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कांग्रेस की अंदरुनी घमासान से गिर सकती है मध्यप्रदेश सरकार

  • ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिया पार्टी से इस्तीफा

  • दिल्ली में मोदी और अमित शाह के साथ बैठक

  • कमलनाथ ने अपने सभी मंत्रियों से इस्तीफा लिया

  • सिंधिया समर्थक विधायक भी कमर कस तैयार

रास बिहारी

नई दिल्ली: कांग्रेस की अंदरुनी राजनीति की वजह से अब मध्यप्रदेश की सरकार कभी भी

गिर सकती है। वहां के कद्दावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।

साथ ही वह दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ मिल चुके हैं।

कांग्रेस से अपना इस्तीफा उन्होंने 9 मार्च को ही दे दिया था, जिसकी कॉपी ज्योदिरादित्य

सिंधिया ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर होली के दिन ट्वीट करके जानकारी

दी। उम्मीद जताई जा रही है कि आज बीजेपी में ज्योदिरादित्य सिंधिया शामिल हो सकते

हैं। दूसरी तरफ मामला पूरा बिगड़ जाने के बाद कांग्रेस ने बचाव का प्रयास काफी देर से

प्रारंभ किया है। वैसे सांप निकल जाने के बाद लाठी पीटने का कोई लाभ होगा, इसकी अब

कम ही उम्मीद है। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के घर पर कांग्रेस के

महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ अहम बैठक की।

भोपाल से खबर आ रही है कि सिंधिया खेमा के 20 विधायक इस्तीफे के लिए तैयार हैं। यह

भी खबर मिली है कि मध्य प्रदेश के भोपाल में बीजेपी संसदीय दल की बैठक आज शाम

करीब 6 बजे होगी। मध्यप्रदेश के राज्यपाल भी छुट्टी रद्द कर भोपाल पहुंच रहे हैं। सरकार

गठन को लेकर मंजूरी मिलने की संभावना है।

भाजपा के अंदर सरकार बनाने को लेकर कवायद तेज

इससे पहले गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार की देर रात पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह

चौहान के साथ अपने आवास पर बैठक की थी। बैठक में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी

शामिल रहे। भाजपा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पार्टी ज्योतिरादित्य सिंधिया को

राज्यसभा भेजने के लिए तैयार है। केंद्र में उन्हें मंत्री भी बनाया जा सकता है। कमलनाथ

सरकार के गिरने की स्थिति में बनने वाली नई सरकार में सिंधिया खेमे को एक

उपमुख्यमंत्री पद भी भाजपा दे सकती है।

यहां अगर आंकड़ों का गेम देखें तो गेंद भारतीय जनता पार्टी के पाले में जाती दिख रही है।

अभी मध्य प्रदेश विधानसभा में 230 सीटें हैं, जिसमें से दो विधायकों के निधन होने की

वजह से दो सीटें रिक्त हैं। ऐसे में फिलहाल सदस्यों की कुल संख्या 228 है। ऐसे में बहुमत

का आंकड़ा 115 हुआ। अभी कांग्रेस के पास 114, भाजपा के पास 107, सपा के पास 1,

बसपा के पास 2 और निर्दलीय चार विधायक हैं। सपा, बसपा और निर्दलीय विधायकों का

कांग्रेस को समर्थन है।

जानकार मानते हैं कि सिर्फ अपनी आदत की वजह से इस बार कमलनाथ ने अपनी

सरकार को अस्थिर होने के पर्याप्त अवसर दे दिये हैं। अतिथि शिक्षकों को से मुलाकात के

बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उन्हें आंदोलन ना करने की सलाह देते हुए कहा था कि

सरकार को कुछ समय दीजिए यदि उसके बाद भी काम पूरा नहीं हुआ तो मैं आपके साथ

सड़क पर उतर जाऊंगा। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस बयान पर

काफी तीखी प्रतिक्रिया दी। जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने शेष 3 शब्द कहे ‘तो उतर

जाएं।’ कमलनाथ द्वारा बोला गया यह तीन शब्द ज्योतिरादित्य सिंधिया को वह सब

कुछ करने पर मजबूर कर गए, जिसकी उम्मीद किसी ने नहीं की थी।

कांग्रेस की अंदरुनी घमासान में सिंधिया ने क्या लिखा

इस्तीफे में सिंधिया ने लिखा है कि 1 साल से इस्तीफे के हालात बन रहे थे। मैं पार्टी में रह

कर जनता की सेवा नहीं कर पा रहा था। सिंधिया की चिट्ठी पर 9 तारीख दर्ज है यानी की 9

मार्च को ही इस्तीफा लिख लिया गया था जिसे आज सोनिया गांधी को भेजा गया। भोपाल

में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, जीतू पटवारी, बाला बच्चन, सज्जन सिंह वर्मा, सुरेंद्र सिंह

बघेल और अन्य लोग सीएम कमलनाथ के आवास पर पहुंचे। कांग्रेस नेता सिंधिया की

प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात खत्म हुई। सिंधिया, शाह की गाड़ी से पीएम आवास से बाहर

निकले। जल्द ही सिंधिया बीजेपी में शामिल हो सकते हैं।


 

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