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इजरायली वैज्ञानिकों ने सोलर सेल जैसी बिजली पैदा करने की विधि बनायी




समुद्री खर पतवार से बिजली बनाने की नई तकनीक विकसित
प्रकृति को इससे कोई नुकसान नहीं होता
साथ में फोटो संश्लेषण विधि भी मददगार
प्रक्रिया में निरंतर बिजली उपलब्ध होती है

राष्ट्रीय खबर

रांचीः इजरायली वैज्ञानिकों ने इस बार ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इनलोगों ने निरंतर शोध के बाद समुद्री खर पतवार से सोलर सेल के मुकाबले अधिक बिजली पैदा करने की एक तकनीक विकसित कर ली है। इस विधि के व्यापारिक होने के बाद दुनिया के अनेक वैसे देशों को इससे फायदा होगा, जो समुद्र के किनारे हैं और जिनके पास पहले से ही समुद्री खर पतवार प्राकृतिक तौर पर उपलब्ध है।




परीक्षण के बाद यह दावा किया गया है कि इस विधि से किसी सोलर सेल के मुकाबले लगभग बराबर बिजली पैदा की जा सकती है। इस तकनीक की दूसरी विशेषता यह भी है कि इससे पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचता और समुद्री खर पतवार भी प्राकृतिक अवस्था में ही बने रहते हैं।

इजरायली वैज्ञानिकों ने समुद्र में इसे आजमाया

समुद्री खर पतवार से बिजली पैदा करने के लिए मेडिटेरियन सी में इसे आजमाया भी गया है। बताया गया है कि दरअसल एक शोध छात्र यानिव शोल्सबर्ग को इसी समुद्र में तैरते हुए अचानक से यह ख्याल आया था। इसके बाद इजरायल के तीन तकनीकी संस्थानों ने मिलकर इस पर काम करना प्रारंभ किया था।




इसके लिए समुद्री खरपतवार में मौजूद सुक्ष्म जीवों में मौजूद बिजली के कोषों से चुंबकीय तरीके से बिजली खींच लेने पर काम किया गया है। इससे जिन सुक्ष्म जीवों से बिजली खींच ली जाती है, वे प्राकृतिक तौर पर फिर से बिजली पैदा कर लेते हैं। दूसरी तरफ खींची गयी बिजली को एक साथ कर अधिक वोल्ट की बिजली उत्पादित होने लगती है।

जीवित कोषों की बिजली से होता है सारा काम

सुक्ष्म जीवों से आने वाली बिजली के इलेक्ट्रॉनों को इलेक्ट्रोकैमिकल सेलों में संग्रहित कर बिजली प्रवाहित की जाती है। इससे पूरी प्रक्रिया में किसी तरह का बदलाव नहीं होता है जबकि समुद्री खर पतवार में मौजूद सुक्ष्म जीव प्राकृतिक तौर पर बिजली उत्पन्न करते रहते हैं क्योंकि उनकी शारीरिक संरचना ही ऐसी होती है।

इसके साथ ही समुद्री खर पतवार के फोटो संश्लेषण विधि का इस्तेमाल कर अधिक बिजली हासिल की जा सकती है। इस विधि में भी जो बिजली पैदा होती है, उसे संग्रहित कर आगे संप्रेषित किया जा सकता है। इस विधि से ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की जा सकती है, ऐसा वैज्ञानिक दल का दावा है।



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