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ईरान की मिसाइल का शिकार हुआ था उक्रेन का हवाई जहाज ?

  • कनाडा के तीखे तेवर के बाद ईरान के नर्म स्वर

  • जांच में सभी देशों को शामिल होने का आमंत्रण

  • पहले उक्रेन की मांग को कर दिया था नामंजूर

विशेष प्रतिनिधि

नईदिल्लीः ईरान की मिसाइल की वजह से उक्रेन का हवाई जहाज आसमान में ही आग

का गोला बन गया था। यह सवाल तकनीकी विशेषज्ञों के साथ साथ अमेरिका और कनाडा

के रक्षा विशेषज्ञों द्वारा उठाया गया है। इस नये विवाद के बाद ईरान के स्वर नर्म पड़े हैं

और वह कनाडा से इस बार में अधिक सूचनाओं की मांग कर चुका है। वैसे उक्रेन का

जहाज ईरान की सीमा के अंदर जलकर गिरने की वजह से विमान पर सवार सभी यात्रियों

और क्रू मैंबरों की मौत हो गयी थी। इस विमान पर कनाडा के 63 नागरिकों के सवार होने

की वजह से कनाडा अपनी तरफ से इसके साक्ष्य जुटा रहा है। वैसे विमान के गिरने के बाद

वहां के तमाम सबूत अब तक ईरान के कब्जे में हैं। ईरान ने उक्रेन को भी इस जांच में भाग

लेने की कोई छूट नहीं दी है।

इस चर्चा के जोर पकड़ने के बाद ईरान की तरफ से यह सफाई भी दी गयी है कि अपनी

मिसाइल से इस यात्रीवाही विमान को मार गिराने की बात दरअसल अमेरिकी दुष्प्रचार का

हिस्सा भर है। दूसरी तरफ विमान दुर्घटनाओं के अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ यह मान रहे हैं कि

यह कोई सामान्य दुर्घटना नहीं है क्योंकि विमान में तकनीकी गड़बड़ी होने के बाद विमान

के पाइलटों द्वारा जो चेतावनी संकेत भेजा जाता है, वैसे कुछ भी नहीं हुआ है। इससे

स्पष्ट है कि विमान के आसमान में ही जल उठने के पहले तक विमान के पाइलटों को

किसी गड़बड़ी का कोई अंदाजा नहीं था।

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने अपने एकबयान में साफ तौर पर कहा है कि उनके

पास अन्य विभिन्न माध्यमों से इस बात की सूचना पहुंची है कि यह विमान दरअसल

किसी छोड़े गये मिसाइल की वजह से आसमान में दुर्घटनाग्रस्त हुआ है।

ईरानी विमान दुर्घटनाग्रस्त होने से 170 यात्रियों की मौतईरान की मिसाइल हमले की बात कनाडा के पीएम ने कही

ईरान ने कनाडा के प्रधानमंत्री के इस कड़े बयान के बाद कूटनीतिक तौर पर कनाडा से

इस बार में जानकारी मांगी है। ईरान के अधिकारियों ने विमान बनाने वाली कंपनी बोइंग

के विशेषज्ञों को भी इस जांच में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है। ऐसा इसलिए किया

गया है क्योंकि उक्रेन के अधिकारियों ने कहा है कि यह विमान मात्र तीन साल पुराना था

और उसे उड़ाने वाले सभी कुशल पाइलट थे। ऐसे में किसी तकनीकी गड़बड़ी की स्थिति में

पाइलटों को उसकी जानकारी होती और वे रेडियो के माध्यम से नजदीकी हवाई अड्डों को

इसकी सूचना दे सकते थे।

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