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कोरोना से लड़ना बड़ी चुनौती पर प्रकृति को सहेजना भी जरूरी

  • क्लोरोक्वीन दवा बनाने में सिनकोना पेड़ का इस्तेमाल

  • झारखंड में यह पेड़ प्राकृतिक तौर पर पहले से उपलब्ध

कोडरमा: कोरोना से लड़ना पूरी दुनिया के लिए अभी एक बड़ी चुनौती है। इस वायरस के

कहर से पूरी दुनियां जूझ रही है। दूसरे देशों के साथ साथ भारत में भी इस बीमारी से

जूझना बड़ी चुनौती बनी हुई है । इससे बचाव के लिए सभी जरूरी एहतियाती उपाय के

साथ ही इसके इलाज में मौजूदा समय में एक दवा क्लोरोक्विन का इस्तेमाल किया जा

रहा है। इसी क्लोरोक्विन दवा की बड़ी मात्रा हाल ही में अमेरिकी राष्ट्पति डोनाल्ड ट्रम्प के

आग्रह पर भारत द्वारा उपलब्ध कराई जा चुकी है। दरअसल यह क्लोरोक्विन दवा भारत

के सभी हिस्सों खासकर झारखंड में भी मौजूद प्रकृति के वन छेत्रों में उपलब्ध सिनकोना

नामक पेड़ के छाल के एक्सट्रेक्ट से तैयार किया जाता है । स्थानीय डॉक्टर वीरेंद्र कुमार ने

भी बातचीत के दौरान पूछे जाने पर इसकी पुष्टि की है। गौरतलब है कि मौजूदा समय में

देश के अन्य हिस्सों के साथ ही झारखंड में भी वन संपदा के गलत दोहन अवैध उत्खनन

और विध्वंसात्मक कार्यों के कारण प्रकृति में मौजूद सिनकोना जैसे अमूल्य पेड़ रूपी

धरोहर को नुकसान पहुंच रहा है । जिसपर विराम जरूरी है। झारखंड में सिनकोना पेड़ों की

बहुतायत बताई जाती है।

कोरोना से लड़ना जरूरी पर इस खजाने को बचाना भी जरूरी

डॉक्टर वीरेंद्र कुमार ने कहा कि प्रकृति के ये अमूल्य धरोहर बचेंगे तभी तो मानव जाति की

सुरक्षा चिकित्सकीय दृष्टि से मुमकिन हो सकेगा ।गौरतलब है कि सूबे में अवैध कार्यों

विध्वंसात्मक गतिविधियों और कई तरह की परियोजनाओं की भेंट ऐसे अमूल्य पेड़ चढ़

रहे हैं ।जाहिर सी बात है कि केंद्र और राज्य सरकारों की सार्थक पहल सिनकोना जैसे

खजाने को बचाने में मुफीद साबित हो सकती है।

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