Press "Enter" to skip to content

डर से ज्यादा जरूरी है कोरोना से बचाव करना




डर का ही असर है कि दुनिया के बड़े देशों के आचरण से दक्षिण अफ्रीका दुखी हो गया है। वह मानता है कि ईमानदारी से दुनिया को कोरोना के बारे में जानकारी देकर उसने मानों कोई बड़ी गलती कर दी है।




दूसरी तरफ चिकित्सा वैज्ञानिक मानते हैं कि अभी कोरोना के नये वेरियंट से डर से अधिक जरूरी है उसके बार में अधिक से अधिक जानकारी एकत्रित करना। इस बात का परीक्षण होना शेष है कि कोरोना के वैक्सिन इस नये वेरियंट, जिसका नाम विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ओमाइक्रॉन रखा है। यह दरअसल ग्रीक भाषा का एक अक्षर भी है।

अब दो दिनों के भीतर दक्षिण अफ्रीका के अन्य इलाकों से भी इस नये वेरियंट के रोगियों की संख्या बढ़ने लगी है। दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य मंत्री जो फाला ने कहा है कि पिछले कुछ दिनों से इस नये स्वरुप वाले कोरोना वायरस से पीड़ित लोगों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। दक्षिण अफ्रीका में पहले हर सप्ताह दो सौ रोगी पाये जा रहे थे

लेकिन अब यह अचानक ऊपर उठकर गुरुवार के दिन 2465 पहुंच गया है। इससे समझा जा सकता है कि यह संक्रमण तेजी से फैलता जा रहा है जबकि इसकी पहचान होने के पूर्व अनेक लोग यहां से दुनिया के अन्य देशों में भी गये हैं।

हो सकता है कि वायरस का यह नया वेरियंट उनके साथ दूसरे देशों तक भी पहुंच गया है। अचानक से देश में कोरोना रोगियों की संख्या बढ़ने की वजह से ही वैज्ञानिकों ने इस वायरस की नये सिरे से जांच की है। इसी नई जांच में यह पता चला है कि दरअसल यह वायरस अपना स्वरुप बदल चुका है और यह संरचना के तौर पर अधिक पेचिदा हो गया है।

डर से पहले वैज्ञानिकों को इसे समझ लेने का मौका दें

इस नये स्वरुप से वैसे लोगों को फिर से संक्रमण होने का खतरा है, जो वैक्सिन के दोनों डोज भी ले चुके हैं। इसलिए नाहक डर के बदले चिकित्सा विज्ञानिकों को इसकी सही तरीके से जांच कर लेने का वक्त दिया जाना चाहिए।

इस बीच जैसी कि पहले से हिदायत दी जा रही है, मास्क पहनकर बाहर निकलने तथा बिना कारण भीड़ में नहीं जाने के नियम का अनुशासन पूर्वक पालन भी किया जाना चाहिए। दरअसल यूरोप में अभी फिर से कोरोना का जो हमला हुआ है, वह लोगों के गैर जिम्मेदार आचरण की वजह से ही है।




कोरोनावायरस के नए अफ्रीकी रूप बी.1.1.529 को लेकर बढ़ती चिंता के बीच, भारतीय आर्युविज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने सकारात्मक संकेत देते हुए कहा कि वायरस के नए रूप में संरचनात्मक बदलावों की व्याख्या घातक या अत्यधिक संक्रामक तौर पर करने की आवश्यकता नहीं है।

आईसीएमआर में महामारी विज्ञान एवं संक्रामक रोगों के प्रमुख समीरन पांडा ने बताया, म्यूटेशन कोई नई बात नहीं है। किसी भी वायरस का यह स्वाभाविक आचरण है कि वह अपने आप में लगातार बदलाव करता है।

मलेरिया और टीबी के मामले में हम पहले से ही इस बदलाव से वाकिफ है। दूसरी तरफ अभी इस बात का पूर धैर्य के साथ इंतजार किया जाना चाहिए कि कोरोना वायरस का यह नया स्वरुप कितना घातक है, उसकी जांच वैज्ञानिक कर लें। अब तक तो सिर्फ यह पता चला है कि यह अधिक संक्रामक है लेकिन वह कितना घातक है, उसे समझने के लिए अभी वैज्ञानिकों को भी अधिक आंकड़ों की आवश्यकता पड़ेगी।

संक्रामक तो है यह वेरियंट पर कितना घातक पता नहीं

पांडा ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि वायरस के नए रूप का संदर्भ किसी देश के नाम से नहीं जोड़ा जाना चाहिए क्योंकि इससे अमुक जगह बदनाम होती है। उन्होंने कहा कि लोग टीकाकरण कराएं।

भारत ने गुरुवार को राज्यों से यह सुनिश्चित करने को कहा था कि इन देशों और अन्य जोखिम वाले देशों से यात्रा करने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को कड़ी जांच की जाए। हालांकि कुछ विशेषज्ञों ने कहा है कि किसी निश्चित जवाब पर पहुंचने के लिए हमें अधिक जीनोमिक अनुक्रमण की जरूरत है क्योंकि नया संस्करण बहुत जल्दी फैलता है।

दक्षिण अफ्रीका के सेंटर फॉर एपिडेमिक रिस्पॉन्स ऐंड इनोवेशन के निदेशक तुलियो डी ओलिवियरा ने कहा, दो सप्ताह से भी कम समय में (बी.1.1.529) दक्षिण अफ्रीका में एक भयावह डेल्टा लहर के बाद वायरस का नया रूप सभी तरह के संक्रमणों पर हावी है। यूरोपीय संघ में शामिल देशों में मामलों में भारी वृद्धि के बीच, जर्मनी के स्वास्थ्य मंत्री जेन्स स्पैन ने कहा, यह एक नया स्वरूप कई समस्याएं पैदा करेगा।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सलाहकार दक्षिण अफ्रीका में सामने आए कोरोनावायरस के एक नए चिंताजनक स्वरूप के बारे में जानकारी एकत्रित करने के लिए विशेष सत्र आयोजित कर रहे हैं।



More from HomeMore posts in Home »
More from कोरोनाMore posts in कोरोना »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »

Be First to Comment

Leave a Reply

%d bloggers like this: