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ईरान ने सीआईए के जासूस को मौत की सजा सुनाई

तेहरानः ईरान ने सीआईए और इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद को रिवोल्यूशनरी गार्ड्स

के कुद्स फोर्स के कमांडर कासिम सुलेमानी की गतिविधि के बारे में खुफिया जानकारी

प्रदान करने के जुर्म में अपने ही एक नागरिक को मौत की सजा सुनाई है। सुलेमानी के

बारे में दी गयी जानकारी की मदद से अमेरिका उस पर हमला कर सका जिसमें उसकी

मौत हो गयी। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग ने देश की न्यायपालिका के

प्रवक्ता गुलाम हुसैन इस्माइली के हवाले से मंगलवार को कहा, ‘‘महमूद मौसावी मज्द

को मौत की सजा सुनाई गई है। वह इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स के कुद्स फार्स

के भीतर अमेरिकी डॉलर के लिए जासूसी कर रहा था। उसने कासिम सुलेमानी की

गतिविधि और ठिकाने के बारे में दुश्मनों को जानकारी दी थी।’’ महमूद मौसावी को जल्द

ही यह सजा दिये जाने का अनुमान है। गौरतलब है कि तीन जनवरी को बगदाद में

सुलेमानी के विमान के उतरने के तुरंत बाद हुए अमेरिकी हमले में उसकी मौत हो गयी।

ईरान ने सुलेमानी की मौत के बाद पलटवार भी किया था

जनरल सुलेमानी को अमेरिका ने घात लगाकर मारा था। उनके आने जाने की सूचना

पहले से मिलने की वजह से वहां ड्रोन से निगरानी की जा रही थी। जब जनरल सुलेमानी

का काफिला निकला तो उस पर आसमान से ही मिसाइल दागा गया। उनके साथ काफिले

में शामिल अन्य लोगों को भी गोली मारकर खत्म कर दिया गया था। इसके बाद ईरान ने

इराक स्थित अमेरिकी सैन्य शिविर पर भी हमला किया था। लेकिन इससे ज्यादा कुछ

नुकसान नहीं हुआ था क्योंकि अमेरिकी पहले से ही सतर्क थे। इस बीच एक यात्रीवाही

विमान भी युद्ध जैसी सतर्कता के बीच ईरान की मिसाइल का शिकार हो गया था। इस

कार्रवाई पर ईरान के जनरल से सामान्य सभा में पूरी दुनिया से माफी भी मांगी थी।

लेकिन दोनों ही देशों के बीच तेल के लेकर उपजा विवाद अन्य मोर्चों पर अब भी कायम है

और परमाणु संधि के मुद्दे पर ईरान को कई अन्य पश्चिमी देशों का समर्थन भी मिला है।


 

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