fbpx Press "Enter" to skip to content

वृहस्पति ग्रह पर भी जीवन होने के वैज्ञानिक संकेत मिले

  • एमिनो एसिड मौजूद है वायुमंडल में

  • फॉस्फिन के होने की पुष्टि नहीं हुई

  • अगर जीवन है तो उसका स्वरुप अलग

  • खगोल अनुसंधान में वायुमंडलों की जांच में नये तथ्य

राष्ट्रीय खबर

रांचीः वृहस्पति ग्रह पर भी जीवन हो सकता है, कुछ वैसे संकेत मिले हैं वैज्ञानिकों को

खगोल अनुसंधान के क्षेत्र में वृहस्पति ग्रह पर जीवन होने के नये संकेत मिले हैं।

वैज्ञानिकों ने वहां के वायुमंडल में एमिनो एसिड होने का पता चला है। एमिनो एसिड की

मौजूदगी वहां के वायुमंडल में है। पृथ्वी पर मौजूद वैज्ञानिक तथ्यों के मुताबिक एमिनो

एसिड का होना ही जीवन के संकेत हैं। इस अनुमान के साथ साथ आकलन करने वालों ने

यह स्पष्ट कर दिया है कि अगर वहां जीवन है तो उसका स्वरुप पृथ्वी से बिल्कुल भिन्न

हो सकता है। जीवन की मौजूदगी का दूसरा संकेत फॉस्फिन का होना भी है। वैसे अब तक

फॉस्फिन के होने की पुख्ता पुष्टि नहीं हुई है। इस मामले में शोध करने वालों का कहना है

कि एमिनो एसिड के जिस स्वरुप का वहां होने का पता चला है वह ग्लासाइन स्वरुप में है।

वहां के वायुमंडल में ऐसे एसिड का होना ही पृथ्वी की तर्ज पर जीवन की मौजूदगी के

संकेत देते हैं।

वृहस्पति ग्रह का यह शोध मिदनापुर के वैज्ञानिक का

यह खोज पश्चिम बंगाल के मिदनापुर कॉलेज के पदार्थ विज्ञान विभाग के रिसर्च स्कॉलर

अरिजीत मन्ना का है। उनका यह शोध प्रबंध प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका में प्रकाशित किया

है। इसमें बताया गया है कि वर्तमान में पांच सौ के करीब एमिनो एसिड के स्वरुप हैं।

इसमें से सिर्फ बीस जेनेटिक कोड के हैं। इनमें से ग्लाइसाइन सबसे सरल संरचना है।

इससे जीवन के होने का पता इसलिए लगाया जाता है क्योंकि इसकी वजह से कई किस्मों

के प्रोटिन का विकास होता है। शोध में इस बात की जानकारी मिली है कि मध्य हिस्से में

इसके होने का पता चलने के बाद भी दोनों छोर यानी ध्रुवों पर इसके संकेत नहीं मिले हैं।

ऊपरी हिस्से में इसकी मौजूदगी इस बात को भी प्रमाणित करती है कि काफी लंबे अरसे से

इसके निर्माण की प्रक्रिया यहां मौजूद रही है। इसी वजह से यह वायुमंडल के ऊपरी सतह

तक आ पहुंचा है। पिछले सितंबर माह में शोधकर्ताओं के एक दल ने इस ग्रह र ग्लाइसाइन

के होने की बात कही थी। पृथ्वी पर भी यह मौजूद है और जीवन के होने की पुष्टि करता

है। पृथ्वी पर उसके बनने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है लेकिन वृहस्पति ग्रह पर

ऊर्जा के साधन प्राकृतिक तौर पर मौजूद हैं। इसके बाद एक अन्य शोध दल ने निष्कर्ष

निकाला कि हां मौजूद ज्वालामुखी विस्फोट की वजह से भी इसका निर्माण रासायनिक

प्रक्रिया के तहत हुआ होगा। लेकिन इनके मौजूद होने के बाद भी वहां जीवन है, इसकी

पुष्टि नहीं हुई है। कुछ लोग मानते हैं कि जीवन के नहीं होने के बाद भी अति विशेष

परिस्थितियों में वहां की रासायनिक संरचनाओं की वजह से उनका निर्माण हुआ है और

वहां एमिनो एसिड के होने का जीवन से कोई रिश्ता नहीं है।

अगर वहां जीवन है तो वह पृथ्वी से बिल्कुल अलग ही है

वैज्ञानिक आंकड़ों के मुताबिक वृहस्पति ग्रह की स्थिति सामान्य पृथ्वी जैसे जीवन के

अनुकूल तो कतई नहीं है। वहां का तापमान इतना अधिक है कि किसी अंतरिक्ष यान को

भी गला दे सकता है। साथ ही वहां के दबाव भी अत्यधिक है। लेकिन सतह से करीब 30 से

37 मील की ऊंचाई पर तापमान मारक अवस्था में नहीं है। इस स्थान पर तापमान

माइनस 1 डिग्री से लेकर 93 डिग्री तक है। विवादों के बीच भी इस सोच से इंकार नहीं किया

गया है कि इस माहौल में किसी स्वरुप का जीवन पनप सकता है भले ही वह पृथ्वी के

जैसा जीवन नहीं हो।

वहां जीवन होने के इस सिद्धांत को 1953 के एक प्रयोग से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रमुख

वैज्ञानिक प्रयोग मिलर उरे के नाम से जाना जाता है। जिनकी रिपोर्ट पर यह संभावना

जतायी गयी है, उसमें भी इस सिद्धांत और हुए प्रयोग के परिणामों का उल्लेख किया गया

है। वैसे इन तथ्यों की जांच अभी चल रही है कि क्या एमिनो एसिड बनने की प्रक्रिया वहां

मौजूद गंधक ऑक्साइड की वजह से है। अगर वहां जीवन है तो वह किस स्वरुप मे हो

सकता है, यह सोच भी कई वैज्ञानिकों को रोमांचित कर रही है।

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from HomeMore posts in Home »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from पर्यावरणMore posts in पर्यावरण »
More from पश्चिम बंगालMore posts in पश्चिम बंगाल »
More from प्रोद्योगिकीMore posts in प्रोद्योगिकी »
More from लाइफ स्टाइलMore posts in लाइफ स्टाइल »
More from विज्ञानMore posts in विज्ञान »

Be First to Comment

Leave a Reply

error: Content is protected !!