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असम में भाजपा के लिए आसान नहीं दिख रहा है इस बार चुनाव जीतना

असम चुनाव विश्लेषण
  • खुद संकट में हैं प्रधानमंत्री की अपनी विश्वसनीयता
  •  मोदी 22 को और शाह 25 को दौरे पर
  •  गमछा का सहारे कांग्रेस की नैय्या आगे
  •  सीसीए के खिलाफ 50 लाख असमिया गमछा
भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : असम में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक खेमों में घमासान चल रहा

है। जैसे जैसे चुनाव का महीना पास आता जा रहा है वैसे वैसे राजनीतिक पार्टियों का

तापमान बढ़ता जा रहा है। हर पार्टी ने चुनाव प्रचार को तेज कर दिया है। पूरे असम में

पार्टियों, विशेषकर कांग्रेस और भाजपा के साथ मतदाताओं को लुभाने के लिए गहन

अभियान चला रहे हैं। कांग्रेस ने किसी तरह से अपना काम पूरा करने में कामयाबी हासिल

की है। एक चुनाव विश्लेषण एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा को इस बार असम

विधानसभा चुनावों में एक बहुत बड़ी चुनौती स्वीकार करने में बड़ी कठिनाई होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विषय से परेशान हैं। आगामी असम विधानसभा चुनावों के लिए

भाजपा को एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि असम के लोगों द्वारा

नागरिकता संशोधन अधिनियम का विरोध किया जा रहा है। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता

ने कहा, भाजपा के लिए असम चुनाव जीतना सम्मान का मुद्दा बन गया है। यही कारण है

कि भाजपा ने असम को जीतने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया है और रणनीति

प्रस्तुत की है।

असम में जल्द ही विधानसभा के चुनाव होने हैं

दरअसल असम में जल्द ही विधानसभा के चुनाव होने हैं और इस बार वहां कांग्रेस पार्टी

ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट और तमाम छोटी पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव

लड़ने की तैयारी में है । भाजपा को डर है कि कहीं एआईयूडीएफ कांग्रेस के साथ मिलकर

बाजी पलट न दे । इसलिए भाजपा के नेता ने अब अपने शब्द बाणों को और तीखा कर

लिया है और एआईयूडीएफ के चीफ बदरुद्दीन अजमल पर जम कर निशाना साध रहे हैं ।

भाजपा के नेता हिमंत बिस्व सरमा कहते हैं, “बदरुद्दीन अजमल असम के दुश्मन हैं ।

उन्होंने असम की राजनीति को खतरनाक स्थिति में ला दिया है एआईयूडीएफ चीफ

अजमल बदरुद्दीन कट्टरपंथियों से पैसा लेते हैं और उस पैसे से वह एक ऐसा नेटवर्क तैयार

कर रहे हैं जो असम की संस्कृति के लिए ठीक नहीं है ।” हालांकि इस तरफ के बयानों का

जवाब उस तरफ से कांग्रेस और एआईयूडीएफ भी लगातार दे रही है । यह बहुत दिलचस्प

है कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के पार्टी के असम की सत्ता में आने के बाद

संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) लागू नहीं करने संबंधी बयान के बीच राज्य प्रदेश

इकाई ने कार्यकर्ताओं से इस अधिनियम के खिलाफ संदेशों के साथ ‘गमछा’ इकट्ठा करने

का आह्वान किया। 126 विधानसभा सीटों वाले असम राज्य में कांग्रेस 97 सीटों पर चुनाव

लड़ सकती है और बाकी सीटें कांग्रेस अपनी सहयोगी पार्टियों के लिए छोड़ सकती है।

हालाँकि, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी 22 फरवरी को फिर से असम आएंगे और गृह मंत्री अमित

शाह 25 फरवरी को आएंगे। प्रधानमंत्री 22 फरवरी को असम में दो जनसभाओं को

संबोधित करेंगे। इस दौरान वे माजुली और धेमाजी के सिलापाथर में दो सार्वजनिक

जनसभाओं को संबोधित करेंगे। ज्ञात हो कि प्रधानमंत्री मोदी उसी दिन वीडियो

कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक और सार्वजनिक बैठक में भाग लेंगे।

लाल धारी वाला सूती ‘गमछा पारंपरिक रूप से राज्य में सम्मान के रूप में दिया जाता है।

दूसरी ओर, असम में हाथ से बने सफेद और लाल धारी वाला सूती ‘गमछा पारंपरिक रूप से

राज्य में सम्मान के रूप में दिया जाता है। पार्टी की घोषणापत्र समिति के अध्यक्ष गौरव

गोगोई ने कहा, ”मैं सभी असमियों से अनुरोध करता हूं कि आप राज्य में सीएए क्यों नहीं

चाहते हैं, के एक संदेश के साथ गमछा साझा करें। आप गमछा पर हस्ताक्षर कर सकते हैं

और कूरियर के माध्यम से हमें भेज सकते हैं या किसी भी पार्टी कार्यकर्ता को सौंप सकते

हैं।कांग्रेस की राज्य इकाई के अध्यक्ष रिपुन बोरा ने कहा, ”हम उम्मीद करते हैं कि पार्टी

को राज्य भर से कम से कम 50 लाख गमछा मिलेंगे और उन सभी को नये स्मारक में

प्रदर्शित किया जाएगा। यहाँ उल्लेख है कि असम में हिंदू आबादी 61 प्रतिशत है जबकि

मुस्लिम आबादी 34 प्रतिशत यानि अगर असम में फिर से राजगद्दी हासिल करनी है तो

इन सभी हिंदू वोटरों को अपने पाले में रखना होगा । वहीं 34 प्रतिशत मुस्लिम की बात करें

तो उनपर एआईयूडीएफ अजमल बदरुद्दीन का अच्छा प्रभाव है और अगर कांग्रेस उनके

साथ मिलकर चुनाव लड़ती है तो असम में बीजेपी को नुकसान झेलना पड़ सकता है । इसी

गणित के मद्देनजर हिमंत बिस्व सरमा अब हिंदू वोटरों को अपने पाले में करने के लिए

ऐसे बयान दे रहे हैं। हालांकि राजनीति का ऊंट कब किस करवट बैठेगा इस पर कुछ कहा

नहीं जा सकता है। कांग्रेस भी इस बार पांच पार्टियों वाले गठबंधन के साथ मैदान में उतर

रही है इसलिए बीजेपी का असम विधानसभा चुनाव में इस बार जीत हासिल करना इतना

आसान नहीं होगा ।

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