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नगर निगम में फिर शुरु हो गया घालमेल और गलत नक्शा का खेल

  • भूईंहरी जमीन पर नक्शा पास कराने की कवादय
  •  टेनेंसी एक्ट में नहीं है कोई प्रावधान
  •  काश्तकारी कानून में संशोधन का अधिकारी नहीं
  •  नगर निगम के अनेक ऐसे मामले जांच के दायरे में
संवाददाता

रांचीः नगर निगम में फिर से नक्शा का खेल प्रारंभ हो गया है। पहले से ही अनेक

बहुमंजिली इमारतों के गलत नक्शे पास करने के मामले पकड़े जा चुके हैं। कुछ में

विजीलेंस और कुछ में सीबीआई की जांच भी चल रही है। इसके बाद भी कोरोना संकट में

मिली छूट का लाभ उठाते हुए चंद लोग फिर से नगर निगम के लोगों की मिलीभगत से

यह खेल चालू कर चुके हैं। नई जानकारी के मुताबिक जमीन के लोभियों ने अब आदिवासी

भूईहरी जमीन पर भी कब्जा करने का खेल चालू किया है। नियमानुसार इस श्रेणी की

जमीन पर छोटानागपुर काश्तकारी कानून के तहत ऐसा कतई नहीं किया जा सकता है।

अपनी गरदन बचाते हुए जमीन कब्जा करने का यह खेल पहले ही प्रारंभ हुआ था। इसके

लिए  नगर विकास विभाग को भी प्रस्ताव भेजा गया था।  बाद में राजनीतिक उथल

पुथल  के दौर में यह काम बाधित रहा। अब कोरोना संकट की बंदी के दौरान शायद इन्हीं

साजिशों को अंदर ही अंदर अंजाम दिया जाता रहा है।

उल्लेखनीय है कि कचहरी रोड, सरकूलर रोड और डोरंडा के गौरीशंकर नगर का एक चर्चित

मामला अब तक नगर निगम नहीं सुलझा पाया है। रघुवर दास के करीबी लोगों द्वारा

किये गये गलत कार्यों को अब भी सही ठहराने के लिए हर तरीके के हथकंडे अपनाये जा

रहे हैं। अब यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि जब इस श्रेणी की जमीन पर नक्शा पास करना

कानून सम्मत नहीं था तो इस पर बहुमंजिली इमारत कैसे बनायी जा सकती है।

नगर निगम ने नगर विकास विभाग को भेजे प्रस्ताव में कहा है

मिली जानकारी के मुताबिक दरअसल अपनी गरदन ब बचाने की साजिश में रांची ,

भूईंहरी जमीन पर नक्शा पास करने के लिए निगम के पास कई आवेदन आये हैं। ऐसे में

नगर विकास विभाग भूईंहरी जमीन पर नक्शा पास करने का गाइडलाइन उपलब्ध

करायें। आनन-फानन में कमेटी ने गाइडलाइन को तैयार भी कर लिया है। सूत्रों के

मुताबिक भूईंहरी जमीन पर नक्शा पास करने के गाइडलाइन को भू राजस्व विभाग में

भेजने की तैयारी चल रही है। पहले से स्पष्ट है कि भुईंहरी जमीन की खरीद-ब्रिकी नहीं हो

सकती, ऐसे में भूईंहरी जमीन पर बनी बहुमंजिली इमारतों की खरीद-बिक्री के मकसद से

तो यह काम नही किया जा रहा है?

छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट में भूईंहरी अधिकार को बनाये रखा गया और इस जमीन की

खरीद बिक्री पर लोग रोक लगायी गयी है। इस जमीन पर भूईंहरी परिवार सिर्फ अपने सगे

सबंधियों को बसा सकते थे, लेकिन उनका भी सीमित अधिकार ही था। भुईंहरी जमीन

अगर कोई व्यक्ति उपायुक्त की स्वीकृति के बाद विशेष प्रयोजन से लेता भी है, तो इसके

बाद भी भुईंहरी जमीन की प्रजा (उपायुक्त के परमिशन से जिसे मिला है) का उस जमीन

पर सीमित अधिकार है। इतना कुछ स्पष्ट होने के बाद भी नगर निगम में यह खेल

बदस्तूर जारी है।


 

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