राणी की लाश बरामद

होने के बाद फिर से समुद्र के अंदर हो रहे प्लास्टिक के प्रदूषण पर भी बहस छिड़ गयी है।

जमीन से होते हुआ लाखों टन प्लास्टिक कचड़ा समुद्र में जा रहा है। अपने भोजन की

तलाश में समुद्री प्राणी इन प्लास्टिकों को भी निवाला बना रहे हैं। उनके पेट मे जमा होने

वाला प्लास्टिक का कचड़ा भी एक सीमा के बाहर होने की स्थिति में उनकी मौत का

कारण बन रहा है।

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