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अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त वैज्ञानिक दिया कोरोना से बचाव का सुझाव

  • ढाका से राष्ट्रीय खबर के लिए विशेष रिपोर्ट

  • आम आदमी के हाथ कोरोना को परास्त करना

  •  प्राकृतिक तरीकों से भी वायरस को रोकना संभव

  •  वायरस के हमले को खुद समझ सकता है आदमी

  • कई घरेलू उपचार से वायरस नियंत्रित हो जाएगा

अमीनुल हक

ढाकाः अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त वैज्ञानिक डॉ विजन कुमार शील ने खास तौर पर

कोरोना से बचाव के लिए आम आदमी के इस्तेमाल के कई तरीके बताये हैं। उन्होंने कहा है

कि इन प्रावधानों का उपयोग कर भी आम आदमी इस वायरस के मारक प्रभाव से बच

सकता है। 

बांग्ला भाषा में सुन लीजिए उन्होंने क्या कहा है

यह बता देना आवश्यक है कि डॉ शील ही सार्स, डेंगू और अब कोरोना की त्वरित जांच वाले

किट के आविष्कारक है। उन्होंने इस मुद्दे पर अपने व्यस्त समय से ही राष्ट्रीय खबर के

लिए समय निकालकर आम आदमी के फायदे की यह बात कही है। पूरी दुनिया में इस

किस्म के वायरसों पर उनके ज्ञान का पूरी दुनिया लोहा मानती है।

उन्होंने कहा कि इस दौर में विटामिन सी का अधिकाधिक इस्तेमाल फायदेमंद है। इसके

लिए अमरुद, नींबू, आंवला जैसे फलों का उपयोग किया जा सकता है। अगर उनकी

उपलब्धता नहीं हो तो आम आदमी विटामिन सी के टैबलेट भी ले सकता है। लेकिन

कोशिश यह होनी चाहिए कि आदमी प्राकृतिक तौर पर उपलब्ध विटामिन सी का

अधिकाधिक उपयोग करें।

उन्होंने कहा कि कोरोना का तौर तरीका बदल रहा है, इसे दुनिया भर के वैज्ञानिक बता

चुके हैं। लेकिन इन कठिन और अबूझ वैज्ञानिक प्रक्रियाओं में उलझने के बदले आम

आदमी को यह ध्यान देना चाहिए कि अगर उसकी सूंघने की शक्ति और स्वाद की ताकत

चली गयी है तो उस पर कोरोना का हमला हो चुका है। इसके अगले चरण में उसके गले में

दर्द और सूखी खांसी का प्रकोप प्रारंभ होता है। यह वायरस के पहले चरण के लक्षण हैं। इस

श्रेणी के अन्य वायरसों के हमले से इंफ्लूयेंजा, सर्दी और खांसी भी होती है। लेकिन उनमें

नाक से पानी बहना एक निशानी है।

अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त वैज्ञानिक ने सामान्य उपाय बताये हैं

डॉ शील ने कहा कि ऐसा होने पर भी आम आदमी प्रारंभिक तौर पर ही उसकी रोकथाम के

उपाय कर सकता है। उसके ल ए हल्के रंग के गर्म चाय का बार बार सेवन और फिटकिरी

देकर हल्के गर्म पानी से गरारा करते रहना चाहिए। इससे वायरस नियंत्रण होता रहता है

जबकि शरीर के अंदर प्रतिरोधक बनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है । जब किसी को ऐसा

लगे कि वह कोरोना की चपेट में आ चुका है तो वह अदरख, लौंग और एक काली मिर्च

पानी में डालकर एक काढ़ा तैयार कर ले। यह काढ़ा काले रंग का बनता है । इसे मधु अथवा

चीनी के साथ पीने और उससे गरारा करने से भी गले में बैठा हुआ वायरस इनके प्रभाव से

वहीं समाप्त हो जाता है। उन्होंने बताया कि बार बार गले के अंदर गर्मी होने के शरीर में

रक्त संचालन तेज होती है। इससे प्रतिरोधक क्षमता अपने आप ही बढ़ने लगती है। दूसरी

तरफ सूखी खांसी से गले के अंदर के हिस्से जो क्षतिग्रस्त हो सकते हैं, वे भी इसके प्रभाव

में ठीक रहते हैं और इस किस्म की चाय इंफेक्शन को रोकती रहती है ।

यह उल्लेख प्रासंगिक है कि 90 के दशक में डॉ शील ने ब्लैक बंगाल प्रजाति की बकरियों के

संक्राणम बीमारी के लिए वैक्सिन तैयार कर दुनिया का ध्यान आकृष्ट किया था। इसके

बाद वर्ष 2003 में सार्स वायरस के त्वरित जांच की विधि भी उन्होंने ही विकसित की थी।

इस श्रेणी के वायरसों के बारे में काफी जानकारी रखने वाले अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त चंद

वैज्ञानिकों में वह अन्यतम है। उन्होंने अभी बांग्लादेश के लिए त्वरित कोरोना जांच की

विधि भी विकसित कर दुनिया का ध्यान आकृष्ट किया है।


 

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