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इंटरनेट की सेवा अब अंतरिक्ष सैटेलाइटों के जरिए देने का उपाय

  • स्पेस एक्स ने लांच किये साठ मिनी स्टारलिंक सैटेलाइट
  • आसमान से पूरी दुनिया को जोड़ने की कवायद
  • पृथ्वी के हर हिस्से तक होगी अंतरिक्ष की पहुंच
  • 280 किलोमीटर ऊंचाई की कक्षा में रहेंगे उपग्रह
प्रतिनिधि

नईदिल्लीः इंटरनेट की सेवा का नया विकल्प सामने आने जा रहा है।

इसके लिए स्पेस एक्स कंपनी ने अंतरिक्ष में साठ छोटे आकार के मिनी

सैटेलाइट लांच किये हैं। इन तमाम सैटेलाइटों को फॉल्कन रॉकेट के जरिए

छोड़ा गया है। वजन में यह सारे सैटेलाइट अपेक्षाकृत हल्के हैं। हरेक का वजन

करीब 260 किलोग्राम है। कुछ सैटेलाइट पहले से ही अंतरिक्ष में स्थापित कर

दिये गये हैं। अगले चरण में पूरी दुनिया के बाहर इन्हीं सैटेलाइटों के जरिए

इंटरनेट सेवा को स्थापित करने की योजना पर इसके बाद काम प्रारंभ हो

जाएगा। वर्तमान में इंटरनेट सेवा के लिए हम जमीन के नीचे बिछी अथवा

समुद्र की गहराई में बिछाये गये मजबूत केबल के जरिए संपर्क स्थापित

रखते हैं। मोबाइल जगत में इंटरनेट की पहुंच हमारी आंखों के सामने सिर्फ

मोबाइल टावरों से होती है। लेकिन दरअसल उनका संबंध भी जमीन के नीचे

बिछे केबल अथवा समुद्र की गहराई में एक महाद्वीप को दूसरे महाद्वीप से

जोड़ने वाले केबलों के माध्यम से होता है।

बीच में प्रशांत और अटलांटिक महासागर में इन केबलों के क्षतिग्रस्त होने की

वजह से इंटरनेट सेवा बाधित भी हो चुकी है, यह सबकी जानकारी में हैं।

उस दौरान खास तौर पर विकसित देशों की बैंकिंग सेवा पर इसका जबर्दस्त

प्रभाव पड़ा था।

इंटरनेट की सेवा के विकल्प की पहले से थी तलाश

धीरे धीरे क्रमवार तरीके से 24 बार ऐसे सैटेलाइट छोड़े जाने के बाद

पूरी दुनिया में इसकी पहुंच स्थापित हो जाएगी।

लेकिन वास्तव में पूरी पृथ्वी के हर हिस्से को इसके दायरे में लाने में थोड़ा और

वक्त लगेगा क्योंकि दूरस्थ इलाकों तक यह संपर्क बनाने के लिए इन छोटे

आकार के सैटेलाइटों को अंतरिक्ष में खास खास इलाकों में स्थापित करना

पड़ेगा। यह काम निरंतर अनुसंधान से ही बेहतर होगा।

कैलिफोर्निया की यह कंपनी अपने रॉकेटों का बार बार इस्तेमाल कर

अपने अंतरिक्ष अभियान के खर्च को कम करने के मामले में चर्चा में आ चुकी है।

कंपनी की प्रस्तावित योजना के तहत पृथ्वी से करीब 280 किलोमीटर की

ऊंचाई पर इन सैटेलाइटों को स्थापित किया जाना है।

इन्हें उस कक्षा में स्थापित रखने की तकनीकी अड़चनों को दूर करने का

प्रयास किया जा रहा है। दरअसल उसी कक्षा में कई अन्य सैटेलाइटों के पहले

से होने की वजह से इनके चक्कर काटने के दौरान एक सैटेलाइट के दूसरे से

टकरा जाने का खतरा भी है। इसी खतरे को दूर करने का काम चल रहा है।

इससे पूर्व भी यूरोपिय स्पेस एजेंसी को अपने एक सैटेलाइट को इसी वजह से

अपनी कक्षा से हटाना पड़ा था।

ब्रॉडबैंड और इंटरनेट सेवा प्रदान करने वाली यह कंपनी अपनी सेवा के लिए

दुनिया की अन्यतम श्रेष्ठ कंपनियों में से एक मानी जाती है।

समझा जाता है कि वह दुनिया के इस कारोबार का सबसे बड़ा हिस्से

अपने कब्जे में लेने के लिए इन तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं।

दुनिया की अन्य कंपनियों के पास फिलहाल इस विकल्प का कोई तोड़ नहीं

होने से इस सेवा के चालू होते ही कंपनी का बाजार के अधिकांश हिस्सों पर

कब्जा हो जाएगा।

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