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पत्रकारिता में पचास साल पूरे कर चुके वरिष्ठ पत्रकार जर्नादन सिंह से खास बात-चीत

  • इस बार नीतीश को अपने घमंड से खतरा है

  • बिहार में दरअसल अफसरों का शासन है

  • राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता है

  • पांच दशक में अनेक उथल पुथल देखे हैं

ब्यूरो प्रमुख

भागलपुरः पत्रकारिता में पचास साल पूरा करना और पूरे कार्यकाल के दौरान बेदाग रहना,

अपने आप में एक बड़ी चुनौती है। आज के दौर में इस किस्म की पत्रकारिता की उम्मीद

शायद नई पीढ़ी के पत्रकार नहीं करते। लेकिन पत्रकारिता दरअसल क्या है और कैसे

इसकी समझ आती है, यह जर्नादन सिंह से मिलकर स्पष्ट होता है। वह भागलपुर के

अन्यतम अनुभवी पत्रकारों में हैं। बिहार के विधानसभा चुनाव और अन्य विषयों पर

उनकी बेबाक राय आज भी नई पीढ़ी के पत्रकारों के लिए पथ प्रदर्शक है।

वीडियो में देखिये उन्होंने किस मुद्दे पर क्या कहा

श्री सिंह से उनके आवास पर ही बात हुई। बातचीत का सिलसिला प्रारंभ हुआ तो लंबा

खिंचता चला गया। इसके बीच अपने पुराने अनुभव भी वह हमारे साथ बांटते चले गये।

उन्होंने इस बार के चुनाव के संदर्भ में एक बहुत बड़ी बात यह कही कि दरअसल इस बार

के चुनाव में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए सबसे बड़ी चुनौती उनका अपना अहंकार है।

पिछले दो कार्यकाल में बहुत अच्छे तरीके से काम करने के बाद उनका यह कार्यकाल

तुलनात्मक तौर पर अच्छा नहीं रहा है। जर्नादन बाबू मानते हैं कि इस बार के शासनकाल

में नीतीश कुमार ने बेहतरी की तरफ ज्यादा ध्यान ही नहीं दिया। इसका नतीजा है कि

आज इस बिहार राज्य में दरअसल अफसरों का शासन चल रहा है। यहां कोई राजनीतिक

व्यवस्था बहाल नहीं है सारा कुछ अफसरों के नियंत्रण में होने की वजह से अपने नफा

नुकसान के हिसाब से काम की प्राथमिकताएं तय कर रहे हैं। इसी वजह से जनता की

अपेक्षा में नीतीश कुमार का इस बार का कार्यकाल संतोषजनक नहीं रहा है।

पत्रकारिता में सुविधा की चाह गलत है

श्री सिंह मानते हैं कि पत्रकारों को अभाव में ही जीना चाहिए। अगर पत्रकार अभाव में नहीं

किसी अमीर की जिंदगी जीने की चाह रखता है तो वह निश्चित तौर पर अपने पेशे के साथ

न्याय नहीं कर सकता है। वैसे उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इस बात के पक्षधर हैं कि

पत्रकारिता को बेहतर बनाये रखने के लिए पत्रकारों को भी सरकारी स्तर पर सुविधाएं

मिलनी चाहिए। लेकिन पत्रकारिता अगर अमीरी के ईर्दगिर्द घूमने लगेगी तो वह जनता से

कट जाएगी, यह तय है। आम आदमी की तरह हर बात को महसूस कर उसे समाज के बीच

परोसना ही पत्रकारिता का मूल धर्म है। श्री सिंह ने अपने लंबे राजनीतिक रिपोर्टिंग के

अनुभव के आधार पर कई बातों की चर्चा की और कहा कि राजनीति में कुछ भी स्थायी

नहीं होता। इसलिए अगर किसी को यह गलतफहमी है कि वह स्थायी तौर पर सत्ता में हैं

तो इस गलतफहमी को सिर्फ जनता की तोड़ती है।


 

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