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कोरोना महामारी लॉकडाउन में दोगुना से अधिक बढ़ा इंटरनेट का उपयोग







नयी दिल्ली : कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए लागू लॉकडाउन में जब संपर्क के सभी माध्यम

लगभग बंद हो गये तब डिजिटल कनेक्टिविटी एक अहम साधन बनकर उभरा और यही वजह है कि

दो साल में इंटरनेट का उपयोग दोगुना से अधिक बढ़ गया। एशिया प्रशांत क्षेत्र में डिजिटल नीति के

मुद्दों पर काम करने वाला क्षेत्रीयटैंक एलआईआरएनईएशिया और नई दिल्ली आधारित नीति-

उन्मुख आर्थिक नीति टैंक आईसीआरआईईआर की जारी संयुक्त सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि

लॉकडाउन में डिजिटल कनेक्टिविटी दोगुना से अधिक बढ़ी है। सर्वे में शामिल 15 से 65 आयु वर्ग के

49 प्रतिशत लोगों ने इंटरनेट उपयोग करने की जानकारी दी जबकि 2017 के अंत में 15-65 आयु

वर्ग में केवल 19 प्रतिशत ने इंटरनेट का इस्तेमाल किया। इसका अर्थ 2021 में 61 प्रतिशत परिवार

ने इंटरनेट का उपयोग किया जबकि 2017 में केवल 21 प्रतिशत ने इसका लाभ लिया। रिपोर्ट के

अनुसार, वर्ष 2020 और 2021 में 13 करोड़ से अधिक यूजर आॅनलाइन हुए। वर्ष 2020 में इंटरनेट

से जुड़े लगभग आठ करोड़ में से 43 प्रतिशत या 3.4 करोड़ से अधिक लोगों ने लॉकडाउन के कारण

इंटरनेट का इस्तेमाल किया।

कोरोना महामारी इस दौरान 64 प्रतिशत परिवार जिनके बच्चे स्कूलों में पढ़ते

इस दौरान 64 प्रतिशत परिवार जिनके बच्चे स्कूलों में पढ़ते हैं सभी के घरों में इंटरनेट की सुविधा

थी, जबकि शेष 36 प्रतिशत इससे वंचित थे। पहले समूह (इंटरनेट वाले परिवार) के 31 प्रतिशत

बच्चों को किसी न किसी माध्यम से दूरस्थ शिक्षा मिलने की संभावना थी जबकि दूसरे समूह

(इंटरनेट रहित परिवारों) के केवल आठ प्रतिशत ने किसी माध्यम से दूरस्थ शिक्षा मिलने की पुष्टि

की। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में भी ऐसा ही रुझान देखा गया। कोरोना महामारी

के कठिन दौर में स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त करने के लिए 65 प्रतिशत लोगों ने इंटरनेट का इस्तेमाल

किया जबकि इंटरनेट से वंचित केवल 52 प्रतिशत लोग स्वास्थ्य सेवा लेने में सक्षम रहे। लेकिन,

आंकड़ों को बारीकी से देखने पर पता चलता है कि ये असमानताएं डिजिटल डिवाइड को आज भी

प्रभावित करती हैं। उदाहरण के लिए इंटरनेट युक्त परिवार के बच्चों को रिमोट माध्यम से सीखने

की अधिक सुविधा थी। ये अधिक सम्पन्न, शहरी परिवार थे जिनके घर के मुखिया अधिक शिक्षित

थे और उनके पास बड़े स्क्रीन वाले उपकरण (जैसे कंप्यूटर, टैबलेट) थे। दूसरी ओर शिक्षा से वंचित

रह गए अधिकतर परिवार साधन हीन थे, जिनके पास बड़े स्क्रीन वाले उपकरण नहीं थे (वे मोबाइल

फोन पर निर्भर थे)। रिपोर्ट के अनुसार, लॉकडाउन के दौरान वर्क फ्रॉम होम की बात आई तो केवल

10 प्रतिशत लोगों ने इसमें सक्षम बताया। जाहिर है इनमें उच्च प्रतिशत वित्त, बीमा, सूचना

प्रौद्योगिकी, लोक प्रशासन और अन्य पेशेवर सेवाओं में काम करने वाले लोग थे।



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